काला मोतियाबिंद का सरल इलाज – Kala Motiyabind Treatment In Hindi

0
190
ग्लूकोमा या काला मोतियाबिंद का सरल इलाज

काला मोतियाबिंद को ही ग्लूकोमा के नाम से भी जाना जाता है | ग्लूकोमा आँखों में होने वाली एक गंभीर बीमारी होती है | ग्लूकोमा हमारी ऑप्टिक नर्व पर दबाव डालती है | हमारी ऑप्टिक नर्व ही किसी भी वस्तु या चित्र को हमारे दिमाग तक पहुचाती है | ग्लूकोमा का अगर सही समय पर इलाज ना कराया जाये | तो हमारी आँखों पर पड़ने वाला इंट्रा-ऑक्युलर प्रेशर हमारे ऑप्टिक नर्व नष्ट कर सकता है | जिससे व्यक्ति हमेशा के लिये अँधा हो सकता है | यह समस्या अधिकतर अधिक उम्र के लोगो में पाई जाती है | शुरुआत में ग्लूकोमा का पता लगाना बहुत मुश्किल होता है | भारत में ही लगभग दो करोड़ से अधिक लोग ग्लूकोमा यानि काला मोतियाबिंद के शिकार है | अगर व्यक्ति सही खानपान का सेवन ना करे | तो एक उम्र बाद वह इस बीमारी से जरुर ग्रस्त हो जाता है | ग्लूकोमा कई प्रकार का होता है | अब आइये जानते है इसके प्रकार के बारे में

जाने काला मोतियाबिंद के प्रकार के बारे में

क्रोनिक ओपन-एंगल ग्लूकोमा – क्रोनिक ओपन-एंगल ग्लूकोमा सबसे सामान्य रूप होता है | जिसमे व्यक्ति के आँख के अंदरूनी हिस्से पर दबाव बढ़ने लगता है |

एक्यूट ग्लूकोमा – एक्यूट ग्लूकोमा में व्यक्ति की आँखों पर तेजी से दवाव पड़ता है | एक्यूट ग्लूकोमा का पता बहुत आसानी से लगाया जा सकता है | क्यूकि एक्यूट ग्लूकोमा में आँखों के तरल को बाहर निकालने वाली नलियाँ पूर्णरूप से बंद हो जाती है |

तनाव ग्लूकोमा – तनाव ग्लूकोमा को निम्न तनाव या सामान्य प्रेशर ग्लूकोमा के नाम से जाना जाता है इस समस्या में ऑप्टिक नर्व पर बिना दवाव के व्यक्ति की आँखों पर नुकसान पहुँचाता है |

जन्मजात ग्लूकोमा – जन्मजात ग्लूकोमा में आँख से असामान्य रूप से तरल पदार्थ निकलता रहता है जिसके कारण ट्रबेक्युलर तंत्र खराब होने लगता है | जन्मजात ग्लूकोमा अनुवांशिक या फिर गर्भावस्था के दौरान जन्म ले सकता है |

सेकेंडरी ग्लूकोमा – सेकेंडरी ग्लूकोमा चार प्रकार के होते है |

पिगमेंटरी ग्लूकोमा – पिगमेंटरी ग्लूकोमा के द्वारा व्यक्ति की आँख पर तेज दवाव पड़ने लगता है |

सुडोएक्सफोलिएटिव ग्लूकोमा – सुडोएक्सफोलिएटिव ग्लूकोमा में व्यक्ति की आँख की तरल निकासी प्रणाली बंद हो जाती है |

ट्रॉमेटिक ग्लूकोमा – ट्रॉमेटिक ग्लूकोमा आँख की चोट की वजह से व्यक्ति के शरीर में जन्म लेता है |

नोवास्कुलर ग्लूकोमा – नोवास्कुलर ग्लूकोमा मधुमेह के द्वारा हमारे शरीर में जन्म लेता है |

जाने इसके चरणों के बारे में

ग्लूकोमा या काला मोतियाबिंद के तीन चरण होते है |

प्रथम चरण – ग्लूकोमा के प्रतम चरण में व्यक्ति की दृष्टि पर कोई परिवर्तन नही आता है | क्यूकि इस चरण में व्यक्ति की आँख पर दवाव बहुत कम होता है |

दितीय चरण – ग्लूकोमा के दितीय चरण में व्यक्ति की नज़र बहुत कमजोर होने लगती है | पर दृष्टि का कमजोर बहुत धीमे चरण में होती है | इस वजह से व्यक्ति को इस समस्या का पता नही लग पाता है |

तीसरा या अंतिम चरण – ग्लूकोमा का अंतिम चरण बहुत जल्दी होता है | इस चरण में का व्यक्ति अंधेपन का शिकार हो जाते है |

 इस रोग के मुख्य कारणों के बारे में

ग्लूकोमा या काला मोतियाबिंद व्यक्ति के शरीर में कई कारणों की वजह से जन्म लेता है | जैसे

  • बुढ़ापे की वजह से |
  • मधुमेह व हाइपोथायरायडिज्म बीमारी के कारण |
  • आँखों में लगने वाली चोट की वजह से |
  • आँख की सर्जरी के कारण |
  • निकट दृष्टि दोष की वजह से |
  • डाइलेटिंग आईड्रॉप्स के कारण |
  • आँखों का अवरुद्ध हो जाना |
  • कॉर्टिकॉस्टिरॉइड्स की वजह से |
  • हाई ब्लड प्रेशर के कारण |
  • ऑप्टिक तंत्रिका में रक्त की कमी की वजह से |

यह समस्या केवल हमारी आँखों से निकालने वाले तरल निर्माण के बंद होने के कारण ही जन्म लेता है | अब आइये जानते है ग्लूकोमा के लक्षण के बारे में |

कैसे दिखते इसके लक्षण ?

ग्लूकोमा के लक्षण उसके प्रकार पर निर्भर करते है | क्यूकि सभी ग्लूकोमा के लक्षण अलग अलग होते है | जैसे
एंगल क्लोज़र ग्लूकोमा की समस्या होने पर व्यक्ति के शरीर में कई लक्षण नज़र आते है जैसे

  • आँखों में दर्द की समस्या का होना |
  • सिर में या फिर माथे में तेज दर्द की समस्या का होना |
  • आँखें लाल होने लगती है |
  • देखने में धुंधलापन आने लगता है |
  • रोशनी के चारों ओर रंग के छल्ले बने दिखते है |
  • जी मिचलाना की समस्या आती है |
  • उल्टी की समस्या का सामना करना पड़ता है |

क्रोनिक ग्लूकोमा के लक्षण – क्रोनिक ग्लूकोमा की समस्या के शुरुआत में किसी भी प्रकार का कोई लक्षण दिखाई नही देता है | लेकिन जैसे जैसे यह रोग बढ़ता जाता है | वैसे वैसे व्यक्ति को ब्लाइंड स्पॉट्स की समस्या होने लगती है |

तनाव ग्लूकोमा के लक्षण – तनाव ग्लूकोमा की समस्या होने पर व्यक्ति की ब्लाइंड स्पॉट्स की समस्या आने लगती है | यह समस्या व्यक्ति की ऑप्टिक तंत्रिका की क्षति के कारण आती है |

इसका सरल इलाज

काला मोतियाबिंद या ग्लूकोमा की समस्या में होने वाली क्षति को ठीक नही किया जा सकता है | अगर ग्लूकोमा की पहचान शुरुआत में कर ली जाये | तो कुछ उपचार के द्वारा दृष्टि को पहुचने वाली हानि से बचाया जा सकता है | तो आइये जानते है ग्लूकोमा से जुड़े कुछ आसान व सरल इलाज के बारे में

आईड्रॉप्स से बचा सकते है दृष्टि को

आईड्रॉप्स के द्वारा हम अपनी आँखों की तरल निकास प्रणाली को सुधार सकते है | क्यूकि आईड्रॉप्स हमारी आँखों द्वारा उत्पन्न किये जाने वाले तरल की मात्रा को कम करने में हमारी मदद करता है | जिससे हमारी आँखों पर दबाव कम होने लगता है |

प्रोस्टाग्लैंडिंस के द्वारा बचा सकते है अपनी आँखों की दृष्टि

प्रोस्टाग्लैंडिंस के द्वारा हम अपनी आँखों से निकालने वाला तरल बहाव अधिक कर देता है | इसकी वजह से हमारी आँखों पर दवाव कम हो जाता है | आपको इस समस्या को कम करने के लिए लतानोप्रोस्ट या फिर बीमाटोप्रोस्ट को प्रयोग कर सकते है |

अल्फा-एड्रेनेर्गिक अगोनिस्ट्स का प्रयोग भी फायदेमंद होता है

अल्फा-एड्रेनेर्गिक अगोनिस्ट्स हमारी आँख के लेन्स और कॉर्निया के बीच बनने वाले तरल पदार्थ को बहुत कम करते है | और हमारी आँख द्वारा तरल के बहाव अधिक कर देता है | जिससे हमारी आँख पर किसी भी प्रकार का कोई दवाव नही पड़ता है |

सर्जरी के द्वारा हम अपनी इस समस्या का उपचार कर सकते है

अगर किसी व्यक्ति की आँखों की जलनिकासी प्रणाली बंद हो जाये | तो डॉक्टर तरल पदार्थ की निकासी के लिए जल निकासी पथ बनाने वाले ऊतकों को नष्ट करने के लिए सर्जरी और अन्य उपचारों की सलाह दे सकते हैं | जैसे की

  • लेज़र थेरेपी की सलाह |
  • ड्रेनेज ट्यूब की सलाह |
  • इलेक्ट्रोकॉटरी करने की सलाह |
  • लेज़र पेरिफेरल इरिडोटमी कराने की सलाह |

और पढ़े – जाने एनेस्थीसिया के बारे में – Anesthesia In Hindi

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.