पी सी ओ एस यानी पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम होने पर महिला के शरीर में सेक्स हॉर्मोन्स एस्ट्रोजेन व प्रोजेस्टेरोन का संतुलन बिगड़ जाता है | जिसके कारण आपके अंडाशय में सिस्ट बनाने लगती है | पीसीओएस की समस्या  महिलाओं के पीरियड, प्रजनन क्षमता, हृदय के कार्य व आकार को प्रभावित करता है | पीसीओएस को पॉलीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम के नाम से जाना जाता है | यह समस्या मुख्य रूप से 15 से 20 वर्ष की महिलायों में पायी जाती है |

अगर भारत कि ही बात करे तो लगभग 20% महिला इस बीमारी की गिरफ्त में है | लेकिन फिर भी इस बीमारी के प्रति महिला अधिक जागरूक नही है | यदि इस बीमार का सही समय पर इलाज न कराया जाये तो महिलाओं को इस बीमारी के द्वारा कई घातक परिणाम देखने को मिल सकते है | इसलिये आज आपको हम पीसीओएस यानि पॉलीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम के बारे में पूर्ण जानकारी देने जा रहे है | तो आइये जानते है पॉलीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम के बारे में विस्तार से –

पीसीओएस के प्रकार :

पीसीओएस मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है जो निम्न प्रकार है –

इन्सुलिन प्रतिरोधक –

इन्सुलिन प्रतिरोधक पीसीओएस का सबसे पहला व आम चरण होता है | इस पीसीओएस में आपका शरीर इन्सुलिन के प्रति कम प्रभावशाली होने लगता है | जिसकी वजह से आपकी रक्त शर्करा असंतुलित होने लगती है और लेप्टिन ओवयूलेशन को प्रतिबाधित करने लगती है | यह अधिकतर मोटापे, शर्करा का सेवन, धूम्रपान व वसा का अधिक सेवन करने वाली महिलाओं को होता है |

प्रतिरक्षा संबंधित –

प्रतिरक्षा संबंधित पीसीओएस एक अलग प्रकार का पीसीओएस होता है | यदि किसी कारणवश आपके अंडाशय में चोट लग गयी हो और सूजन की समस्या आ रही है | तो वह सूजन ओवयूलेशन में अंडाशय व हॉर्मोन को प्रतिबाधित करती है, जिसकी वजह से यह समस्या जन्म लेती है |

पोस्ट-पिल –

यह समस्या अधिकतर उन महिलायों को आती है जो गर्भनिरोधक का अधिक इस्तेमाल करती है |गर्भनिरोधक का अधिक प्रयोग करने से महिला के अंडाशय व हॉर्मोन पर बहुत बुरा असर पड़ता है | जिसकी वजह से अंडाशय में स्तिथ अंडे फूट नही पाते है और महिला को दर्द व पीरियड्स में अनियमतता जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है | गर्भनिरोधक गोली आपके शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन को संतुलित करने में मुश्किलें खड़ी करती है |

इस रोग के समय दिखने वाले लक्षण :

  • एकाएक वज़न बढ़ना या वज़न घटने लगना |
  • चेहरे और शरीर पर अत्यधिक बाल निकलना |
  • सिर के बाल झड़ने लगना |
  • पीरियड्स जल्दी या देर से आना |
  • प्रजनन क्षमता में कमी आने लगना |
  • अवसाद जैसी समस्या का होना |
  • पेट दर्द होना |

इस रोग के होने के कारण –

पीसीओएस जैसी बीमारी के बारे में अभी तक सही कारणों का पता नहीं लगाया जा सका है, क्योंकि इस बीमार को कई डॉक्टरों ने अलग अलग बताया है | कई डॉक्टर्स इसको अधिक मोटापे, अत्यधिक धुम्रपान व अधिक वसा युक्त भोजन का सेवन करने से उत्पन्न समस्या मानते हैं | इस बीमारी के अनुवांशिक व संक्रामक होने की पुष्टि भी की गयी है |

यह बीमारी एण्ड्रोजन सेक्स हॉर्मोन के कारण होती है, जो महिला व पुरुष दोनों के शरीर में जन्म लेता है | इस बीमारी से ग्रस्त महिला में सामान्य से अधिक एण्ड्रोजन उत्पन्न होने लगता है | जो गर्भाशय में मौजूदअंडे के विकास और प्रवाह को प्रतिबाधित करने लगता है | इस बीमारी का मुख्य कारण एण्ड्रोजन की अधिकता माना जाता है |

इस बीमारी में की जाने वाली जांच :

पीसीओएस जैसी बीमारी के लक्षण दीखते ही आपको डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिये | आप इस बीमारी के बारे में जानने के लिए डॉक्टर द्वारा बतायी जाने वाली कई प्रकार की जाँच का सहारा ले सकते है | तो आइये जानते है पीसीओएस की समस्या में की जाने वाली जाँच निम्न प्रकार हैं –

  • शारीरिक जांच करवाये |
  • हॉर्मोन्स की जांच करवा सकती है |
  • अल्ट्रासाउंड जाँच
  • ब्लड टेस्ट करवाये |

इस रोग से होने वाली परेशानी :

  • प्रजनन क्षमता में कमी आ जाती है |
  • उच्च रक्तचाप की समस्या होने लगती है |
  • अधिक चिंता व अवसाद जैसी परेशानी जन्म लेती है |
  • एंडोमेट्रियल कैंसर हो सकता है |
  • मधुमेह की बीमारी हो सकती है |
  • स्तन कैंसर की समस्या उत्पन्न हो सकती है |

इस बीमारी में क्या खाएं :

पीसीओएस की परेशानी में आपको फाइबर युक्त भोजन का सेवन करना चाहिये | फाइबर युक्त भोजन रक्त में शर्करा के प्रभाव को कम करके इंसुलिन प्रतिरोध को कम करने में मदद करता है | आपको फाइबर युक्त आहार के लिए निम्न खाद्य पदार्थो का सेवन करना चाहिए –

  • पत्तेदार सब्जियां |
  • लाल मिर्च और हरी मिर्च का सेवन |
  • शकरकंदी का सेवन |
  • बीन्स और मसूर का सेवन |
  • कद्दू का सेवन |

मानवेन्द्र सिंह

मानवेंद्र सिंह सॉफ्ट प्रमोशन टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड में फिटनेस और हेल्थ ब्लॉगर हैं। उन्होंने 2006 में BHM स्नातक की डिग्री ली है। उन्हें स्वास्थ्य एवं विज्ञान अनुसंधान के क्षेत्र में लेखन का आनंद मिलता है।

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