थ्रोम्बोफिलिबीटिस का आसन इलाज – Thrombophlebitis Treatment In Hindi

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थ्रोम्बोफिलिबीटिस

आमतौर पर व्यक्तियोंको छोटी-मोटी बीमारी लगी ही रहती है और जैसा कि हम सभी जानते हैं कि छोटी बीमारियों से ज्यादा खतरा नहीं होता है। पर कहीं न कहीं जो बड़ी बीमारियां होती हैं उनके लक्षण जो हैं वो उन्हीं छोटी बीमारियों से मिलते हुए होते हैं और व्यक्ति उन्हें छोटा समझ के ही अनदेखा कर देते हैं और बाद में फिर व्यक्तियोंको बड़ी बीमारी हो जाती है और उन्हें बस पछताना पड़ता है, इसीलिए कोई भी लक्षण नजर आने पर ज़रूरी होता है कि किसी अच्छे डॉक्टर से सलाह ली जाए और शुरुआती दिनों में ही बीमारी से छुटकारा पा लिया जाए।

दोस्तों, आज हम ऐसी ही एक बीमारी के बारे में आपसे बात करेंगे जिसका नाम है थ्रोम्बोफिलिबीटिस। ये देखने में तो आम बीमारी की तरह ही नज़र आती है पर असल में ये ऐसी होती नहीं है। चलिए हम आपको इस बीमारी के बारे में पूरी जानकारी दें।

थ्रोम्बोफिलिबीटिस क्या है?

थ्रोम्बोफिलिबीटिस एक ऐसी बीमारी है जो पैरों में होती है। ये बीमारी तब होती है जब खून का थक्का व्यक्ति की एक से अधिक नसों में रुकावट को उतपन्न कर देता है। बहुत कम ऐसे मामले सामने आए हैं जिसमे इस बीमारी से पैरों के अलावा कोई और अंग प्रभावित होता है। खून का थक्का खूनी कोशिकाओं का एक ठोस गठन होता है जो एक साथ दबाना होता है। रक्त के थक्के आपके शरीर में सामान्य रक्त के प्रवाह में हस्तक्षेप कर सकते हैं, और उन्हें खतरनाक माना जाता है।  थ्रोम्बोफिलिबीटिस व्यक्ति की त्वचा की सतह के पास नसों या गहराई में हो सकती है, आपकी मांसपेशियों की परतों के बीच में नीचे।

आमतौर पर ये बीमारी बस व्यक्तियोंके पैरों को ही प्रभावित करती है पर और जगह पे भी इसका प्रभाव होना कोई असंभव बात नहीं है। रक्त के थक्के व्यक्तियोंकी नसों में सूजन, कोमलता और लालिमा को पैदा कर देते हैं।

नस की गहराई में खून के थक्के का होना व्यक्तियोंके स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक साबित होता है। इसके होने से ये सम्भावना बढ़ जाती है कि व्यक्ति का जो फेफड़ा है वो खराब हो सकता है ऐसा इसीलिए क्योंकि ये फेफड़ो तक पहुंच जाता है और जो धमनियां होती हैं उनमें रुकावट पैदा कर देता है।

इसीलिए इसके लक्षण अगर दिखाई दें तो तुरंत किसी चिकित्सक से मिलकर इस बीमारी से तुरंत मुक्ति पा ले।

जाने थ्रोम्बोफिलिबीटिस के कारणों के बारे में

थ्रोम्बोफिलिबीटिस  का जो कारण होता है वो होता है रक्त का थक्का। रक्त के थक्कों को बनने के लिए जो कारण चाहिए होते हैं वो निम्न हैं-

  • जो लोग लगातार बिना रुके काम करते रहते हैं उनमें खून का थक्का बनने का जो खतरा होता है वो कम काम करने वालों के मुकाबले अधिक होता है ।  खून का थक्का जमने के जो कारण होते हैं वो नीचे दिए गए हैं –
  • उम्र बढ़ने की वजह से खून का थक्का जमने लगता है ।
  • खूनका थक्का जमने के लिए मोटापा भी जिम्मेदार होता है ।
  • धूम्रपान की वजह से भी खून का थक्का जमता है ।
  • वेरिकोजवेन्स की वज़ह से भी कभी-कभी इसकी शिकायत हो जाती है ।
  • लम्बे समय तक बेड रेस्ट की वजह से ।
  • हार्मोन का संतुलन बिगड़ने के कारण भी खून के थक्के जमते हैं।
  • गर्भ निरोधक गोलियों के सेवन से भी रक्त के थक्के जम जाते हैं ।
  • जिन महिलाओं का मासिक धर्म रुक जाता है उनमें भी खून के थक्के जमने की शिकायत हो जाती है ।
  • यदि व्यक्ति एक ही स्तिथि में बहुत लंबे समय तक रह जाता है जैसे कि, विमान में या फिर कार में सफर करने के दौरान, तो भी रक्त के थक्के बनने की जो सम्भावना होती है वो बढ़ जाती है ।
  • थ्रोम्बोफिलिबीटिस बीमारी अगर परिवार में पहले भी किसी को हुई रहती है तो आगे आने वाली पीढ़ियों को भी इस समस्या से जूझना पड़ सकता है ।

जाने थ्रोम्बोफिलिबीटिस के लक्षणो के बारे मे

यदि व्यक्ति को थ्रोम्बोफिलिबीटिस बीमारी अपनी चपेट में ले लेती है तो व्यक्ति निम्न लक्षणों को महसूस कर सकते हैं-

  • प्रभावित क्षेत्र में कोमलता ।
  • प्रभावित क्षेत्र में सूजन ।
  • प्रभावित क्षेत्र में लालिमा ।
  • प्रभावित क्षेत्र में गर्मी और इसके साथ ही दर्द को महसूस करना ।

इसके अलावा रक्त के थक्के बनने के जो लक्षण होते हैं कभी-कभी वो भी थ्रोम्बोफिलिबीटिस में नज़र आते हैं। रक्त के थक्कों के जो लक्षण हैं वो निम्न हैं-

  • पसीना आना और इसके साथ ही हरदम घबराहट होना ।
  • अचानक से कमज़ोरी महसूस करना ।
  • चेहरे या हाथों-पैरों का अचानक से सुन्न हो जाना ।
  • चलने में समस्या आना ।
  • मस्तिष्क पर प्रभावी पड़ना जैसे कि सुनने समझने में दिक्कत महसूस करना।
  • संतुलन बनाने में दिक्कत होना।
  • जो प्रभावित हिस्सा होता है उसमें सूजन, दर्द और गरमाई महसूस करना।
  • बार-बार सिर  चकराना ।

इसीलिए अगर उपरोक्त में से कोई भी लक्षण दिखाई देते हैं तो समय रहते ही इलाज करवा लेना चाहिए नहीं तो बाद में बस व्यक्ति को पछताना ही पड़ता है।

थ्रोम्बोफिलिबीटिस से बचाव

थ्रोम्बोफिलिबीटिस से बचने के लिए निम्न चीज़ो को करना होगा।

  • यदि व्यक्ति हवाई यात्रा या फिर कार वगैरह से सफर करता है तो ज़रूरी है कि बीच -बीच में वो अपनी पोजीशन को बदलते रहेता कि उसका जो रक्त प्रवाह है वो आसानी से होता रहे और एक ही स्तिथि में बैठे रहने की वज़ह से रक्त रुके नहीं।
  • मोटापे पर नियंत्रण रखने से थ्रोम्बोफिलिबीटिस से बचा जा सकता है ।
  • स्वस्थ जीवन शैली को अपनाने से थ्रोम्बोफिलिबीटिस से बचाव किया जा सकता है और ज़रूरी है कि व्यक्ति हरी सब्जियों को और खून को बढ़ाने वाली चीज़ों को अपने आहार में शामिल करें ।

थ्रोम्बोफिलिबीटिस का आसन इलाज

सतही थ्रोम्बोफिलिबीटिस जो होता है वो बहुत ही दर्दनाक होता है और व्यक्ति को भद्दा बना देता है। यदि व्यक्ति पहली बार इसका शिकार हुए होते हैं तो डॉक्टर को पीड़ित व्यक्ति की प्रभावित नस को हटाने की आवश्यकता होती है और इसको नस की विपट्ठन के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा अगर व्यक्ति को सतही थ्रोम्बोफिलिबीटिस हुआ होता है तो डॉक्टर उसे निम्न निर्देश देते हैं-

  • एंटीबायोटिक दवाओं को लेने के लिए।
  • गर्मी का उपयोग करना ।
  • अंग ऊंचा एंजाइमों ।
  • एन्टीइन्फ्लामेट्री दवाएं लेने के लिए ।
  • सहायता स्टॉकिंग पहनने के लिए।

 

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