मुंहासे का इलाज

मुहांसे या पिंपल्स की समस्या केवल तैलीय त्वचा वाले लोगो में अधिक देखी जाती है | मुहांसे मूल रूप से तेल ग्रंथियों से संबंधित एक समस्या होती है | ये तेल ग्रंथियां त्वचा के नीचे मौजूद होता हैं | हार्मोनल परिवर्तनों के कारण तेल के ग्रंथि की गतिविधि एक व्यक्ति के जीवन के किशोर वर्षों में बढ़ जाती है | जिसके कारण पिंपल्स की समस्या होने लगती हैं | इसीलिए आज आपको मुहांसे या पिंपल्स के बारे में जानकारी देने जा रहे है | तो आइये जानते है मुहांसे या पिंपल्स के बारे में व इसके उपचार व इलाज के बारे में

जाने पिंपल्स के प्रकार के बारे में

वहाइटहेड्स – वहाइटहेड्स को एक बंद कॉमेडो के रूप में भी जाना जाता है, ये त्वचा के नीचे स्तिथ होते है | यह एक छोटे, मांस रंग वाले दाने के रूप में दिखाई देते हैं |

ब्लैकहेड्स – ब्लैकहेड्स एक खुले कॉमेडो के रूप में होते है | ये साफ़ रूप से त्वचा की सतह पर दिखाई देते हैं | मेलेनिन के ऑक्सीकरण के कारण, यह काले व गहरे भूरे रंग के होते हैं |

पेपुल्स – पेपुल्स एक छोटे, गोल दाने होते हैं | जो त्वचा पर से उगते हैं | यह अक्सर गुलाबी रंग के देखे जाते है |

नोड्यूल – नोड्यूल का आकार पिपुल्स जैसा ही होता हैं | लेकिन ये पिपुल्स से बड़े होते हैं | ये त्वचा की गहराई में भी हो सकते हैं |

पुटी – पुटी हमारी त्वचा की सतह पर साफ़ रूप से दिखाई देतें हैं | यह मवाद व गंदगी से भरे और आमतौर पर दर्दनाक होते हैं |

जाने पिंपल्स के कारण के बारे में

पाचन तंत्र में परेशानी से भी पिंपल्स की समस्या होने लगती है

जब पाचन प्रक्रिया उतनी अच्छी नहीं होती है जितनी की होनी चाहिए, तब अन्य स्वास्थ्य संबंधित की समस्याएं होने लगती हैं | शरीर में जमे विषाक्त पदार्थ मुंहासे के निर्माण में योगदान कर सकते हैं | परेशान पाचन तंत्र आमतौर पर वात असंतुलन की वजह से होता है | यह सूखा, मसालेदार और तेलयुक्त खाद्य पदार्थों के सेवन के कारण हो सकता है | कच्चे और अधपके भोजन तथा ठंडे पेय और आइसक्रीम जैसे ठंडे वयंजनों से भी पिंपल्स होते हैं | बेहतर पाचन के लिए स्वस्थ और गर्म भोजन खाएं

अधिक समय तक जागने से भी पिंपल्स की समस्या होती है

किसी भी वजह से पर्याप्त नींद ना मिलना, आपकी प्राकृतिक पाचन तंत्र दर में दखल कर सकता है | अनुचित नींद का कारण तनाव होता है जिसका शरीर में पाचन तंत्र प्रक्रियाओं पर सीधा प्रभाव पड़ता है | यदि ये प्रक्रियाएं अपनी क्षमता खो देती हैं तो शरीर में विषाक्त पदार्थ जमा हो जाते हैं जो अंत में मुंहासे का निर्माण करते हैं |

क्रीम, लोशन व दवा का अधिक प्रयोग

अपने चेहरे और गर्दन पर विभिन्न प्रकार के क्रीम और लोशन का प्रयोग करना भी कभी-कभी पिंपल्स का कारण होता है | दवा का अधिक प्रयोग भी हमारी त्वचा पर पिंपल्स निकल देते है |

कैसे करे पिंपल्स से बचाव

मुंहासे लोगों में त्वचा सम्बंधित एक प्रचलित समस्या हैं | यह कहीं भी हो सकते हैं लेकिन आमतौर पर चेहरे और गर्दन पर देखे जाते हैं | इन्हें रोकने के लिए बहुत जरूरी है कि आप अपनी त्वचा को साफ़ रखें | केवल बाहरी ही नहीं, कभी-कभी आंतरिक कारणों कि वजह से भी मुंहासे होते हैं | इसलिए अपने आहार और जीवन शैली में परिवर्तन करने से आप मुहांसों से निजात पा सकते हैं |

पिंपल्स का आसन इलाज दवाइयों के द्वारा

रेटिनॉयड – ये क्रीम, जैल और लोशन के रूप में आते हैं | रेटिनॉयड दवाओं में विटामिन ए होता है | यह आपकी त्वचा के रोम छिद्रों को बंद होने से बचाता है|

एंटीबायोटिक्स – इलाज के पहले कुछ महीनों के लिए, आप एक रेटिनॉयड और एंटीबायोटिक दोनों का उपयोग कर सकते हैं | सुबह में एंटीबायोटिक लगता है और शाम को रेटिनॉयड लगता है | जैसे – बैन्जोइल पेरोक्साइड, व क्लंडामिसिन आदि

डैपसोन जेल – रेटिनॉयड के साथ जेल लगाने से इसका प्रभाव बहुत जल्दी बढ़ जाता है|

एंटीबायोटिक्स – मध्यम से गंभीर मुहासों के लिए, आपको बैक्टीरिया को कम करने और सूजन से लड़ने के लिए मौखिक एंटीबायोटिक दवाओं की आवश्यकता हो सकती है | उदाहरण – मिनोससायन और डॉक्सिस्कीलाइन

संयुक्त मौखिक गर्भ निरोधक दवा – संयुक्त मौखिक गर्भनिरोधक महिलाओं और किशोर लड़कियों में मुहासों के इलाज में उपयोगी होते हैं |

एन्टी-एण्ड्रोजन एजेंट – अगर मौखिक एंटीबायोटिक दवाएं मदद नहीं कर रही हैं | तो स्पिनोनोलैक्टोन (एल्डिटेनोन) दवा को महिलाओं और किशोर लड़कियों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है |

इसोतरेटिनोईन दवा – यह दवा सबसे गंभीर मुंहासे वाले लोगों के लिए आरक्षित है | इसोतरेटिनोईन उन लोगों के लिए एक शक्तिशाली दवा है | जिनका अन्य इलाजों से मुंहासे ठीक नहीं हो रहे हैं | ओरल इसोतरेटिनोईन बहुत प्रभावी है|

मानवेन्द्र सिंह

मानवेन्द्र सिंह

मानवेंद्र सिंह सॉफ्ट प्रमोशन टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड में फिटनेस और हेल्थ ब्लॉगर हैं। उन्होंने 2006 में BHM स्नातक की डिग्री ली है। उन्हें स्वास्थ्य एवं विज्ञान अनुसंधान के क्षेत्र में लेखन का आनंद मिलता है।

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