पीएमएस से बचाव प्रीमेंसट्रूअल सिंड्रोम महिला के हार्मोन परिवर्तनों के कारण जन्म लेता है | शोधकर्ता के अनुसार भारत में पंद्रह प्रतिशत महिलाये इस रोग से पीड़ित है इस रोग में महिला को पेट दर्द, स्तनों में सूजन व पीठ में दर्द जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है डॉक्टर्स के पास इस बीमारी का कोई सकारात्मक उपचार उपलब्ध नही है, पर कुछ दवाओं व बचाव के द्वारा इस रोग को काफी हद तक काबू में किया जा सकता है |अविवाहित महिला के मुकाबले विवाहित महिला इस रोग से अधिक ग्रस्त होती है  तो आइये जानते है इस रोग के लक्षणों के बारे में

पी.एम.एस  के लक्षण :

प्रीमेंसट्रूअल सिंड्रोम के कारण :

पी.एम.एस बीमारी के लिये निम्न कारण मौजूद है जैसे कि :

हार्मोन असंतुलन के कारण – जब महिला का मासिक धर्म नजदीक आता है, तब महिला के अंडाशय से अंडा निकलने के लिये एस्ट्रोजन और प्रोजेस्‍टेरॉन हार्मोन्स व
सर्ओटनिन हार्मोन्स निरंतर बदलाव आने लगता है | यदि महिला के शरीर में ये सभी हार्मोन्स सही रूप से कार्य न करे तो महिला इस रोग से ग्रस्त हो सकती है

मसालेदार खाद्य पदार्थों का सेवन –  मसालेदार खाद्य पदार्थों के अधिक सेवन से महिला के एस्ट्रोजन, प्रोजेस्‍टेरॉन व सर्ओटनिन हार्मोन्स बहुत तेजी से परिवर्तित होते है जो इस रोग की एक वजह बन सकते है |

कैल्शियम और मैग्नीशियम की कमी – यदि महिला कैल्शियम और मैग्नीशियम युक्त आहार का सेवन न करने से भी महिला इस रोग से प्रभावित हो सकती है

अधिक तनाव लेने से – तनाव के कारण महिला को पीएमएस जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है

इस रोग से बचाव :

  • शराब व धुम्रपान का सेवन न करे
  • तनाव मुक्त रहे
  • हरी सब्जियां व फल का सेवन करे
  • नियमित वयायाम करे
  • साफ़ सफाई पर भी विशेष ध्यान दे

 

मानवेन्द्र सिंह

मानवेंद्र सिंह सॉफ्ट प्रमोशन टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड में फिटनेस और हेल्थ ब्लॉगर हैं। उन्होंने 2006 में BHM स्नातक की डिग्री ली है। उन्हें स्वास्थ्य एवं विज्ञान अनुसंधान के क्षेत्र में लेखन का आनंद मिलता है।

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