नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज एक ऐसी बीमारी है जिसमें कम या बिल्कुल भी अल्कोहल का उपयोग न करने वाले आदमी या औरत के लिवर में वसा (फैट) जमा हो जाता है। यह आगे जा कर लिवर के अंतिम चरण की बीमारी का रूप ले सकता है। 

Non Alcoholic Fatty Liver in hindi

नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज आगे जा कर नॉन अल्कोहलिक स्टेटो हेपेटाइटिस का रूप ले सकता है। इसके बाद यह एडवांस स्तर के लिवर सिरोसिस का भी रूप ले सकता है। नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज का सबसे बड़ा लक्षण लिवर में अत्यधिक वसा (फैट) का जमा हो जाना, लिवर में सूजन और लिवर का खराब हो जाना है। नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज आगे जा कर सिरोसिस का रूप ले सकता है। इस स्तिथि में लिवर काम करना बंद कर देता है और यह पूरी तरह से खराब हो जाता है। इस तरह का मरीज अपना जिगर को डोनेट या दान नहीं कर सकता है इस बीमारी में मरीज का खून भी प्रभावित होता है जैसे खून में मोजूद हीमोग्लोबिन,RBC,WBC आदि

नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज निम्नलिखित बीमारी वाले व्यक्ति में अधिक देखा जाता है।

• मोटे व्यक्ति में

• डायबिटीज के मरीज में

• डिसलिपिडीमिया के मरीज में

नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज सामान्य रूप से ऐसे व्यक्ति में भी देखने को मिलता है, जिसमें प्राकृतिक रूप से शरीर में हॉरमोन और इंसुलिन हॉरमोन जोकि खून में शुगर की मात्रा को पर्याप्त मात्रा में कम नही कर पाता है।

नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज होने के कुछ अन्य कारण

• लंबे समय तक नसों के माध्यम से न्यूट्रिशन लेना

• इंसुलिन का प्रभाव काफी कम हो जाना

• मोटे व्यक्ति में अचानक और तेज़ी से वजन कम होने लगना

• लिपिड डिसऑर्डर

• कुछ विशेष दवाइयां

नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज के लक्षण क्या हैं ?

सामान्यतः इसके शुरुआती लक्षण के रूप में कुछ भी देखने को नही मिलता है। शुरुआत में जांच में लिवर के असामान्य रूप से काम करने का पता चल जाता है। इसके कुछ सामान्य लक्षणों में मरीज को अत्यधिक थकावट महसूस होना, कमजोरी, बिचैनी, पैर का फूल जाना तथा पेट के ऊपरी भाग में हल्का दर्द होना शामिल है। 

इस बीमारी के अगले स्टेज में जाने के बाद निम्नलिखित लक्षण दिखते हैं। 

• आंतों से खून आना

• जॉन्डिस

• पेट में पानी का जमा हो जाना

• अत्यधिक कमज़ोरी

• पैर का सूजन

जब एसोफेगस और पेट में मौजूद नसों से खून निकलने लगता है तथा दिमाग की एक बीमारी के कारण लिवर खून से खतरनाक पदार्थों को लग नही कर पाता है, तब यह बताता है कि अब नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज अब एडवांस स्टेज के लिवर सिरोसिस में पहुंच चुका है। 

नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज की जांच कैसे की जाती है ?

नॉन अल्कोहलिक फैटी लीवर डिजीज होने का  सबसे पहले सामान्य खून जांच या लिवर फंक्शन टेस्ट से पता चलता है। अधिक मोटे व्यक्ति में भी इसकी संभावना होती है। हालांकि नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज सामान्य और पतले दुबले व्यक्ति को भी हो सकता है। इस बीमारी की पुष्टि लिवर के अल्ट्रासाउंड के बाद ही किया जाता है। अल्ट्रासाउंड में लिवर में फैट जमा हुआ नजर आता है। नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज की स्थिति का पता लगाने के लिए, की यह बीमारी किस स्टेज में है, लिवर का बॉयोप्सी किया जाता है। बॉयोप्सी के लिए लिवर के कुछ ऊतकों को लिया जाता है। 

नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज का इलाज कैसे किया जाता है ?

अगर कोई मोटा व्यक्ति नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज का शिकार होता है तो सबसे पहले उसे वजन कम करने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा शारीरिक एक्टिविटी बढ़ाने, संतुलित आहार लेने, एल्कोहॉल तथा गैरजरूरी दवाईयों का उपयोग बंद करने को भी कहा जाता है। इसके अलावा अगर मरीज डायबिटीज या बढ़े कोलेस्ट्रॉल का शिकार है, तो इसे जल्दी कंट्रोल करने और इसे बरकरार रखने को कहा जाता है। 

इसके अलावा डॉक्टर नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज स्तिथि में निम्नलिखित इलाज करते हैं।

• संतुलित आहार और व्यायाम के द्वारा वजन का नियंत्रित करने की सलाह दी जाती है। 

• लिपिड को कम करने की दवाइयां दी जाती है।

• इंसुलिन के प्रभाव को बढ़ाने के लिए दवाई दी जाती है।

• दवाइयों के द्वारा लिवर के सूजन को कम करते हैं। 

• एंटीऑक्सीडेंट का उपयोग

वजन कम करते हुए यह ध्यान देना है कि वजन धीरे धीरे कम हो। इसके लिए संतुलित आहार लेना और पर्याय मात्रा में व्यायाम करना बेहद ज़रूरी है। एक बार वजन कम होने के बाद भी संतुलित आहार लेते रहना काफी ज़रूरी है। 

कुछ ध्यान देने योग्य बातें

• नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज इंसुसीन की कमी होने पर क्रोनिक लिवर डिजीज़ में बदल सकता है। इस लिए शुरुआत में ही इसकी जांच सुर इलाज करना काफी ज़रूरी है। 

• नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज हृदय और नसों से भी जुड़ा हुआ है। 

• अगर खून में लिवर एंजाइम बढ़ा हुआ या स्कैन के दौरान लिवर में वसा जमा हुआ दिखता है तो इसका अर्थ है कि नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज होने के यह संकेत हैं। 

  • इस बीमारी में शुगर और जयादा फाइबर वाले फल जैसे केला ,सेब , संतरा आदि और सब्जियों का सेवन न करे |
मानवेन्द्र सिंह

मानवेन्द्र सिंह

मानवेंद्र सिंह सॉफ्ट प्रमोशन टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड में फिटनेस और हेल्थ ब्लॉगर हैं। उन्होंने 2006 में BHM स्नातक की डिग्री ली है। उन्हें स्वास्थ्य एवं विज्ञान अनुसंधान के क्षेत्र में लेखन का आनंद मिलता है।

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