मिर्गी रोग क्या है एवं मिर्गी के प्रकार व घरेलु उपचार

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दोस्तों मिर्गी एक ऐसा रोग है जिसमे व्यक्ति अचानक जमीन पर गिर का प्रायः अर्द्ध मूर्छितावस्था में रहता है | रोगी को इसका पूर्वाभास भी नही होता | की उसे मिर्गी का दौरा  पड़ने वाला है |दोस्तों यदि किसी करणवश यदि मस्तिष्क में विकार उत्पन्न हो जायें |जैसे चोट लग जाने के पश्चात् संक्रमण की वजह से या किसी रोग विशेष के कारण, तो मस्तिष्क से प्रसारित होने वाले संदेश गढ़बडा जाते है इसकी वजह से मांसपेशियों की गतिविधियों में विकार उत्पन्न हो मांसपेशियां झटके देने लगती है |ऐठं जाती है या मरोड़ खाने लगती है इसे कन्वलशन के नाम से जाना जाता है इसे ही मिर्गी  का दौरा पड़ना कहा जाता है |

मिर्गी रोग क्या है ?

इसमें रोगी हॉफता है मुँह से झाग उगलता है |उसकी आँखे फटी-फटी सी और पलकें स्थिर हो जाती है | तथा गर्दन अकड़कर टेढ़ी हो जाती है |रोगी हाथ पैर पटकता है वह अजीब सी आवाजें करने लगता है | मिर्गी  का दौरा (Epileptic Fit) जन्म लेने के बाद किसी भी उम्र में पड सकता है स्कूल जानेवाली उम्र के हर 200 में से एक बच्चे को मिर्गी का दौरा  पड़ता है |

मिर्गी  के लक्षणों को तीन अवस्थाओं में बाँटा जाता है |

मिर्गी  के प्रकार –

प्रथम अवस्था मिर्गी – सारा शरीर तन जाता है | यह अवस्था 30 सेकंड से अधिक नही होती है | मरीज अपने दांतों से अपनी जीभ को चबा जाता है |

द्वतीय अवस्था मिर्गी – यह समस्या अधिक उग्र होती है दो से पांच मिनटों तक बनी रहने वाली इस अवस्था के दौरान मरीज को तेज झटके आते है | उसके मुँह से झाग निकलकर बाहर बहने लगता है |

तृतीय अवस्था मिर्गी- इसमे झटके आना बंद हो जाता है मरीज या तो होश में आ जाता है | या फिर अचेत अवस्था में रहता है |

मिर्गी के दौरे पड़ने के कई कारण हो सकते है मगर आइये जानते है मिर्गी कुछ मुख्य कारणों को

इसके मुख्य कारण :

  • दिमागी बुखार |
  • अत्याधिक तेज बुखार |
  • खसरा या गलसुआ |
  • मस्तिष्क में कमजोरी |
  • मस्तिष्क में संक्रमण |
  • दिमाग में सूजन |
  • निम्न रक्तचाप |
  • मस्तिष्क में खून का थक्का जमना आदि |

दोस्तों इन लक्षण व कारणों से बीमारी को पहचान कर इसका बचाब कर सकते है | डॉक्टरसे परामर्श ले सकते है |इसके साथ ही कुछ घरेलु उपायों द्वारा भी इसका बचाब कर सकते है |तो आइये जानते है वो घरेलु उपाय

इस रोग के घरेलु उपाय :

बकरी का दूध- बकरी का दूध मिरगी (Epilepsy) के मरीजो के लियें काफी फायदेमंद होता है |

बकरी के दूध में 50 ग्राम मेंहदी के पत्तो को मिलाकर इसका सेवन करें |

तुलसी- तुलसी में काफी मात्रा में एंटी ऑक्ससीडेंट पाये जाते है |

जो मस्तिष्क में फ्री रेडिकल्स को ठीक करते है | यह काफी असरदार होता है |

ब्राह्मी बूटी- ब्राह्मी के पत्ते हमारे घरो के आस-पास खासकर जहाँ मिटटी होती है वहाँ उगते है इसे रोज खाली पेट चबा कर खाने से न सिर्फ याददाशत मजबूत होती है | बल्कि मिरगी के दौरे (Epileptic Fit) को भी कम करता है |

अंगूर का रस- मिरगी (Epilepsy) के मरीजो के लिये अंगूर का रस काफी फायदेमंद होता है | अंगूर का जूस खाली पेट पीना चाहिये बेहतर परिणाम मिलते है |

मिटटी का लेप- मिट्टी को पानी में गीला करके मरीज के पूरे शरीर में लेप लगा दें | इससे मिरगी के दौरे (Epileptic Fit) कम आयेगें यह इलाज काफी कारगर है |

कददू- मिरगी (Epilepsy) के मरीजों के लिये कददू या पेठा सबसे कारगर इलाज है | कददू का जूस रोजाना पीने से काफी फायदा होता है |

दोस्तों जब भी हम देखते है किसी को मिर्गी का दौरा (Epileptic Fit) पड़ रहा है तो हमें समझ नही आता है की क्या करें और क्या न करें तो आइये जानते है कुछ सावधानियाँ-

इस रोग में कुछ सावधानियाँ :

  • कसे हुयें या बाधा उत्पन्न करने वाले वस्त्रों को निकाल दें |
  • मरीज को जमीन या समतल पर लिटा दें |
  • मरीज के आस-पास कोई नुकीली चीज न छोड़े |
  • चिकित्सक से सम्पर्क करें |

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