टिटनेस क्या है इसके कारण लक्षण व आसन आयुर्वेदिक इलाज – Tetanus Treatment In Hindi

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टिटनेस क्या है इसके कारण लक्षण व आसन आयुर्वेदिक इलाज

टिटनेस की समस्या केवल घावो में सक्रमंण होने की वजह से होती है | टिटनेस केवल क्लॉस्ट्रीडियम टिटानी नामक बैक्टीरिया के कारण ही होता है | क्लॉस्ट्रीडियम टिटानी जीवाणु हमारे घाव या चोट में टिटेनोस्पासमिन नामक जानलेवा न्यरोटॉक्सिन पैदा करके टिटनेस जैसी समस्या को जन्म देता है | टिटेनोस्पासमिन एक प्रकार का जानलेवा न्यरोटॉक्सिन होता है |

जो धीरे-धीरे यही जहर हमारे पूरे शरीर में फैलने लगता है | अगर हम इसका सही समय पर उपचार ना कराये | तो स्थिति घातक हो जाती है | कई बार तो इस बीमारी के कारण व्यक्ति की म्रत्यु भी हो जाती है | टिटनेस होने पर शरीर की मांसपेशियों में ऐठन महसूस होने लगती है | और शरीर में रुक-रुक कर दर्द होता रहता है | हालांकि किसी चोट के लगने के बाद यदि तुरंत टिटनेस का टीका लगवाया जाये | तो इससे होने वाली परेशानियों से बचा जा सकता है | आइये जानते है ये बीमारी कितने प्रकार की होती है |

टिटनेस चार प्रकार का होता है

  1. सार्वदैहिक टिटेनस |
  2. स्थानीय टिटेनस |
  3. कैफेलिक टिटेनस |
  4. शिशुओं में टिटेनस |

ये बीमारी होने का कई कारण मने जाते है | लेकिन जंग लगे लोहे से चोट लगने पर इस बीमारी होने का खतरा अधिक रहता है | क्युकी क्लॉस्ट्रीडियम टिटानी हमारे घाव में जन्म लेने लगता है | यह जीवाणु छड के आकार का होता है | यह जीवाणु दो रूपों में पाया जाता है | डोरमंट और सक्रिय रूप में पाया जाता है | जिसकी वजह से ही ये बीमारी हमारे शरीर में जन्म लेती है | इस बीमारी होने के कई कारण होते है |

टिटनेस होने के कुछ मुख्य कारण

  • किसी भी तरह के चोट लगने की वजह से |
  • जंग लगे लोहे से चोट लगने की वजह से |
  • सर्जरी के बाद हो सकती है |
  • फोड़ा फुंशी होने की वजह से |
  • सुई या इंजेक्शन से नशा करने की वजह से |

अगर आप भी ऊपर दिए किसी भी चीज से ग्रस्त होते है | तो आपको इस बीमारी का टीका जरुर लगवा लेना चाहिये | क्योंकिभारत में लगभग इस बीमारी की वजह से हर साल दस लाख लोग अपनी जान या शरीर का अंग गवा देते है | अब आइये जानते है | टिटनेस के लक्षणों के बारे में

टिटनेस के कुछ सामन्य से लक्षण

  • उच्च रक्तचाप का होना |
  • गर्दन में ऐठन का होना |
  • चिडचिडापन अधिक हो जाना |
  • पसीना खूब आना |
  • साँस लेने में अधिक तकलीफ होना |
  • ह्रदय गति बहुत तेज होना |

टिटनेस से बचाव के कुछ साधारण घरेलु उपाय जानते है |

घाव पर नीम का तेल लगाये – नीम के तेल में जटिल कार्बनिक यौगिक, अकार्बनिक तत्व पोटैशियम, कैल्सिमय, मैग्नीशियम, व लिमनायडस जैसे तत्व होते है | लिमनायडस नीम का मुख्य बहुपयोगी रासायनिक पदार्थ होता है | ये कीटों, जीवाणू, विषाणू से हमारे शरीर की रक्षा करता है | इसीलिये आपको घाव हो जाने पर नीम का तेल जरुर लगाना चाहिये | जिससे आपको टिटनेस होने का खतरा टल सके |

मोमबत्ती की मोम घाव पर लगाये – मोम शहद से बना एक पदार्थ होता है | जिसमे पैराफिन नामक तत्व पाया जाता है | जो हमारे घाव को जल्द ठीक करने में हमारी बहुत मदद करता है | और हमारे शरीर को टिटनेस जैसी समस्या से भी दूर रखता है |

हल्दी तेल से करे टिटनेस का उपचार – हल्दी सभी प्रकार के घाव व दर्द को ठीक करने में हमारी बहुत मदद करती है | क्युकी हल्दी में एंटी-इफ्लेमेंटरी, प्रोटीन, खनिज द्रव्य, करबोहाईड्रेट, विटमिन A, व रंजक द्रव्य जैसे गुणकारी तत्व होते है | जो हमारे घाव को जल्द ठीक करके टिटनेस जैसी समस्या को दूर करती है | आपको इस बीमारी के उपचार के लिये सरसों के तेल को गर्म करके उसमे थोड़ी हल्दी मिलाकर अपने घाव पर लगाना चाहिये |

तारपीन का तेल लगाकर करे टिटनेस का आसन उपचार – तारपीन का तेल भी एक प्रकार का एंटीसेप्टिक होता है | जो हमारे घाव में स्तिथ सभी जीवाणु को खत्म करके हमारे घाव को जल्द ठीक हमारे शरीर को टिटनेस जैसी खतरनाक बीमारी से बचाती है |

टिटनेस की समस्या से बचने के लिये ध्यान रखने योग्य कुछ जरुरी बातें

  • ह्यूमन टिटनेस इम्यूनोग्लाबलिन, इन्ट्रीथिकल नामक टीके को जरुर लगवाए |
  • कोई भी ऐसा घाव जिससे त्वचा फट गई हो, उसे तुरंत पानी और साबुन से साफ़ किया जाना चाहिये |
  • घाव को कभी खुला न छोड़े क्योकि सक्रमंण का खतरा रहता है |
  • यदि घाव से खून बह रहा हो तो उस पर सूखा सूती कपड़ा बांधे |
  • घाव होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेकर उसका उपचार जरुर करवाए |

अगर आप भी टिटनेस की समस्या से बचना चाहते है तो आपको ऊपर दी हुई सभी बातों को ध्यान पूर्वक अपनाना चाहिये |

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