गर्भावस्था के दौरान पेट व पीठ में दर्द

गर्भावस्था का समय बहुत ही दर्दनाक होता है। इसमें जितना हो सके उतनी सावधानी बरतनी चाहिए अगर सावधानी नहीं बरती जाए तो गर्भ में पल रहे बच्चे को हानि पहुंच सकती है। गर्भावस्था के दौरान पीठ में दर्द होना या फिर पेट में दर्द होना एक आम बात है और ज्यादातर सभी महिलाएं इस दर्द का अनुभव करती हैं। गर्भावस्था में दर्द होने का कोई निश्चित समय नहीं होता है, किसी भी समय महिलाओं को दर्द से परेशान होना पड़ सकता है। ये दर्द ज्यादातर तब होता है जब बच्चा गर्भ में बढ़ने लगता है। शुरुआती दिनों में दर्द ज्यादा नहीं होता है।

आज आप सभी को हम गर्भावस्था के समय में होने वाले इसी दर्द के बारे में पूरी जानकारी देंगे।

पेट दर्द व पीठ में दर्द

गर्भावस्था में पीठ व कमर दर्द का होना एक आम बात है। लगभग सभी महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान किसी-न-किसी समय कमर और पीठ दर्द की शिकायत होती है। अच्छी बात यह है कि इस तकलीफ को दूर करने और इसे एक दीर्घकालिक तकलीफ में बदलने से रोकने के लिए बहुत कुछ किया जा सकता है।

ज्यादातर महिलाएं गर्भावस्था के दौरान होने वाले दर्द से परेशान हो जातीं हैं और अपने आने वाले शिशु को लेकर चिंतित हो जाती हैं पर इसमें चिंता करने वाली कोई बात नहीं होती है। जब गर्भ में पलने वाला शिशु बड़ा होगा तो हलचल तो होगी ही और दर्द का होना भी जायज है, पर अगर दर्द भयानक हो और असहनीय हो तो एक बार डॉक्टर से ज़रूर बात करनी चाहिए।

इतना ही नहीं गर्भावस्था में पेट और पीठ में होने वाले दर्द का इलाज सही समय पर और सही डॉक्टर की जानकारी में करवाना चाहिए।

गर्भावस्था के दौरान पेट व पीठ दर्द होने के कारण

गर्भावस्था में जिन कारणों से महिलाओं को पीठ व पेट में दर्द होता है वो निम्न हैं-

  • ज्यादा मेहनत वाली महिला या फिर अधिक काम करने से।
  • पहले से ही पीठ के निचले हिस्से या श्रोणि में दर्द होने से या फिर श्रोणि में चोट के कारण भी गर्भावस्था में पीठ दर्द हो सकता है।
  • अगर, महिला का वजन सामान्य से अधिक है या फिर महिला पहले भी गर्भवती हो चुकी होती है, तो उन महिलाओं को पीठ दर्द होने की जो संभावना होती है वो अधिक होती है।
  • गर्भावस्था के दौरान महिला का शरीर रिलैक्सिन नाम का एक हार्मोन बनाता है जो श्रोडी वाले क्षेत्र में दो हड्डियों को जोड़ने वाले ऊतक को आराम पहुंचाने का काम करता है इसके साथ ही जोड़ों को बच्चे के जन्म के लिए थोड़ा ढीला करते हैं। कभी कभी इसी हार्मोन की वज़ह से दर्द और अस्थिरता रहती है।
  • जैसा कि हम सभी जानते हैं कि तनाव इंसान को कमज़ोर बना देता है। भावनात्मक  तनाव की वजह से मासपेशियों में तनाव आ जाता है जिसकी वजह से पीठ में दर्द और ऐंठन होने लगती है।
  • जैसे जैसे गर्भाशय बढ़ता है, मांसपेशियों की दो समानांतर शीट्स, जो पसलियों से प्यूबिक हड्डी तक होती हैं, बीच से अलग हो सकती हैं। इस विभाजन की वजह से पीठ दर्द बढ़ जाता है।

बचाव के उपाय

गर्भावस्था के समय में पेट और पीठ में होने वाले दर्द से बचना कोई बहुत मुश्किल नहीं होता है। अगर महिलाएं थोड़ी सी सावधानी बरतें तो इस दर्द से बच सकती हैं। तो चलिए हम बताते हैं गर्भावस्था के दौरान होने वाले दर्द से बचने के कुछ आसान उपाय-

  • सहारा देने वाली पट्टी पेट की मांसपेशियों और पीठ पर पड़ने वाले गर्भ में पल रहे शिशु के कुछ वजन को अपने ऊपर ले लेती हैं। जिसकी वजह से महिलाओं को थोड़ा आराम मिलता है। महिला अपने लिए सही नाप की पट्टी के बारे में डॉक्टर से सलाह ले सकती हैं।
  • गर्भावस्था के दौरान भारी वस्तुओं को उठाने से बचने की कोशिश करनी चाहिए। अगर फिर भी किसी भारी वस्तु को उठाने की नौबत आ जाती है तो सही तरीके से ही सामान को उठाएं।
  • उचित सहारा देने वाले कम ऊंचे और आरामदायक जूते या सैंडल महिलाओं की पीठ के लिए हितकर साबित हो सकते हैं। ऊंची ऐड़ी के सैंडल या जूते महिलाओं की कमर के निचले हिस्से पर बहुत ज्यादा दबाव डालते हैं। इसकी वजह से वजन बढ़ने पर महिलाओं की पीठ में दर्द शुरु हो सकता है। महिलाओं के शरीर में होने वाले परिवर्तन के कारण उनका गुरुत्वाकर्षण केंद्र भी बदलता है। इसलिए महिलाओं को ऊंची ऐड़ी के जूतों में सही तरह से संतुलन बनाने में मुश्किल हो सकती है।
  • गर्भावस्था में लंबे समय तक एक ही पोजीशन में नहीं रहना चाहिए। ज्यादा लम्बे समय के लिए खड़े या बैठे न रहें जिससे पैरों पर बल पड़े। ऐसी कुर्सी पर बैठें जिससे आराम मिल सके।
  • एक गर्म स्नान, एक गर्म पैक या फिर शावर से गर्म पानी का तेज प्रवाह, ये सभी पीठ दर्द कम करने में मदद कर सकते हैं।
  • महिलाएं एक तरफ ही करवट लेकर सोएं और घुटने को क्रॉस करने से बचें। अगर ऐसा करने में मुश्किल हो तो घुटनों के बीच में तकिया रख लें।
  • अगर महिलाओं की पूँछ-अस्थि (टेलबोन) पर दर्द है, तो उन्हें  सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि वो बैठते समय पसरने से बचें। अपनी पीठ को आगे की ओर उतना झुकाकर बैठें, जितना कि आरामदायक हो। उन्हें एक कोमल गद्दी या गद्देदार घेर पर बैठने की कोशिश करनी चाहिए।
  • मालिश करने से थकी और पीड़ाग्रस्त मांसपेशियों को आराम मिलता है। एक कुर्सी की पीठ के ऊपर से आगे की ओर झुकें या फिर करवट लेकर लेटें। महिलाएं अपने पति या माँ से पीठ के निचले हिस्से और रीढ़ की हड्डी के साथ-साथ चलने वाली मांसपेशियों पर कोमलतापूर्वक मालिश करने के लिए कहें। एक प्रशिक्षित मालिश थैरेपिस्ट या फिजियोथेरेपिस्ट इसके आगे महिलाओं की मदद कर सकते हैं।
  • डॉक्टर की सलाह के बिना गर्भावस्था में किसी भी दवा को लेने से बचें। इससे बाद में किसी भी मुश्किल का सामना नहीं करना पड़ेगा।
  • ऐसी कुर्सियों का इस्तेमाल करें जिसमें सपोर्ट हो और आरामदायक हों। पीठ के नीचे तकिया रखकर बैठें जिससे पीठ को आराम मिल सके।
  • गर्भावस्था के दौरान टाइट कपड़ो को नहीं पहनना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से जो रक्त का प्रवाह होता है वो सही से नहीं हो पाता है और मांसपेशियां में ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं हो पाती है।

उपरोक्त उपायों की मदद से गर्भावस्था के समय में पेट और पीठ में होने वाले दर्द से बचने में थोड़ी मदद मिलती है। अगर इन उपायों के बाद भी दर्द होता है तो डॉक्टर से ज़रूर मिल लें।

मानवेन्द्र सिंह

मानवेन्द्र सिंह

मानवेंद्र सिंह सॉफ्ट प्रमोशन टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड में फिटनेस और हेल्थ ब्लॉगर हैं। उन्होंने 2006 में BHM स्नातक की डिग्री ली है। उन्हें स्वास्थ्य एवं विज्ञान अनुसंधान के क्षेत्र में लेखन का आनंद मिलता है।

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