कलर ब्लाइंडनेस या वर्णान्धता – Color Blindness Treatment In Hindi

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Color Blindness Treatment In Hindi

कलर ब्लाइंडनेस को वर्णान्धता के नाम से जाना जाता है | वर्णान्धता की वजह से हमें कलर पहचानने में दिक्कत आने लगती है | जैसे लाल, हरे, नीले राग को देखने में हमारी आँखों में दिक्कत महसूस होने लगती है | मोनोक्रोमसी की वजह से व्यक्ति पूरी तरह किसी भी रंग को पहचान नही पाता है | लेकिन वर्णान्धता में कुछ रंगों की पहचान कर पाता है | यह समस्या अक्सर 40 वर्ष की उम्र के बाद देखने को मिलती है | भारत में ही लगभग 7% पुरषों व 1% महिलायों को कलर ब्लाइंडनेस या वर्णान्धता की समस्या है | अनुवांशिक कारणों की वजह से भी इस समस्या का सामना करना पड़ता है | इसीलिए आज आपको हम इस समस्या के बारे में पूर्ण जानकारी देने जा रहे है | अब आइये जानते है | किस प्रकार हमारी आँखे काम करती है |

किस प्रकार पहचानती है रंगों को हमारी आँखे

हमारी आँखों की झिल्ली जिसको रेटिना के नाम से जाना जाता है | जो रॉड और कॉन्स कोशिकाओं से मिलाकर बनी होती है | इसका काम रंगों को हल्का व उत्तेजित करके देखना होता है | कॉन्स कोशिका तीन प्रकार की होती है |

  • एल-कॉन कोशिकाएं |
  • एम-कॉन कोशिकाएं |
  • एस-कॉन कोशिकाएं |

इन तीनो का काम अलग अलग होता है | रॉड और कॉन्स कोशिकाओं की मदद से हम किसी भी रंग को पहचान पाते है | इस समस्या का उपचार हम घर पर भी कर सकते है | अब आइये जानते है कलर ब्लाइंडनेस या वर्णान्धता होने के कारणों के बारे में

क्या कारण होते है कलर ब्लाइंडनेस या वर्णान्धता होने के ?

कलर ब्लाइंडनेस होने के कई कारण होते है | जिनकी वजह से हमारी आँखों को इस प्रकार की समस्या का सामना करना पड़ता है | आइये जानते है उन कारणों के बारे में

पारिवारिक विकार की समस्या की वजह से

कलर ब्लाइंडनेस की समस्या पारिवारिक विकार की वजह से भी जन्म लेती है | पारिवारिक विकार की वजह से पुरषों में अधिक ये समस्या देखने को मिलती है | पारिवारिक विकार की वजह से महिलाये कम ग्रस्त होती है | कभी कभी पारिवारिक विकार की वजह दोनों आँखों में कलर ब्लाइंडनेस की समस्या हो सकती है |

बीमारी की वजह से होती है वर्णान्धता की समस्या

यदि कोई व्यक्ति अधिक समय से किसी रोग से ग्रस्त है | तो उस रोग की वजह से भी वर्णान्धता यानि कलर ब्लाइंडनेस की समस्या आने लगती है | अगर आप भी एनीमिया, मैक्यूला, मधुमेह, अल्जाइमर , पार्किंसंस रोग व ल्यूकेमिया जैसे घातक रोग की वजह से हमारी आंखो की रोशनी पर असर पड़ता है | इन बीमारियों की वजह से आपको वर्णान्धता की समस्या हो सकती है |

गलत दवा के सेवन से आने लगती है वर्णान्धता की समस्या

अगर कोई व्यक्ति बिना डॉक्टर की सलह लिए बिना किसी भी दवा का सेवन करता है | तो इसका असर हमारी आँखों पर भी पड़ता है | कभी कभी ह्रदय व उच्च रक्तचाप से जुडी दवाओं का सेवन करने से भी आपको कलर ब्लाइंडनेस जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है |

अधिक उम्र की वजह से भी होती है कलर ब्लाइंडनेस की समस्या

जैसे जैसे व्यक्ति की उम्र बढती है | वैसे वैसे व्यक्ति को कई बीमारियोंं के साथ और भी कई समस्या का सामना करना पड़ सकता है | कलर ब्लाइंडनेस की समस्या अधिकतर अधिक उम्र के व्यक्तियोंमें ही देखने को मिलती है | क्यूकि उम्र बढ़ने के साथ साथ हमारी आँखों की रेटिना भी कमजोर होने लगती है | जिसकी वजह से हमारे शरीर को इस प्रकार की समस्या का सामना करना पड़ता है |

 कुछ प्रमुख लक्षण

  • कुछ रंगों को देखने में दिक्कत आना |
  • रंगों में फर्क ना कर पाना |
  • पढ़ने में कठिनाई का होना |
  • पलकों का गिर जाना |
  • एक प्रकार के रंगो को ही देख पाना |
  • कई रंग देखने में कठिनाई का होना |
  • देखने पर दोहरापन का आना |
  • आँख में दर्द का होना |
  • दृष्टि की कमज़ोर होना |
  • कुछ ही रंगों को पहचान पाना |

आदि लक्षण देखने को मिलते है | यदि हम इस समस्या का सही समय पर उपचार ना कराये तो इसकी वजह से आपकी आँखों में और भी कई रोग की समस्या हो सकती है |अब आइये जानते है कलर ब्लाइंडनेस के बचाव के बारे में

 बचाव का तरीका

अगर आपको कलर ब्लाइंडनेस की समस्या हो रही है | तो अपने आहार में कुछ बदलाव लाये | जैसे हरी सब्जी का सेवन उबालकर करे फलों का सेवन अधिक से अधिक करे | आपको जूस का सेवन भी अधिक से अधिक करना चाहिये | तनाव से दूर रहे | धम्रपान का सेवन ना करे | व समय समय पर डॉक्टर से जरुर मिले | इन सभी उपाय करके आप अपने शरीर को इस प्रकार की समस्या से अपने शरीर को दूर कर सकते है |

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