सीटी स्कैन क्या होता है

सी टी स्कैन से जुडी हुई कुछ जानकारियां आज हम आपको बतायेंगें की सी टी स्कैन क्या होता है | सीटी स्कैन कब करवाया जाता है और इसे किस अवस्था में करवाया जाता है | सीटी स्कैन कैसे किया जाता है इससे जुडी कुछ जानकारियां बतायेंगें | इस तरह की कुछ महत्वपूर्ण जानकारी आपको पता होना बहुत जरुरी है क्योंकि शायद ही आप इस जानकारी के बारे में जानते होंगे | हो सकता यह जानकरी आपके लिए फायदेमंद साबित हो जाये |

आज के समय में हम अपने आस पास , घर परिवार और रिश्तेदारो में कोई ना कोई ऐसा व्यक्ति मिल ही जाता है | जो कोई ना कोई गंभीर बीमारी से परेशान ही होता है | जिसके इलाज के लिए उसे कई तरह के टेस्ट और स्कैन की प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है | इन स्कैन में से ही एक स्कैन सीटी स्कैन भी होता है | इसीलिये आपको सीटी स्कैन के बारे में पूरी जानकरी का होना बहुत आवश्यक होता है |

क्यूंकि कई बार आपके परिवार के सदस्यों का भी सीटी स्कैन हो सकता है | यदि आपको पहले से ही सी टी स्कैन के बारे में पूरी जानकारी होगी तो आप अपना और किसी अपने का आसानी से सीटी स्कैन करवा सकते है | तो आइये सीटी स्कैन के बारे में पूरी जानकारी को विस्तार से जानते है |

सी टी स्कैन क्या होता है ?

सीटी स्कैन का अबिष्कार ब्रिटिश सरकार ने सर गॉडफ्रे हंसफील्ड और डॉ एलन कॉर्मैक नाम से स्वतंत्र रूप से किया था | जिसके लिए इन दोनों लोगो को 1979 में संयुक्त रूप से नोबेल पुरुस्कार से सम्मानित किया गया | कंप्यूटर और एक्स रे की मदद से किया जाने बाला सीटी स्कैन या फिर जिसे सीएटी स्कैन भी कहा जाता है एक विशेष प्रकार का टेस्ट होता है | इस टेस्ट के द्वारा हमारे कुछ विशेष अंगो का अंदरूनी फोटो लिया जाता है |

जिसकी मदद से शरीर में होने वाली किसी भी बीमारी को आसानी से पहचाना जा सकता है | सीटी स्कैन को सी एटी स्कैन के साथ ही कम्प्यूटराइजड एक्सिअल टोमोग्राफी के नाम से भी जाना जाता है | वैसे तो सीटी स्कैन एक्स-रे का ही एक विकसित रूप होता है और उससे अच्छा होता है | इससे हमारे शरीर के अंदरूनी हिस्सों की अच्छी फोटो आती है जिससे बीमारी को आसानी से पहचान लिया जाता है |

सीटी स्कैन चिकित्सकों के लिए बहुत फायदेमंद होता है इसकी मदद से वो बिमारियों का आसानी पता लगा लेते है और बीमारी का उपचार भी आसानी से कर पाते है | सिट स्कैन को एक बहुत बड़ा आविष्कार मन जाता है क्योंकि इस आविष्कार के बाद से शरीर के अन्दर मौजूद बहुत सी अंदरूनी बिमारियों का पता लगाना बहुत आसान हो गया वो बहुत आसानी के साथ क्योंकि मानव शरीर के अन्दर बहुत सी ऐसी बीमारियाँ होती है

जिनका पता लगाना बहुत मुश्किल होता था | लेकिन सीटी स्कैन के अविष्कार के बाद चिक्तिसक क्षेत्र बहुत बदल गया है | इसके साथ ही यह स्कैन यह भी पता लगाने में मदद करता है की बीमारी कितनी पुरानी है , शरीर में कितने हिस्से में फैली हुई है और शरीर के किस भाग को प्रभावित कर रहा है इन सब बातो का पता लगाने में बहुत फायदेमंद है

किन किन अंगो का सी टी स्कैन होता है ?

मस्तिष्क का सी टी स्कैन

वैसे तो हम अपने शरीर की किसी भी अंग के किसी भी हिस्से का सी टी स्कैन करवा सकते है | जरूरत पड़ने पर पूरे मानव शरीर का सीटी स्कैन किया जा सकता है | लेकिन ज्यादातर मामलो में शरीर के कुछ खास हिस्सों का ही सीटी स्कैन किया जाता है जिनमे मस्तिष्क का सीटी स्कैन प्रमुख होता है | हमारे मस्तिष्क के किसी भी हिस्से की नस फट जाने पर या किसी भी नस में खून जम जाने पर समस्या का पता लगाने के लिए मस्तिष्क का सीटी स्कैन कारवाना बहुत जरूरी हो जाता है |

छाती का सीटी स्कैन

छाती के होने वाले सीटी स्कैन में फेफड़े , हृदय , अन्नप्रणाली कैरेक्टर , छाती के बीच में प्रमुख रक्त वाहिका (महाधमनी) या ऊतकों में होने वाली समस्यायों की जांच की जा सकती है | कुछ सामान्य स्थितयो में जैसे सीने की समस्यायों में सीटी स्कैन के द्वारा संक्रमण , फेफड़े के कैंसर , एक फुफ्फुसीय अन्तःवाहिनी , और एक अनियिरिज्म की भी जाँच की जा सकती है | छाती के सीटी स्कैन को यह देखने के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है कि कंही कैंसर शरीर के दूसरे अंगो में से होता हुआ छाती में तो नहीं फैल गया है |

मूत्र पथ का होता है सीटी स्कैन

मूत्र पथ के स्कैन में गुर्दे के कैरेक्टर , सीएटी स्कैन , गैलरी , यूटरर्स और मूत्राशय को सीटी केयूयूबी या सीटी यूरोग्राम के नाम से जाना जाता है | मूत्र पथ के सीटी स्कैन में गुर्दे के पत्थर , मूत्राशय में पत्थर या मूत्र पथ में पत्थरों को आसानी से देखा जा सकता है | यह सीटी स्कैन का एक विशेष प्रकार होता है इसे सीटी अन्तराशि पाइलोग्राम (आईवीपी) के नाम से जाना जाता है | गुर्दा की पथरी , रुकावट , विकास , संक्रमण या मूत्र पथ के दुसरे रोगों को देखने के लिए इंजेक्शन डाई ( विपरीत सामग्री ) का प्रयोग किया जाता है |

यदि कोई मानक एक्स-रे चित्र या रेडियोग्राफ़ (जैसे छाती एक्स-रे) पर दिखता है, तो ऐसा महसूस होता है कि वे शरीर के माध्यम से देख रहे हैं। सीटी और एमआरआई एक-दूसरे के जैसे होते हैं, लेकिन एक्स-रे की तुलना में शरीर का एक बहुत अलग चित्र दीखते है. सीटी और एमआरआई क्रॉस-अनुभागीय चित्र देखते हैं जो शरीर को खोलने के लिए होते हैं, जिससे डॉक्टर इसे अंदर से देखता है।

वैसे आम तौर पर एमआरआई से लिए हुए चित्र को बनाने के लिए एक विशेष प्रकार के एक चुंबकीय क्षेत्र और रेडियो तरंगों का प्रयोग किया जाता है | जबकि सीटी स्कैन में बनने वाले चित्रों को बनाने के लिए एक्स-रे किरणों का प्रयोग किया जाता है | यह निमोनिया , गठिया और फ्रैक्चर जैसी समस्यायों के रोग-निदान पर मौजूदहोता हैं | सीटी स्कैन और एमआरआई तकनीको से बेहतर मस्तिष्क , यकृत , और पेट के अंगों जैसे नरम ऊतकों का अंदाज़ करने के साथ-साथ सूक्ष्म असामान्यताओं की कल्पना करने में भी मदद मिलती है | जो की सामान्य एक्स-रे टेस्ट के द्वारा स्पष्ट नहीं हो पता है | इन तकनीक से कैंसर वाले लोगों के लिए , सीटी स्कैन यह निर्धारित करने में मदद कर सकता है कि कैंसर कितना फैल चुका है , इसे कैंसर का स्टेजिंग कहा जाता है |

सीटी स्कैन करवाने से पहले क्या करे ?

  • जब आपको सीटी स्कैन करवाने की सलाह दी जाती है तो आपको अपने डॉक्टर को अपने बारे में सब कुछ बता देना चाहिये | अगर आपने अपने शरीर के किसी भी हिस्से में टैटू बनाया हो , या आपके शरीर में किसी भी जगह कोई चीज़ डाली गई हो | हड्डी टूट जाने पर वंहा पर लोहे की छड डाली गई हो या दांतों में समस्या होने पर उनमे परत या कोई और चीज़ लगबाई गई हो | इस सबके बारे में अपने डॉक्टर को जरूर बता देना चाहिए क्योंकि इन चीजों के होने से आपके सीटी स्कैन का रिजल्ट खराब हो सकता है |
  • अगर आपके पेट का सीटी स्कैन होना है तो आपको सीटी स्कैन होने की एक रात पहले से ही कोई ठोस पदार्थ ना खाने की सलाह दी जाती है जिससे आपके सीटी स्कैन का सही रिजल्ट आ सके | पेट के सीटी स्कैन से पहले आप कंट्रास्ट पेय या विशेष पानी को पी सकते है जिसमे दवाई मिलायी गई होती है | कुछ परिस्थितियों में आपको सीटी स्कैन के लिए रेचक या एनिमा की जरूरत पड सकती है |
  • यदि आप किसी भी प्रकार की एलर्जी की समस्या से परेशान है , या आपने किसी बीमारी के कारण किसी भी हिस्से की सर्जरी करवाई है , या आप किसी बीमारी के कारण किसी दवाई का सेवन कर रहे है तो इस सबके बारे में अपने डॉक्टरको सीटी स्कैन के पहले ही बता देना चाहिए |
  • सीटी स्कैन करने की प्रक्रिया करने के सबसे पहले आपके पास से कोई भी चीज़ जो धातु से बनी हो जैसे रिंग, जंजीर , घडी मोबाइल और आपका चश्मा , पर्स आदि ले लिया जाता है और इस स्कैन की प्रक्रिया के दौरान आपको एक विशेष प्रकार की ड्रेस पहनने को दी जाती है | इस सबके बाद आपको सीटी स्कैन करने वाली मशीन की टेबल पर लेता दिया जाता है | फिर इस टेबल को सीटी स्कैन करने वाली मशीन के अन्दर ले जाया जाता है | सीटी स्कैन करने में ज्यादा से ज्यादा ३० से ६० मिनट का समय लगता है इस प्रक्रिया में आपको किसी भी प्रकार का दर्द नहीं होता है |

तो अब आपको हमारी इस पोस्ट को पूरा पड़ने के बाद आपके सारे सवालों के जबाब मिल गए होंगे की सीटी स्कैन क्या होता है , क्यों करवाया जाता है और यह कौन कौन से अंगो का होता है | यदि आपको हमारी यह आईटीआई स्कैन से सम्बंधित जानकारी पसंद आई हो तो शेयर करना ना भूलें और यदि आपका अभी भी इसके बारे में कोई सवाल बाकी रह गया हो या आप कोई सुझाव देना चाहते हो तो हमे नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके पूछ या बता सकते हैं |

डॉक्टर विक्रांत गौर

डॉक्टर विक्रांत गौर

(B.A.M.S.) रजिस्ट्रेशन न  - DBCP / A / 8062 पूर्व वरिष्ठ सलाहकार  जीवा आयुर्वेद दिल्ली ,  फरीदाबाद मेडिकल सेंटर ,पारख हॉस्पिटल फरीदाबाद में 5 साल का अनुभव  पाइल्स, हेयर फॉल, स्किन प्रॉब्लम, लिकोरिया रोगों  में एक्सपर्ट

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