नस पर नस चढना का घरेलु उपायों की जानकारी – Muscle Spasms in Hindi

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Muscle Spasms

नस पर नस चढना :आजकल के इस आधुनिक युग में सब चीज़ आराम से बिस्तर पर लेटे-लेटे ही हो जाती है। सारा काम तो आजकल मशीनों द्वारा ही हो जाता है इसीलिए इंसान ‘खाओ पियो और मौज करो’ वाली इच्छा रखता है। पर ज्यादा आराम की वजह से ही व्यक्तियोंको बहुत सारी बीमारी घेर लेतीं हैं और इन्हीं में शामिल है नस पर नस का चढ़ना और ये बहुत दुखदायी होती है इससे बहुत दर्द होता है। इस सबके पीछे कारण होता है हम लोगों का ठीक से न उठना बैठना। जैसे कि- सोफे या बेड पर ज्यादा देर तक आधी लेती हुई स्तिथि में रहना, उल्टे लेट कर सोना, दो-दो तकिया लगाकर सोना, बेड पे लेटकर ज्यादा देर तक मोबाइल अथवा लैपटॉप का प्रयोग करना, ज्यादा देर तक एक ही पोजीशन में खड़े या बैठे रहना आदि।

नस पर नस चढना क्या है?

नस पर नस चढ़ना एक बीमारी है पर कब कहाँ की नस चढ़ जाए इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है। दोस्तों, व्यक्ति के शरीर में लगभग 650 मासपेशियां हैं और 200 ऐसी मासपेशियां होतीं हैं जो नस चढ़ने से प्रभावित होतीं हैं।अगर इनमें से किसी में भी खिंचाव आता है तो वो व्यक्ति को बहुत अधिक दर्द का अनुभव होता है और इसी को हम लोग सामान्य भाषा में नस चढ़ना कहते हैं। मांसपेशियों में खिंचाव की वजह से कमरदर्द, कंधे में दर्द, छाती में दर्द, घुटने से नीचे दर्द, गले और कंधे में दर्द, कोहनी में दर्द, बाजू में दर्द, उंगली और अंगूठे में दर्द, टांग के अगले हिस्से में दर्द, एड़ी में दर्द, पंजे में दर्द, आधे सिर में दर्द, पैर के अंगूठे में दर्द, हिप में दर्द, जबड़े और कान के आसपास दर्द आदि दर्द होते हैं।

 दोस्तों, हम आपको एक बहुत ही ज़रूरी बात बता दें कि हमारे शरीर मे जहां कहीं भी रक्त जा रहा है ठीक उसके बराबर ही बिजली भी जा रही है। और इस बिजली को हम लोग बायो इलेक्ट्रिसिटी कहते हैं। मनुष्य के शरीर में जो रक्त होता है वो धमनियों और शिराओं में चलता है और वहीं जो करंट होता है वो तंत्रिकाओं में चलता है। व्यक्ति के जिस किसी हिस्से में रक्त नहीं पहुंच पाता है वो हिस्सा सुन्न पड़ जाता है या फिर कह सकते हैं कि वहां मासपेशियों पर नियंत्रण नहीं रहता है और उस हिस्से पर अगर हाथ लगाया जाए तो बहुत ठंडा महसूस होता है। इसके अलावा अगर व्यक्ति के किसी हिस्से में करंट नहीं पहुंच पाता है तो वो हिस्सा दर्द करने लगता है और हाथ लगाने पर गर्म महसूस होता है।

नस पर नस चढ़ने के मुख्य कारण

नस पर नस चढ़ने के बहुत सारे कारण हो सकते हैं। हम आपको उन्हीं कारणों के बारे में बताने जा रहे हैं जो निम्न हैं-

  • अनियंत्रित मधुमेह की वजह से भी रक्त संचार रुक जाता है।
  • शरीर में पोटासियम, कैल्शियम, मैग्नेशियम, सोडियम आदि की कमी होना।
  • डाययुरेटिक दवाओं का सेवन करने की वजह से पानी और खनिज लवण की मात्रा में कमी का होना।
  • सिगरेट, शराब का अत्यधिक सेवन करने से पोषक तत्वों की कमी हो जाती है और संक्रमण हो जाता है।
  • कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाओं का सेवन करने से।
  • पैरों की स्नायुओं का मधुमेह से ग्रस्त होना।
  • पैरों की धमनियों की अंदरुनी सतह पर कोलेस्ट्रॉल जमा होने से।
  • हृदय रोगों दवाओं का सेवन करने से।
  • एक ही पोजीशन में बैठे रहना, पैर को मोड़े रखना या खड़े रहना आदि।
  • बहुत कठोर वयायाम करना, खेलना या कठोर परिश्रम करना।

नस पर नस चढ़ने के लक्षण

नस पर नस चढ़ने के निम्नलिखित लक्षण हैं-

  • रात में सोते समय नस पर नस चढ़ जाना इसके अलावा कुछ मिनट के लिए अचानक तेज़ दर्द को महसूस करना।
  • शरीर का गिरा-गिरा से रहना।
  • मानसिक कामों को करने पर दिमाग पर एक बोझ महसूस करना।
  • पर्याप्त मात्रा में नींद न ले पाना और रात को बेचैनी रहना।
  • पसीना अधिक आना और कोई भी काम करते हुए तुरंत थक जाना।
  • शरीर के किसी भी हिस्से फड़फड़ाहट रहना।
  • काम करते वक़्त चिड़चिड़ापन या फिर निराशा का रहना।
  • आलसपन का रहना।
  • गर्मी या सर्दी को शरीर का बर्दाश्त न कर पाना।
  • शरीर मे सुइयां सी चुभना जैसा पमहसूस होना।
  • बिना किसी वजह ही धड़कन बढ़ी हुई रहना।
  • लेटते हुए शरीर में धक धक अथवा सायें सायें की आवाज होना।
  • ठीक से चल न पाना।
  • गले के आसपास ताकत की कमी को महसूस करना।
  • याददाश्त का कम होना।
  • हाथों और पैरों में कपकपी रहना।
  • मांसपेशियों में ऐंठन होना।
  • हाथों पैरों का सुन्न पड़ जाना।
  • हाथों की पकड़ ढीली पड़ना।
  • सीढ़ी चढ़ते समय घुटने से नीचे के हिस्से में खिंचाव महसूस करना।

नस पर नस चढना के बचाव के उपाय

  • सिर के नीचे तकिया रखने की जगह पैरों के नीचे तकिया रखकर सोएं।
  • आराम करें और पैरों को ऊंचाई पर रखें।
  • मधुमेह की शिकायत है तो परहेज अवश्य करें।
  • जहां की नस चढी हो वहां बर्क से सिकाई करें।
  • शराब, सिगरेट आदि का सेवन न करें।
  • जहां नस चढ़ी हो वहां मालिस कर के उस हिस्से को आराम दें।
  • फाइबर युक्त भोजन का ही सेवन करें। मैदे से बनी चीजों का इस्तेमाल बिलकुल नहीं करें।
  • आरामदायक और मुलायम जूते पहने।
  • वजन को बढ़ने न दें। टहलने जाएं जिससे टांगों की हड्डियां मजबूत हों।
  • एक ही पोजीशन में ज्यादा देर तक न बैठें अथवा खड़े हों।
  • भोजन में नीबू पानी, नारियल पानी और फलों का सेवन अधिक से अधिक करें।
  • सब्जियों में पालक, टमाटर और हरी सब्जियों का अधिक से अधिक सेवन करें।
  • सोफे या बेड पर सही से उठे बैठे। शरीर को ज्यादा ऐंठने से रक्त संचार ररुक जाता है और फिर दिक्कतें आती हैं।

 दोस्तों, सबसे मुख्य बात जो है वो ये है कि जितना हो सके अपना काम खुद ही करें। मशीन काम तो आसान कर देतीं हैं पर इंसान को मरीज़ बना देतीं हैं। वयायाम, दौड़ आदि को अपनी जीवनशैली में शामिल करें और एक ही पोजीशन में ज्यादा देर तक नहीं रहें। कुछ कुछ देर पर पोजीशन बदलते रहें।

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