Urethral Stricture in hindi

यूरेथ्रल स्ट्रिक्टुरे :Urethral Stricture in hindi या पेशाब की नली में सिकुड़न का उपचार क्या है ?

यूरेथ्रल स्ट्रिक्टुरे एक मूत्र मार्ग की बीमारी है जिसमे लगातार पेशाब की जगह चोट लगने या किसी अन्य कारण से मूत्र मार्ग (यूरेथ्रा) पतला (संकीर्ण) या यूरिन का रास्ता बंद हो जाता है। यह नली ( यूरेथ्रा ) ही मूत्राशय (ब्लैडर) से मूत्र या पेशाब को शरीर के बाहर निकालता है। लेकिन इस बीमारी ( यूरेथ्रल स्ट्रिक्टुरे ) की स्तिथि में मूत्र मार्ग के पतला या बंद हो जाने के कारण मूत्राशय से मूत्र पूरी तरह से नही आ पाता है। मूत्र या यूरिन का बहाव काफी प्रभावित हो जाता है। इस कारण मूत्र मार्ग में कई प्रकार की समस्याएं जैसे संक्रमण, सूजन इत्यादि उत्पन्न हो जाता है।

यूरेथ्रल स्ट्रिक्टुरे Urethral Stricture in hindi के कारण

यूरेथ्रल स्ट्रिक्टुरे के कुछ सामान्य कारण निम्नलिखित है : 

• साइकिल या कहीं और से गिरने या अंडकोष (स्क्रोटम) में चोट लगने के कारण

• पेल्विक फ्रैक्चर (टूटने) के कारण

• कैथेटर डालने के कारण

• प्रोस्टेट के ऑपरेशन या एंडोस्कोपी की प्रक्रिया के कारण

• संक्रमण (इंफेक्शन) के कारण

पेशाब की नली में सिकुड़न के लक्षण

यूरेथ्रल स्ट्रिक्टुरे के कुछ सामान्य रूप से दिखने वाले लक्षण निम्नलिखित हैं : 

• अचानक तथा जल्दी – जल्दी पेशाब करने की इच्छा होना

• पेशाब करते समय काफी दर्द होना

• मूत्रमार्ग से कुछ असामान्य रूप से निकलना ( युरेथरल डिस्चार्ज)

• लिंग का फूल जाना

• पेशाब का रंग काला पड़ जाना

• पेशाब करने में असमर्थता या पेशाब का न होना

• काफी धीरे – धीरे पेशाब होना या पेशाब की मात्रा कम हो जाना

• वीर्य या मूत्र में खून की उपस्थिति

• पेशाब को नियंत्रित न कर पाना (यूरिनरी इंकॉन्टिनेंस)

• पेल्विक या पेट के निचले हिस्से में दर्द होना

● यूरेथ्रल स्ट्रिक्टुरे की जांच

• युरोफ्लोमेटरी ( मूत्र के बहाव को जांचने की प्रक्रिया)

• रेट्रोग्रेट युरेथ्रोग्राम

• साइटोस्कोपी

यूरेथ्रल स्ट्रिक्टुरे या पेशाब की नली में सिकुड़न का इलाज

यूरेथ्रल स्ट्रिक्टुरे के इलाज के कई अलग – अलग विकल्प उपलब्ध हैं। इसमें से इलाज की प्रक्रिया का चुनाव स्ट्रिकचर की स्तिथि में प्रभावित हुए ऊतकों की लंबाई, स्थान तथा गंभीरता के आधार पर किया जाता है। 

यूरेथ्रल स्ट्रिक्टुरे के कुछ विकल्प निम्नलिखित हैं :

• डायलिटेशन

यूरेथ्रल स्ट्रिक्टुरे की स्तिथि में सामान्य रूप से इलाज के रूप में इसी प्रक्रिया को अपनाया जाता है। इस प्रक्रिया के तहत पतले हुए मूत्रमार्ग को फैलाने के लिए साउंड नाम के एक यंत्र (डायलेटर) का उपयोग किया जाता है। यह प्रक्रिया लोकल एनेस्थीसिया के उपयोग के साथ किया जाता है। 

• ऑप्टिकल इंटरनल युरेथ्रोटॉमी

इस प्रक्रिया के तहत विशेष रूप से तैयार किए गए साइटोस्कोप  को मूत्रमार्ग में डाला जाता है। यह पतले हुए स्थान का पता लगाने के लिए किया जाता है। इसके बाद एक ब्लेड या लेज़र की मदद से पतले हुए स्थान की ठीक किया जाता है। 

• युरेथ्रोप्लास्टि

अगर मूत्रमार्ग काफी बड़े स्तर पर पतला हो चुका है, तो इस स्तिथि में एक ऑपरेशन किया जाता है, जिसे युरेथ्रोप्लास्टि कहा जाता है। इस ऑपरेशन के तहत खराब हो चुके मूत्र मार्ग को काट कर हटा दिया जाता है तथा फिर बाकी बचे हिस्से को नसों सहित जोड़ दिया जाता है। इसके अलावा सब्स्टीच्यूशन युरेथ्रोप्लास्टि प्रक्रिया के तहत गाल या होंठ के अंदरूनी परत का उपयोग कर मूत्रमार्ग को ठीक करने की कोशिश की जाती है। इसे करने के लिए एक या दो बार ऑपरेशन करना पड़ सकता है। 

• यूरिन फ्लो डाइवर्जन

जब डायलिटेशन तथा ऑपरेशन के बाद भी युरेथरल स्टिंक्चर की समस्या ठीक नही हो पाती है तो मूत्र का रास्ता ही बदल दिया जाता है। इसके तहत मरीज़ को कैथेटर लगा दिया जाता है। इसके बाद मूत्र इसी कैथेटर के द्वारा शरीर से बाहर निकलता है। हालांकि इस तकनीक का उपयोग विरले ही जिया जाता है। जब इसके इलाज के लिए कोई अन्य विकल्प नही बचते हैं, तभी अंतिम विकल्प के रूप में इसका उपयोग किया जाता है। 

युरेथरल स्टिंक्चर से बचाव के उपाय

युरेथरल स्टिंक्चर के साथ जुड़े दुर्घटनाओं तथा अन्य चिकित्सीय स्तिथि से बचाव पूरी तरह संभव नही है। हालांकि उचित इलाज के द्वारा इसको नियंत्रित किया जा सकता है। सामान्यतः कोशिश करें की अंडकोष में किसी प्रकार की चोट न लगे तथा संक्रमण से बचने की कोशिश करें। 

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