रूबेला वायरस का परिचय – Rubella Infection In Hindi

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रूबेला वायरस

रूबेला, जिसे जर्मन खसरे के नाम से भी जाना जाता है, प्रमुख रूप से बच्चों में फैलने वाली एक संक्रमक बीमारी है. यह संक्रमण रूबी वायरस की कारण फैलता है. इस वजह से इसे रूबेला रहते है. खसरा से मिलते जुलते लक्षणों के कारण इस बीमारी को जर्मन खसरा के अलावा तीन दिन ले खसरे के नाम के भी जानते है. यद्यपि रूबेला और खसरे दोनों जिन वायरसों के कारण फैलने है उनमें कोई समानता नही है. यह उतना गंभीर और संक्रामक नही होता है जितना कि खसरा. इस वायरस का सबसे ज्यादा प्रभाव बच्चों और महिलाओं में देखने को आया है. खासकर गर्भवती महिलाओं को इस वायरस के काफी दुष्परिणाम देखने को मिलते है.पूरी दुनियाँ में वर्ष 2012 में करीब 10,0000 लाख मामले सामने आए.

रूबेला वायरस कैसे फैलता है?

रूबेला वायरस एक संक्रमक बीमारी है. इसका प्रसार एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में बड़े ही आसानी से हो सकता है. जब भी कोई रूबेला वायरस से ग्रसित व्यक्ति ख़ासता है, या छीकता है तो रूबेला के वायरस बाहर वातावरण में आ जाते है. इसके बाद हवा के माध्यम से ये वायरस स्वस्थ व्यक्ति के शरीर मे प्रवेश कर जाते है.

जाने रूबेला वायरस के प्रमुख्य लक्षण के बारे में 

  • रूबेला के प्रारंभिक लक्षणों में बुखार और मिचली आना है. इसके साथ ही जो इसका सबसे प्रमुख लक्षण है वो है शरीर मे गुलाबी रंग के दाने या चकत्तों का निकलना. लगभग 80% मामलों में यह लक्षण दिखाई देते है. जब कोई व्यक्ति रूबेला के वायरस से संक्रमित होता है, तो उसके संक्रमण होने के एक सप्ताह के अंदर ही यह चकत्ते दिखाई देने लगते है. चकत्ते निकलने की शुरुआत शरीर के ऊपरी हिस्से से प्रारंभ होती है. इसके बाद यह क्रमशः शरीर के निचले हिस्सों में भी फैलते जाते है.
  • इसके अलावा शरीर के जोड़ो में जोरदार दर्द रहता है. यह लक्षण खासकर उन महिलाओं में दिखाई देते है जो गर्भवती है. इसके साथ ही शरीर की ग्रंथियों में भी सूजन रहता है.
  • संक्रमित व्यक्ति के सर में हमेशा दर्द बना रहता है. सर हमेशा भारी भारी प्रतीत होता है.
  • व्यक्ति की आंखे इस संक्रमण से प्रभावित हो जाती है. आंखों में हमेशा लालिमा छाई रहती है. इसके साथ ही आंखों में सूजन आ जाती है.
  • मांसपेशियों में एक अजीब सा खिंचाव रहता है. जिसकी वजह से मांसपेशियों में जकड़न से महसूस होता है, और इनमे दर्द बना रहता है.
  • रूबेला वायरस से संक्रमित व्यक्ति को भूख कम लगती है.
  • इस दौरान बहुत तेज बुखार रहती है जो लगभग 39 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाती है.

    महिलाएं रखे खास सावधानियां

    ऐसा देखने मे आया है, कि रूबेला वायरस महिलाओं को भी बहुत प्रभावित किया है. इसलिए महिलाओं को अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना बहुत आवश्यक है, ताकि वह खुद को इस वायरस से बचा सके.

    यदि आप गर्भधारण की योजना बना रही है तो यह ध्यान रखें.

    अगर कोई भी महिला निकट भविष्य में गर्भधारण की योजना बना रही है, तो उन्हें इस दौरान बहुत सावधानी रखनी चाहिये, क्योंकि आपकी छोटी सी लापरवाही भी आपके बच्चे की जिंदगी को प्रभावित कर सकती है. गर्भधारण से पहले आपको एमएमआर टीकाकरण के बारे में अवश्य ही विचार करना चाहिए. इस टीकाकरण के द्वारा आपका बच्चा रूबेला वायरस की चपेट में आने से बच सकता है. अन्यथा यदि कोई महिला गर्भधारण के बाद पहली तिमाही के दौरान ही रूबेला वायरस से ग्रसित हो जाती है, तो यह उसके बच्चे को बहुत प्रभावित कर सकता है. आपका बच्चा दिव्य ांग पैदा हो सकता है. उसकी देखने और सुनने की शक्ति खो सकती है. यहां तक कि उसकी जान भी जा सकती है.

यदि आपका गर्भ कुछ महीने का हो चुका हो तो

यदि महिला को गर्भधारण किये हुए कुछ महीने हो चुके है, खासकर उसके गर्भधारण की पहली तिमाही निकल चुकी है तो इस दौरान हर प्रकार के होने वाले शारिरिक बदलाव के प्रति सजग रहना चाहिए. कोई भी समस्या दिखने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए. वही इस बात की पुष्टि कर पायेगा की आपको रूबेला वायरस संक्रमण है या नही. इसके साथ ही यदि कोई अन्य शारिरिक बीमारियां है तो उनका भी समय से इलाज करवाएं.

रूबेला वायरस का इलाज कैसे करें

रूबेला एक ऐसा वायरस है जिसका सीधा कोई इलाज नही है. सहायक इलाजों के मदद से इस वायरस को खत्म किया जाता है.

  • रूबेला वायरस से बचने का सबसे बेहतर साधन टीकाकरण है. एमएमआर टीकाकरण कराने से आप न सिर्फ रूबेला से बच सकते है, साथ ही खसरा जैसी बीमारी से भी आपका बचाव हो जाता है. एक बार टीकाकरण कराने के बाद उम्र भर दोबारा टीकाकरण कराने की जरूरत नही पड़ती है.
  • खासकर छोटे बच्चों में यह टीकाकरण 2 चरणों मे किया जाता है. इसके पहले चरण में जब बच्चा 12 से 15 माह के बीच होता है, तब इसका टीकाकरण किया जाता है. इसके बाद इसका दूसरा चरण तब पूरा किया जाता है, जब बच्चे की उम्र 4 से 6 वर्ष के बीच हो जाती है.
  • जो अपने उम्र की किशोरावस्था में है या जो वयस्क हो चुके है, वो व्यक्ति भी इस टीकाकरण के द्वारा खुद को रूबेला वायरस से बचा सकते हैं.
  • रूबेला मुख्य रूप से उन व्यक्तियोंपर आक्रमण करता है, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है. इस वजह से उनका शरीर उस वायरस से लड़ नही पाता है. इसलिए खुद को रूबेला वायरस से बचाने के लिए ऐसा भोजन करें, जो आपके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाये. इसके लिए आप फलों को अपने आहार में शामिल कर सकते है. उसके अलावा लहसून का सेवन भी हमारे शरीर को विभिन्न वायरसों से लड़ने के काबिल बनाता है.
  • यदि कोई महिला, जिसने रूबेला का टीकाकरण नही कराया है, उसका बच्चा इस रोग से प्रभावित हो सकता है. इसलिए गर्भधारण से पहले टीकाकरण जरूर कराएं. लेकिन यह टीकाकरण उन महिलाओं के लिए नही है, जो पहले से ही गर्भवती है. पर फिर भी कई महिलाओं ने अनजाने में गर्भवती होने के बावजूद यह टीकाकरण कराया, और इसके कोई दुष्परिणाम नही निकले.फिर भी टीकाकरण के पहले डॉक्टर से सलाह ले कर ही कोई निर्णय करें.

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