महिलाओं में मूत्र असंयमिता रोग या यूरिनरी इंकॉन्टिनेंस एक चिकित्सीय स्थिति है, इससे ग्रसित महिलाएं अपने  मूत्र ( पेशाब ) को रोके रखने की क्षमता खो देती हैं। इसी को हम यूरिनरी इंकॉन्टिनेंस  कहते है यह रोग सभी उम्र की महिलाओं में होने वाली एक सामान्य रोग समस्या है। 

महिलाओं में मूत्र असंयमिता रोग के दो प्रकार के होते हैं : 

स्ट्रेस इंकॉन्टिनेंस – स्ट्रेस इंकॉन्टिनेंस की स्थिति में महिला को खांसने, छींकने, व्यायाम करने, हँसने, कुछ भारी सामान उठाने या कभी – कभी केवल चलने पर या अचानक सोने तथा बैठने की स्थिति में बदलाव मात्र से ही मूत्र रिसने ( यूरिन लीक करने ) लगता है। 

अर्ज इंकॉन्टिनेंस – इस स्थिति में महिलाओं को अचानक ही काफी ज़ोर से पेशाब  लगने का महसूस होता है। तथा महसूस होते ही उसे तुरंत या जल्दी से जल्दी मूत्र त्याग की इच्छाहोती  है। लेकिन मूत्र इतनी ज़ोर से महसूस होता है कि मूत्र त्याग के लिए वह तय स्थान तक जाने का समय भी नही मिल पाता है। उससे पहले ही मूत्र रिस जाता है। 

महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले यूरिनरी इंकॉन्टिनेंस की समस्या दो गुणा अधिक होती हैं। महिलाओं में इसकी समस्या अधिक होने का कारण प्रेग्नेंसी तथा बच्चे का सामान्य प्रसव, मोनेपोज़ (मासिक चक्र बंद होने के बाद की स्तिथि) तथा महिलाओं में मूत्र मार्ग की बनावट है। कम उम्र की महिलाओं के मुकाबले यूरिनरी इंकॉन्टिनेंस की समस्या अधिक उम्र की महिलाओं में अधिक देखने को मिलता है। हालांकि यह हमेशा ज़रूरी नही है। यह किसी भी उम्र की महिलाओं को हो सकता है।  

यूरिनरी इंकॉन्टिनेंस ( FEMALE URINARY INCONTINENCE IN HINDI ) के कारण

महिलाओं में कई ऐसी स्थिति है, जिस कारण महिलाएं यूरिनरी इंकॉन्टिनेंस से ग्रसित हो सकती हैं। ये स्थिति निम्नलिखित है : 

• प्रेग्नेंसी

• सामान्य प्रसव (वजाइनल डिलीवरी)

• पेल्विक सर्जरी जैसे की गर्भाशय को हटाने के लिए किए जाने वाले ऑपरेशन

• मोटापा या अधिक वज़न वाली महिलाएं

• तय सीमा से अधिक पानी पीने की आदत

• मोनेपोज़ के बाद 

• अधिक उम्र होना 

• लंबे समय से मौजूद अस्थमा 

कब्ज

• यूरिनरी इंकॉन्टिनेंस होने का पारिवारिक इतिहास

महिलाओं में मूत्र असंयमिता रोग के लक्षण

यूरिनरी इंकॉन्टिनेंस का प्रमुख लक्षण यह है की मूत्राशय के गति (ब्लैडर मूवमेंट) को नियंत्रित करने में काफी समस्या आने लगती है। 

इसके अलावा यूरिनरी इंकॉन्टिनेंस के लक्षण को इसके प्रकार के आधार पर बाँटा गया है। 

स्ट्रेस इंकॉन्टिनेंस के लक्षण 

• अपने आप ही मूत्र का निकल जाना विशेष कर खांसने, छींकने या हँसने  की स्थिति में। 

• इस स्थिति में कम से लेकर अधिक मात्रा में मूत्र रिस का बाहर आ सकता है। 

अर्ज इंकॉन्टिनेंस के लक्षण

• इसमें अचानक से तथा बार बार जल्द से जल्द ही मूत्र त्याग की आवश्यकता महसूस करना |

• इस स्थिति में मध्यम से ले कर काफी अधिक मात्रा में मूत्र रिस कर बाहर आ सकता है। कभी – कभी कम मात्रा में भी मूत्र रिस सकता है। 

यूरिनरी इंकॉन्टिनेंस से ग्रसित महिलाओं में स्ट्रेस इंकॉन्टिनेंस तथा अर्ज इंकॉन्टिनेंस, दोनो के ही लक्षण एक साथ भी देखने को मिल सकते हैं। इस स्थिति को मिक्सड इंकॉन्टिनेंस कहा जाता है। 

यूरिनरी इंकॉन्टिनेंस के लिए जांच

इंकॉन्टिनेंस की जांच के लिए आपको निम्नलिखित बातों का पालन करना पर सकता है :

• सामान्य रूप से मूत्राशय के भरे होने पर डॉक्टर आपको खांसने के लिए बोल सकता है। 

• आपको प्रत्येक दिन ब्लैडर पर नज़र बनाए रखते हुए एक डायरी बनाने के लिए कहा जा सकता है। 

इसके अलावा आपको निम्नलिखित जांच भी करवाने पड़ सकते हैं :

    • क्रिस्टोमेट्री : यह कई जांच का समूह है। इसमें अलग – अलग स्तर पर मूत्राशय का दाबओ  मापा जाता है। 

• पॉजिटिव रिसिड्यूअल (पीवीआर) मेजरमेंट : इस प्रक्रिया के तहत मूत्र त्याग करने के बाद मूत्राशय में बचे मूत्र की मात्रा को मापा जाता है। 

• अल्ट्रासाउंड / डायनामिक एमआरआई : इस जांच में मूत्र त्याग के समय, खांसने के समय या स्थिति में बदलाव इत्यादि के समय मूत्राशय तथा इसके मार्ग में होने वाले बदलाव को देखा जाता है। 

यूरिनरी इंकॉन्टिनेंस का इलाज कैसे कराये ?

इसका इलाज इसके होने के कारण तथा प्रकार पर निर्भर करता है। इसमें कोई खास इलाज नही है जो की सभी महिलाओं पर एक समान लागू हो, कुछ मामलों में कुछ महिलाएं बिना सर्जरी के भी इससे उबर सकती हैं, या कुछ लाभ मिल जाता है। 

यूरिनरी इंकॉन्टिनेंस के लिए सामान्य रूप से किए जाने वाले इलाज निम्नलिखित हैं : 

• इंकॉन्टिनेंस प्रोडक्ट
• सर्जरी
• जीवनशैली में बदलाव
• पेल्विक के मांसपेशियों को मज़बूत करने के लिए विशेष प्रशिक्षण
• व्यवहारिक प्रशिक्षण जैसे की तय समय पर मूत्र त्याग इत्यादि
• मूत्राशय की मांसपेशियों को शांत करने के लिए कुछ दवाओं का उपयोग

यूरिनरी इंकॉन्टिनेंस से बचाव के उपाय

आप निम्नलिखित तरीकों से यूरिनरी इंकॉन्टिनेंस होनी की संभावना को कम कर सकते हैं : 

  1. पेल्विक हिस्से के मांसपेशियों को मज़बूत बनाने के लिए पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज कर के

  2. वज़न को बिल्कुल नियंत्रण में रख कर

  3. यूरिनरी इंकॉन्टिनेंस को बढ़ावा देने वाली बीमारियों जैसे अस्थमा, सीओपीडी, कब्ज़ इत्यादि का सही समय पर इलाज करा कर भी यूरिनरी इंकॉन्टिनेंस होने की संभावनाओं, को कम किया जा सकता है। 

मानवेन्द्र सिंह

मानवेंद्र सिंह सॉफ्ट प्रमोशन टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड में फिटनेस और हेल्थ ब्लॉगर हैं। उन्होंने 2006 में BHM स्नातक की डिग्री ली है। उन्हें स्वास्थ्य एवं विज्ञान अनुसंधान के क्षेत्र में लेखन का आनंद मिलता है।

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