इसबगोल के लाभकारी फायदे व प्रयोग करने का तरीका

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इसबगोल की उचित खुराक

इसबगोल मरुस्थलीय क्षेत्रो में पायी जाने वाली एक जड़ी बूटी है जो भारत के सिंध और मालवा, अरब की खाड़ी और पर्शिया में आसानी से मिल जाता है | आयुर्वेद में इसे अश्वगोल और अश्वकर्ण के नाम से जाना जाता है | इसबगोल के बीज घोड़े के कान की तरह होते है जिसके वजह से इसे अश्वगोल और अश्वकर्ण के नाम से जाना जाता है |

इसबगोल क्या है ?

इसबगोल एक झाडी जैसा पेड़ होता है जिसके पत्ते बिलकुल धान ( चावल ) के पत्तो जैसे होते है और इसमें डालियों पर गेंहू की बालियों जैसी ही वाले ं लगी होती है | इसबगोल की बाल को तोड़कर इसके बीजों को निकाल लिया जाता है | बीजों के ऊपर का पतला सफ़ेद आवरण को चिकित्सीय प्रयोग के लिए हटा लिया जाता है इसी को इसबगोल की भूसी के नाम से जाना जाता है |

इसबगोल की तासीर ठंडी होती है जिससे यह पेट में गर्मी को शांत करके मल को आसानी से बहार निकालने में मदद करता है | यह शरीर में बढ़ी हुई गर्मी से होने वाले रोगों जैसे कब्ज और आंत के रोगों के साथ साथ अतिसार, पेचिश और किडनी ब्लैडर को ठीक करने में भी फायदेमंद होता है

 चिकत्सीय फायदे

इसबगोल शरीर में बढ़ी हुई गर्मी को शांत करने में मदद करता है जिससे यह पेट और आंत से जुडी हुई बीमारियों को दूर करने में मदद करता है | आयुर्वेद के अनुसार इसबगोल शांत, शीतलदायक और ठंडी होती है जिससे यह बबासीर की बिमारी में फायदेमंद होता है | इसबगोल पेट में गर्मी खत्म करके मल को आंत से दूर करके आसानी से बहार निकालने में मदद करता है | जिससे पेट में होने वाली समस्याए मरोड़, दर्द, मलावरोध के साथ साथ अतिसार, पेचिस और आंतो में होने वाले घावों को भी ठीक करने में मदद करता है | आयुर्वेद के अनुसार इसबगोल को हाईग्रोस्कोपिक और इसके मुख्य कुन मूत्रल और विरेचक माने जाते है |

किन किन रोगों मे यह फायदा करता है:

कब्ज के उपचार में इसबगोल होता है फायदेमंद

इसबगोल में फाइबर अच्छी मात्रा मे पाया जाता है जिससे यह आंतो से पानी को अवशोषित करने का काम करता है और अधिक बल्क का उत्पादन करता है | जिससे यह आंतो के संकुचन होने वाले कार्यो में उत्तेजना बढाने का काम करती है और कब्ज की समस्या को दूर करती है और दस्त के मार्ग को आसन कर देता है | कब्ज की समस्या होने पर रोज रात में एक चमच्च इसबगोल को एक चमच्च मिश्री के साथ पानी में मिलाकर पीने से फायदा जल्दी मिलता है |

दस्त में बहुत लाभकारी होता है

इसबगोल पाचन तंत्र से पानी को अबशोषित कर लेता है और बल्क वाटर के उत्पादन की प्रक्रिया को तेज़ कर देता है जिससे मल कड़ा हो जाता है और दस्त की समस्या समाप्त हो जाती है | दस्त की समस्या होने पर एक चमच्च इसबगोल को एक चमच्च मिश्री के साथ दही के मठठे में मिलाकर सेवन करे जल्दी फायदा मिलेगा |

एसिडिटी होने पर लाभकारी –

अगर आप एसिडिटी की समस्या से परेशान है तो इसबगोल का प्रयोग बहुत ही लाभकारी होता है | इसबगोल भोजन की नली से होकर पेट में पहुचकर पेट की झिल्लीदार दीवारों के लिए एक लुब्रिकेंट की तरह काम करता है | जिससे यह पेट की गर्मी को शांत करके एसिडिटी की समस्या को समाप्त कर देती है |

मधुमेह होने पर लाभकारी –

इसबगोल में फाइबर की अच्छी मात्रा पाई जाती है और फाइबर युक्त होने के कारण यह मधुमेह की समस्या को खत्म करने में मदद करती है | इसमें जिलेटिन नाम का एक प्राक्रतिक पदार्थ भी पाया जाता है जो शरीर में ग्लूकोज़ के टूटने की प्रक्रिया को धीमा करने में मदद करता है जिससे मधुमेह का स्तर नियंत्रित रहता है |

स्वप्न दोष की समस्या को खत्म करता है –

स्वप्न दोष की समस्या के प्रमुख कारण कब्ज और भावुकता होती है | इसबगोल का सेवन करने से कब्ज की समस्या समाप्त हो जाती है और रात्री में भावुकता के कारण होने वाले उत्सर्जन को भी कम करने में मदद मिलती है | एक चमच्च मिश्री और इसबगोल को एक गिलास गुनगुने दूध में मिलकर पीने से जल्द ही स्वप्नदोष की समस्या में फायदा मिलता है |

सूखी खांसी की दवा –

सुखी खांसी की समस्या होने पर आयुर्वेदिक दवा इसबगोल की भूसी के चूर्ण का सेवन बहुत ही लाभकारी होता है | एक चमच्च इसबगोल के चूर्ण को एक गिलास गुनगुने पानी में मिलकर पीने से यह जल्द ही सूखी खांसी की समस्या को समाप्त किया जा सकता है |

त्वचा के रूखेपन को खत्म करे –

सर्दियों के मौसम में त्वचा पर रूखेपन की समस्या ज्यादा हो जाती है मगर इस समस्या को इसबगोल के हस्क पाउडर के प्रयोग से समाप्त किया जा सकता है | त्वचा पर इसबगोल के हस्क पाउडर की मसाज करने से त्वचा से रूखेपन की समस्या समाप्त हो जाती है और त्वचा में ग्लो और चमक बढ़ जाती है |

ल्यूकोरिया के स्त्राव को कम करता है –

इसबगोल में पाए जाने वाले एंटी-एजिंग गुण संक्रमण और दूसरे रोगाणुओं से होने वाली समस्याओ को खत्म करने में मदद करते है | इसबगोल की भूसी हल्की सूजन और निजी अंगो की दीवारों के मुलायम उतकों से भी सूजन खत्म करने में मदद करता है | जिससे यह सफ़ेद पानी यानी की ल्यूकोरिया के स्त्राव को कम करने में मदद करता है |

कुछ और लाभकारी फायदे :

  • वजन कम करने में
  • कोलेस्ट्रोल को कम करता है
  • रक्तचाप को नियंत्रित करने में
  • आंतो की समस्या दूर करने में
  • बवासीरकी समस्या को दूर करने में

खुराक और इस्तेमाल करने का सही तरीका

इसबगोल की खुराक और लेने की मात्रा इसे सेवन करने वाले की उम्र पर निर्भर करती है | बड़े लोग यानी की लगभग 20 से 40 वर्ष की उम्र के लोग इसकी 1 या 2 चमच्च को एक गिलास गुनगुना पानी, दूध और मठठा के साथ दिन में 2 से 3 बार प्रयोग कर सकते है | बच्चे इसकी आधा चमच्च को दिन में 2 से 3 बार एक गिलास गुनगुना पानी, दूध या मठठा के साथ सेवन कर सकते है | इसबगोल शरीर में बढ़ी हुई गर्मी से होने वाले रोगों जैसे  कब्ज और आंत के रोगों को ठीक करने में फायदेमंद होता है | इसबगोल की तासीर ठंडी होती है जिससे यह पेट में गर्मी को शांत करके मल को आसानी से बहार निकालने में मदद करता है |

सेवन करने का सही तरीका  – इसबगोल को गुनगुने पानी, दूध या दही के साथ सेवन किया जा सकता है | रात में सोने से पहले भी इसबगोल का सेवन पानी के साथ किया जा सकता है | इसबगोल पेट की गर्मी को शांत करता है जिससे यह बवासीरकी समस्या को समाप्त करने में भी लाभकारी होता है | दिल की समस्या में भी इसबगोल फायदेमंद होता है इसे दिन में दो बार खाना खाने के बाद पानी में घोल कर सेवन करना चाहिये | गुनगुने पानी में इसबगोल को घोलकर इसमें नीम्बू मिला ले और इस मिश्रण को सुबह सुबह खाली पेट पीना भी फायदेमंद होता है | खाना खाने के बाद इसबगोल को ठन्डे पानी में घोल कर पीना एसिडिटी से रहत देता है |

इसके प्रयोग में सावधानियाँ

  • इसबगोल का प्रयोग करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखे की पानी को पर्याप्त मात्रा में प्रयोग करें |
  • इसकी एक खुराक को प्रयोग करते समय एक गिलास पानी या इसी मात्रा में तरल पदार्थ का सेवन करें |
  • किसी भी दावा के साथ इसका सेवन कर रहे है तो ध्यान रखे की कम से कम एक घंटे का अंतर होना चाहिये |
  • इसकी दवा का सेवन करते समय ध्यान रखे की इसे खड़े होकर या बैठकर ही प्रयोग करे लेट कर इसका सेवन न करे |
  • इसकी खुराक की मात्रा लेने वाले की उम्र पर निर्भर करती है इसलिये डॉक्टर से परामर्श करके ही इसका उचित मात्रा में ही सेवन करे |

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