क्यों की जाती है इलैक्ट्रोकार्डियोग्राफी या ईसीजी जाँच

इलैक्ट्रोकार्डियोग्राफी यानि ईसीजी एक प्रकार का टेस्ट होता है | इसके द्वारा मरीज के ह्रदय की धड़कन को विद्युत आवेग से ह्रदय की मांसपेशियों में रक्त प्रवाहित किया जाता है | इलैक्ट्रोकार्डियोग्राफी यानि ईसीजी करने से डॉक्टर को कई बातों का पता चलता है | जैसे –

  • मरीज के ह्रदय का विद्युत आवेग तेज, धीमा या अनियमित है |
  • ह्रदय के कार्य व आकार का पता लगाया जाता है |
  • ह्रदय की मांसपेशियों का पता लगाया जाता है |

क्यों की जाती है इलैक्ट्रोकार्डियोग्राफी या ईसीजी जाँच

ईसीजी जाँच की जरुरत ह्रदय से जुड़े मामलों में पड़ती है | जैसे –

स्ट्रेस टेस्ट की जाँच के लिए करनी पड़ती है ईसीजी :

कभी कभी व्यक्ति को वयायाम के दौरान भी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है | अधिक वयायाम करने से हमारे ह्रदय पर काफी गहरा असर पड़ता है| इसी समस्या को ठीक करने के लिए ईसीजी का सहारा लिया जाता है | इस जाँच से व्यक्ति के तनाव परीक्षण की जाँच का पता लगया जाता है |

दिल की गतिविधि का पता लगाने के लिए की जाती है ईसीजी :

दिल की गतिविधि का पता होल्टर मॉनिटर द्वारा किया जाता है | इसके द्वारा 24 से 48 घंटों तक मरीज के दिल की गतिविधि का पता लगाया जाता है | इस जाँच के दौरान डॉक्टर मरीज के हर्दय में होने वाली समस्या का पता लगता है | होल्टर मॉनिटर को मरीज के छाती पर लगाया जाता है |

इवेंट रिकॉर्डर के लिए की जाती है ईसीजी :

कुछ ऐसे लक्षण होते है जो कभी कभी नजर भी नहीं आते हैं | उनकी पहचान करने के लिए एक इवेंट रिकॉर्डर की आवश्यकता पड़ती है | इवेंट रिकॉर्डर भी होल्टर मॉनिटर की तरह होता है, लेकिन यह मरीज के दिल की विद्युत गतिविधि उस समय रिकॉर्ड करता है|जब मरीज को ह्रदय से जुडी कोई समस्या का सामना करना पड़ता है| यह इन लक्षण का पता ऑटोमेटिकली लगता है|

कैसे की जाती ईसीजी जाँच :

इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम या ईसीजी जाँच को करने में अधिक समय नही लगता है| इस टेस्ट के लिए मरीज को सबसे पहले मेज पर लिटाया जाता है , फिर यदि पुरुष है तो पुरुषों के सीने के बालों को काटा जाता है| फिर सीने पर टांगों और बाहों पर पैड रखा जाता है| पैड्स को ईसीजी मशीन की तारों के साथ जोड़ा जाता है| जिसके द्वारा हृदय गतिविधियो को दर्ज किया जाता है| इस टेस्ट के समय मरीज किसी भी प्रकार की कोई बात चीत नही कर सकता है| इस टेस्ट को करते समय किसी भी प्रकार का कोई दर्द नही होता है| इस टेस्ट को करने से पहले मरीज को किसी भी प्रकार का कोई नया लोशन ना लगाने की सलाह दी जाती है |

इससे होने वाली हानि

ईसीजी टेस्ट को करते समय शरीर को किसी भी प्रकार का कोई नुकसान नही होता है | जिस जगह पर पैड्स लगाया जाता है | वहां पर दाने व चक्ते की समस्या का सामना करना पड़ सकता है | अगर किसी मरीज को स्ट्रेस की समस्या है | तो उसको स्ट्रेस टेस्ट के समय दिल का दौरा पड़ने जैसी समस्या हो सकती है | लेकिन यह ईसीजी से जुडी समस्या नही होती है | इस टेस्ट के बाद मरीज के हर्दय की परेशानी का पता लगाकर डॉक्टर उसका इलाज शुरू कर देते है |

अब आइये जानते है इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम से जुड़े कुछ सवाल के बारे में-

इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम में किस प्रकार का इलेक्ट्रिक करंट दिया जाता है ?

इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम को करते समय मरीज को नार्मल इलेक्ट्रिक करंट दिया जाता है , जिससे ह्रदय में होने वाली समस्या का पता लगाया जा सके|

ईसीजी टेस्ट करते समय मरीज इलेक्ट्रोड से करंट आता है क्या ?

ईसीजी टेस्ट करते समय मरीज को इलेक्ट्रोड के द्वारा ही करंट दिया जाता है |

इलेक्ट्रोड नार्मल है लेकिन ईसीजी टेस्ट पॉजिटिव आता है क्या ?

यदि मरीज का इलेक्ट्रोड नार्मल है तो ईसीजी टेस्ट पॉजिटिव ही आयेगा| इससे मरीज को किसी भी प्रकार की कोई समस्या नही होती है |

क्या ईसीजी टेस्ट में तोड़ी से भी खराबी होने से मरीज को दिक्कत हो सकती है क्या ?

जी हाँ अगर ईसीजी टेस्ट सही प्रकार नही किया जाये तो मरीज को कई प्रकार की दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है | इससे उसके ह्रदय से जुडी समस्या का पता नही चल सकता है |

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मानवेन्द्र सिंह

मानवेन्द्र सिंह

मानवेंद्र सिंह सॉफ्ट प्रमोशन टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड में फिटनेस और हेल्थ ब्लॉगर हैं। उन्होंने 2006 में BHM स्नातक की डिग्री ली है। उन्हें स्वास्थ्य एवं विज्ञान अनुसंधान के क्षेत्र में लेखन का आनंद मिलता है।

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