डिमेंशिया का सरल उपचार – Dementia Treatment In Hindi

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डिमेंशिया की समस्या होने पर हमारी मानसिक क्षमता में कमी आ जाती है | जिसकी वजह से हमें डिमेंशिया जैसी समस्या का शिकार होना पड़ता है | इस बीमारी के होने पर हमारी सोचने की क्षमता कम हो जाती है | जिससे हमारे जीवन पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है | डिमेंशिया एक बीमारी नहीं है बल्कि एक सिंड्रोम होता है | जिसके लक्षण सभी मस्तिष्क रोगों की तरह ही होते है |

डिमेंशिया क्या है ?

  • याद करने की शक्ति में कमी |
  • सोचने में कठिनाई |
  • समस्याओं को ना सुलझा पाना |
  • शब्दों का चुनाव ना कर पाना |

आदि इसमें शामिल होते है | इससे ग्रस्त व्यक्ति का दिमाग सही रूप सकाम ना कर पाने की वजह से उसको इस प्रकार की समस्या का सामान करना पड़ता है | पहले यह समस्या केवल अधिक उम्र होने पर ही होती थी | लेकिन आज कल इस समस्या के कई मामले देखने को मिलते है | यह समस्या अधिक तनाव लेने की वजह से भी हो जाती है | अब आइये जानते है | इसके प्रकार के बारे में |

 प्रकार

मिश्रित डिमेंशिया – मिश्रित डिमेंशिया के हो जाने पर मस्तिष्क में असामान्यताएं पैदा होने लगती है | यह समस्या सबसे अधिक अल्जाइमर और वैस्कुलर के कारण होती है |

वैस्कुलर डिमेंशिया – वैस्कुलर डिमेंशिया को पोस्ट स्ट्रोक या मल्टी-इन्फर्क्ट डिमेंशिया के नाम से भी जाना जाता है | यह समस्या क्त वाहिकाओं के रूक जाने के कारण होती है | वैसे मस्तिष्क में चोट लगने के कारण भी हमें इस समस्या का सामना करना पड़ता है |

अल्जाइमर – अल्जाइमर डिमेंशिया की समस्या का आम प्रकार होता है | इस 80 प्रतिशत मामलों में अल्जाइमर की वजह से ही हमें इस समस्या का सामना करना पड़ता है |

लेवी बॉडीज डिमेंशिया – इस डिमेंशियाके कारण हमारी याददाश्त में कमी के साथ साथ भ्रम जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है | यह केवल कोर्टेक्स में प्रोटीन जमा हो की वजह से होता है |

पार्किंसंस डिमेंशिया – पार्किंसंस डिमेंशिया एक न्यूरोडीजेनेरेटिव अवस्था की वजह से पैदा होती है | जिससे शरीर को डिमेंशिया जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है |

फ्रंटोटेमपोरल डिमेंशिया – फ्रंटोटेमपोरल डिमेंशिया के कारण व्यक्ति के वयवहार में परिवर्तन आने लगता है | व्यक्ति को भाषा व बोलने में काफी समस्या का सामना करना पड़ता है |

 चरण

डिमेंशिया के सात चरण माने जाते है |

  1. इस चरण में डिमेंशिया का सामना नही करना पड़ता है |
  2. इस चरण में व्यक्ति को भूलने की समस्या शुरू होने लगती है |
  3. इस चरण में भूलने के साथ साथ बात को समझने में भी कठनाई का सामना करना पड़ता है |
  4. इस स्थिति में डिमेंशिया से ग्रस्त लोगों को ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होती है |
  5. इस चरण में याददाश्त में बहुत कमी आ जाती है | दिनचर्या भी पूर्णरूप से बदल जाती है |
  6. इस चरण में हमारी याददाश्त की क्षमता पूर्णरूप से खत्म हो जाती है |
  7. इस चरण में हमारी बोलचाल की क्षमता पूरी तरह खत्म हो जाती है |

 लक्षण

  • हाल ही में याददाश्त का खोना |
  • घरेलू कार्यों को पूरा करने में कठिनाई का होना |
  • बातचीत करने में समस्या का आना |
  • संक्षेप में सोचने की समस्या खो देना |
  • चीजों को रखकर भूल जाना |
  • वयवहार में बदलाव का आना |
  • पहल करने में झिजक आना |
  • कही भी भटक जाना |

 आसन इलाज

हरी पत्तियों वाली सब्जियों का सेवन करे

अगर आपकी याददाश्त दिन प्रतिदिन कमजोर होती जा रही है | तो आपको आपको अपने रोजाना के भोजन में हरी पत्तियों वाली सब्जियों को जोड़ लेना चाहिये क्यूकि हरी पत्तियों वाली सब्जियों में पालक विटामिन ए, विटामिन बी 2, सी, ई और के, लौह, कैल्शियम, मैग्नीशियम, मैंगनीज, फास्फोरस, जस्ता, सेलेनियम, तांबे, फोलेट, प्रोटीन और आहार फाइबर जैसे तत्व हमारे रक्त संचार को सुचारू रूप से कार्य करने में मदद दिलाते है | और हमारे रक्त में आक्सीज़न की मात्रा को भी ठीक बनाते है जिससे हमारे मस्तिष्क तक पूर्णरूप से आक्सीज़न पहुच पाता है | आपको नियमित पालक, पत्ता गोभी, सरसों के पत्ते आदि का सेवन करना चाहिये |

फलो का सेवन करना चाहिए

फलो में पाये जाने वाले खनिज व विटामिन्स के साथ साथ एंथॉसायनिन व कई एंटी-आक्सिडेंट भी पाए जाते है | जो हमारे शरीर को स्वस्थ बनाने में हमारी बहुत मदद करते है | अगर इनका हम नियमित सेवन करे | तो हमारी मस्तिष्क की क्षमता में भी बहुत बढ़ोतरी होती है | आपको नियमित जामुन, सीताफल, अंगूर, सेब व आम जैसे फलो का नियमित सेवन करते रहना चाहिये | जिससे हमारा शरीर राडिकल्स के द्वारा होने वाली हानियों से बच सके |

ओमेगा 3 युक्त भोजन का सेवन करे

अगर हमारे शरीर मे ओमेगा 3 की कमी होने लगे | तो इसकी वजह से भी हमारे मस्तिष्क की क्षमता में कमजोरी आने लगती है | और हमारी याददाश्त कमजोर होने लगती है | इसीलिए आपको अपने भोजन में मछली के साथ साथ अलसी के बीज, जैतून का तेल व सूरजमुखी तेल का भी सेवन करते रहना चाहिये | जिससे हमारे मस्तिष्क का आकर सही बना रहता है |

हल्दी व दालचीनी का सेवन करे

हल्दी व दालचीनी में पाए जाने वाले एंटी-ऑक्सीडेंट व एंटी-इंफ्लेमेटरी, संक्रामक विरोधी और एंटी-क्लोटिंग पॉलीफेनोल और मैंगनीज, आयरन और फाइबर जैसे तत्व हमारे मस्तिष्क को स्वास्थ बनाने में हमारी बहुत मदद करते है | अगर आपके मस्तिष्क में किसी प्रकार की कोई सुजन है | तो आपको इसका सेवन सुबह शाम करना चाहिये|

नट्स का सेवन अधिक से अधिक करे

आपको नियमित अपने नाश्ते के साथ नट्स का सेवन करना चाहिये | क्यूकि इनमे पाए जाने वाले ओमेगा 3एस, ओमेगा 6एस, विटामिन ई और विटामिन बी 6, मैग्निशियम और फोलेट जैसे तत्व हमारे मस्तिष्क को स्वस्थ बनाते है | आपको रोजाना बादाम, काजू, अखरोट व मूंगफली का सेवन करना चाहिये

 समस्या होने पर ध्यान रखने योग्य बाते

  • धूम्रपान को पूर्णरूप से छोड़ दे |
  • प्रोसेस्ड मांस व तला भुना भोजन ना करे |
  • मोटापा को जल्द से जल्द खत्म करे |
  • तनाव मुक्त रहे |
  • शराब का सेवन बंद कर दे |

अगर आप भी डिमेंशिया जैसी समस्या से ग्रस्त है | तो आपको भी उपर दी हुई बातों को ध्यान पूर्वक पढ़कर इनको अपनाना चाहिये |

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