डीवीटी का पूरा नाम डीप वेन थ्रोम्बोसिस है, यह एक प्रकार का रोग है जिसमें खून का थक्का जमने जैसी समस्याओं को देखा जाता है. जब शरीर की नसों में खून का थक्का जमने जैसी स्थिति सामने आती है, तो उस परिस्थिति में डीवीटी रोग होता है. आम तौर पर यह रोग टांगों में देखने को मिलता है. अब सवाल आता है, आखिर इस रोग के होने का कारण क्या है?

डीवीटी होने के मुख्य कारण

डीवीटी होने के कई कारण है जिसमें से कुछ इस प्रकार हैं:

  • कम चलना
  • हार्मोन्स थेरेपी
  • प्रेगनेंसी टेस्ट
  • उच्च रक्तचाप
  • धूम्रपान
  • अत्यधिक वजन
  • तली वस्तुओं का सेवन इत्यादि.

इन सभी कारणों से डीवीटी होने की सम्भावना बढ़ जाती है. इसलिए अगर आपको डी वी टी से बचना है तो इन सभी कारकों पर नियंत्रण रखें. और अपनी जीवनशैली में परिवर्तन लायें.

डी वी टी मूल्यतः उन नसों में पाया जाता है जो ह्रदय से खून का प्रवाह करती हैं. और जब धीरे – धीरे नसों में खून का प्रवाह धीमा हो जाता है तब डीवीटी रोग होने के कारण बनते हैं. एवं इसी के चलते यदि रक्तवाहिकाओं में क्षति पहुँचने लगे एवं खून की प्रक्रिया बदलने लगे, इस स्थिति में खून के थक्के आसानी से बनने लगते हैं एवं डीवीटी रोग होने की सम्भावना बढ़ जाती है.

किसी सर्जरी के कारण भी नसों में आघात होता है, जिससे डी वी टी होना संभव है. अगर किसी इन्सान को लकवा हो जाता है, और इस स्थिति में पैर कई लम्बे समय तक कोई क्रिया नहीं कर पाते और इसी के चलते डीवीटी हो सकता है, क्योंकि नसों में खून का थक्का जम जाता है.

जाने डीवीटी के कुछ जरूरी लक्षण के बारे में 

डीवीटी के लक्षण निम्न प्रकार हैं, और अगर आपको अपने शरीर में कुछ इस प्रकार के लक्षण दिखाई दें तो आप किसी अच्छे चिकित्सक से सलाह अवश्य लें.

  • शरीर के किसी स्थान पर असहनीय दर्द .
  • शरीर में जिस स्थान पर थक्के जमा हुए हैं उस जगह की त्वचा गर्म होना.
  • घुटनों के पीछे की त्वचा का लाल होना.
  • किसी एक पैर पर दर्द एवं उस स्थान पर छूने में तीवर दर्द.

कहा जाता है कि डीवीटी आमतौर पर एक ही पैर में देखा जाता है, पैर में सुजन आना, त्वचा का लाल पड़ना एवं गंभीर रूप से दर्द होना. इस बीमारी के चलते लोग चलने में भी समर्थ नहीं होते.

जाने डी वी टी से बचाव 

डीवीटी से हमें अपने शरीर को बचाना चाहिए क्योंकि यह एक गंभीर बीमारी है और अगर समय रहते हमने डीवीटी से रोकथाम कर ली, तो हमारा शरीर कम से कम इस बीमारी से बचाया जा सकता है.

  • घंटों तक एक ही जगह पर बैठें

कई बार ऐसा होता है कि हमारी नौकरी या काम की वजह से हमें एक ही जगह कई घंटों तक स्थिर होकर बैठना पड़ता है, और इसके चलते हमारा शरीर जाम होने लगता है, साथ ही साथ मोटापा बढ़ना, बजन बढ़ना, उच्च रक्तचाप जैसी समस्याएं भी आने लगती हैं. इसलिए आप हर घंटे कम से कम मिनट के लिए अवश्य चले, इससे कई हद तक डीवीटी से बचाव किया जा सकता है.

  • जीवनशैली में लायें बदलाव 

हमें अपनी जीवनशैली में सुचारू बदलाव लाना चाहिए, क्योंकि यह बदलाव हमारे जीवन में कई समस्याओं को सुलझा सकते हैं. जैसे अगर आपको धुम्रपान करने की आदत है, तो इस आदत को बदल डालें. अगर आपको मंदिरापान की आदत है तो इसको बदलें. इसके साथ ही तली चीज़ों का सेवन न करें या कम से कम करें ताकि आपका रक्तचाप सही रहे.

  • नियमित वयायाम

नियमित वयायाम शरीर के लिए बहुत अच्छा है, नियमित वयायाम करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है एवं शरीर तंदरुस्त रहता है. वयायाम का समय आप सुबह का निर्धारित करें, क्योंकि इस समय आपको सुबह की ताज़ी हवा मिलेगी, जो स्वाथ्य के लिए बहुत उचित है, इसके साथ ही आपका पूरा दिन अच्छा बीतेगा. वयायाम में आप योग या धीरे-धीरे चलना, टहलना जैसी चीज़े कर सकते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद हैं. अगर हो सके तो शाम के खाने के बाद भी टहलने जैसी प्रक्रिया को करें.

हर महीने अपने शरीर का पूरा टेस्ट करवाएं

अपने शरीर का कम से कम महीने में एक बार चेकअप अवश्य कराएं और जो कमियां वयायाम एवं टहलने से समाप्त हो सकती हैं, उनको कम करें जैसे उच्च रक्तचाप, मोटापा, रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढाएं.

डीवीटी का सफल परिक्षण

यदि आपको ऐसा महसूस होता है कि आपको डीवीटी रोग है तो आपको डॉक्टर से सलाह अवश्य लेनी चाहिए. अगर आपको कुछ इस तरह के लक्षण दिखाई देते हैं जैसे पैरों में दर्द, पैर के घुटनों में लाल निशान, सूजन या तेज दर्द इत्यादि तो आपको डॉक्टर को अवश्य दिखाना चाहिए क्योंकि यह डीवीटी के लक्षण हैं.

डॉक्टर के द्वारा किये जाने वाले टेस्ट

  • डी-डिमर टेस्ट
  • अल्ट्रासाउंड स्कैन
  • वेनोग्राम

ये तीनो टेस्ट डीवीटी के परिक्षण के लिए किये जाते हैं, इनसे स्थिति बिल्कुल साफ़ हो जाती है कि डीवीटी है या नहीं और हम भी अपने स्वास्थ्य को लेकर सजग हो जाते हैं.

डी वी टी का इलाज

वैसे तो जैसे ही आपको डीवीटी के लक्षण दिखाई दें आप डीवीटी का टेस्ट अवश्य कराएं, एवं आमतौर पर डॉक्टर इस मामले में खून को पतला करने की सलाह देते हैं अगर आप खून पतला करने के लिए घरेलु उपचार करते हैं तो लहसुन को रोज सुबह चबाकर या पानी से निगलकर खाएं, लहसुन में खून को पतला करने की बहुत ज्यादा क्षमता होती है. इसके अलावा डॉक्टर डीवीटी में anticoagulant नामक दवाई लेने की सलाह देते हैं.

इस मामले में कुछ डॉक्टर सर्जरी की सलाह भी देते हैं और सर्जरी में डॉक्टर के पास दो विकल्प होते हैं पहला तो जो भी नस डीवीटी से प्रभावित है उस तक पहुंचना और उस थक्के हो हटाना. दूसरा डीवीटी से प्रभावित नसों में थ्रोम्बोल्य्टिक दवाएं पहुचना. इन प्रक्रियाओं को डॉक्टर डीवीटी के इलाज के लिए  उपयोग करते हैं लेकिन जब स्थिति बहुत ही बिगड़ी हुई होती है तो सर्जरी करनी पड़ती है . और अगर दवाओं से कम चल जाता है तो सर्जरी नहीं की जाती.

डी वी टी की जटिलता

डी वी टी से जुडी कई और गंभीर समस्याएं होती हैं जैसे:

  • पल्मोनरी एम्बोलिज्म
  • पोस्त्फ्लेबायेटिक सिंड्रोम

डीवीटी से बचने के जो भी उपाय यहाँ दिए गए हैं आप उनको अपने नियमित जीवन में उतार सकते हैं तथा डीवीटी से बच सकते हैं.

मानवेन्द्र सिंह

मानवेंद्र सिंह सॉफ्ट प्रमोशन टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड में फिटनेस और हेल्थ ब्लॉगर हैं। उन्होंने 2006 में BHM स्नातक की डिग्री ली है। उन्हें स्वास्थ्य एवं विज्ञान अनुसंधान के क्षेत्र में लेखन का आनंद मिलता है।

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