पेरिफेरल वैस्क्युलर रोग – Peripheral Vascular Disease In Hindi

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पेरिफेरल वैस्क्युलर रोग
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पेरिफेरल वैस्क्युलर रोग :आज हम हृदय से सम्बंधित एक ऐसे रोग के बारे में बात करने जा रहे हैं जो एक रक्त परिसंचरण विकार है और उसका नाम है पेरिफेरल वैस्क्युलर रोग। सही समय पर इसका इलाज अगर करवा लिया जाए तो एक बड़ी समस्या को होने से रोका जा सकता है।

हृदय व्यक्तियोंके शरीर का एक नाज़ुक अंग। इसकी देखरेख करना बहुत ही आवश्यक होता है। रोजाना हम सभी एक न एक व्यक्ति ऐसा देख लेते हैं जिसकी दिल के दौरे की वजह से मौत हो जाती है। कभी-कभी हम लोग सतर्क नहीं रहते हैं और खामियाजा भुगतना पड़ जाता है। इसीलिए हम सब का सतर्क होना बहुत आवश्यक है जिससे हम बीमारी से लड़ सके और खुद को बचा सकें।

पेरिफेरल वैस्क्युलर रोग क्या है?

यह रक्त परिसंचरण रोग होता है। ये व्यक्तियोंकी नसों या फिर धमनियों में होता है। इसकी वजह से पीड़ित व्यक्तियोंके हृदय के बाहर की रक्त कोशिकाओं में, मस्तिष्क के संकीर्ण में, अवरोध में एक ऐंठन होती है। इस रोग की वजह से रक्त वाहिकाएं संकुचित हो जाती है और रक्त का जो प्रवाह है वो कम हो जाता है।पेरिफेरल वैस्क्युलर रोग का अगर सही से इलाज नहीं करवाया जाए तो ये व्यक्तियोंके बाकी के अंगों को भी प्रभावित कर देता है और शरीर को काफी हानि पहुंचा देता है।

इस रोग में खून और ऑक्सीजन की आपूर्ति करने वाली नसों को प्रभावित कर देता है जिसकी वजह से पेट, हाथ और गुर्दों में दर्द हो जाता है। पेरिफेरल वैस्क्युलर रोग जो है वो व्यक्तियोंके आम दर्द का कारण बन जाता है और व्यक्तियोंको हल्के-हल्के काम को करने में भी दर्द की अनुभूति होती है जैसे,वयायाम करने के दौरान पैरों में तीवर दर्द का होना, पर ऐसा भी नहीं है कि ये दर्द सदा के लिए होने लगता है अगर व्यक्ति आराम कर ले तो ये दर्द ठीक हो जाता है।

पेरिफेरल वैस्क्युलर रोग के कारण

पेरिफेरल वैस्क्युलर रोग के जो सामान्य कारण हैं वो निम्न हैं-

  • विकिरण अनावरण ।
  • अंग की कोई चोट ।
  • स्नायु बंधनया मांसपेशियों के असामान्य शरीर रचना ।
  • रक्त वाहिका सूजन ।

इसके अलावा जो जोखिम भरे कारक हैं वो निम्न हैं-

  • धूम्रपान।
  • मधुमेह ।
  • आनुवांशिकता ।
  • बढ़ती उम्र ।
  • हाई बीपी ।
  • होमोकीस्टीन के उच्च स्तर ।
  • अधिक वजन या मोटापा ।

 इसके लक्षण

इस बीमारी के जो लक्षण हैं वो निम्न हैं-

  • स्तम्भन दोष।
  • पैर का सुन्न पड़ जाना या फिर पैर में कमज़ोरी होना ।
  • पैर पर या फिर पैरों की उंगलियों में ऐसा घाव हो जाए जो कभी ठीक न हो ।
  • कुछ कार्य करने के बाद जांघ, कुल्हे की मांसपेशियों में दर्द को महसूस करना।इसके साथ ही ऐंठन महसूस करना ।
  • पैर के निचले हिस्से में शीतलता महसूस करना ।
  • पैर या पैर में कोई नाड़ी या कमजोर नब्ज का होना ।
  • पैरों की त्वचा का चमकदार हो जाना ।
  • पैरों के रंग में बदलाव को महसूस करना ।
  • पैर और पैरों के बाल झड़ना या फिर छोटे-छोटे बालों का जमना ।

इस रोग से बचाव

अगर व्यक्ति थोड़ा जागरुक रहे तो इस बीमारी से बचाव कर सकता है। इसके बचाव में निम्न चीज़े शामिल है-

  • एक स्वस्थ वजन को बनाए रखना अतिआवश्यक है ।
  • धूम्रपान करने से दूर रहें ।
  • रक्त शर्करा नियंत्रण में रखें ।
  • वयायाम को अपनी जीवन शैली में शामिल करें ।
  • बीपी को नियंत्रित रखें ।
  • कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखें ।
  • खानपान पर ध्यान दें ।

इस रोग का इलाज

पेरिफेरल वैस्क्युलर रोग के इलाज के लिए नीचे दी गई प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया जाता है ।

  • थ्रोम्बोलीटिक थेरेपी- इसका इस्तेमाल थक्कों को तोड़ने के लिए किया जाता है ।
  • एंजियोप्लास्टी- ये परिधीय धमनी रोग के इलाज करने के लिए उपयोग किया जाता है ।
  • बायपाससर्जरी- इससे अवरुद्ध धमनी के चारों ओर रक्त के प्रवाह को जारी किया जाता है ।

पेरिफेरल वैस्क्युलर रोग में आने वाली जटिलताएं

पेरिफेरल वैस्क्युलर रोग का अगर सही समय पर इलाज न किया जाए तो ये और समस्याएं पैदा कर सकता है। इससे होने वाली जटिलताएं निम्नलिखित हैं-

  • घाव या अल्सर का होना ।
  • दिल का दौरा पड़ना ।
  • पैर में दर्द का होना ।
  • सांस लेने में दिक्कत होना ।
  • एंजाइना यानी कि छाती में दर्द का होना ।
  • पैरों का सूजना, लालिमा आना ।
  • पैरकासुन्नहोना, पीलापड़नाआदि ।

पेरिफेरल वैस्क्युलर रोग का इलाज करना बहुत ही आवश्यक होता है इसीलिए जब इसके लक्षण नजर आएं तुरन्त किसी अच्छे डॉक्टर के पास जाना चाहिए ताकि इससे होने वाली जटिलताओं को तभी रोका जा सके।

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