कोलोनोस्कोपी क्या है इस जाँच की कीमत

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Doctor vikrant

कोलोनोस्कोपी एक टेस्ट होता है | जिसका उपयोग  तब किया जाता है जब किसी व्यक्ति की आंत व गुदा में किसी प्रकार की कोई समस्या आ जाने की वजह से हमारे शरीर की असामान्यताओं का पता लगाने के लिए इस टेस्ट का प्रयोग किया जाता है | इस टेस्ट को करने के लिए व्यक्ति की आंत मे गुदा के माध्यम या रास्तें से एक लचीली नाली व ट्यूब जिसके अगले सिरे पर एक कैमरा लगा होता को डाला जाता है|

इस ट्यूब से समस्या का पता लगाने के लिए ट्यूब में लगे कैमरे की मदद से  स्क्रीन या मोनिटर मे देखकर पता चलता है | यदि हमारी आंत में कोई असाधारण मांस या उत्तक बढ़ा हुआ होता है | तो इस ट्यूब की मदद से डॉक्टर उस ऊतक या मांस हठाते है | व इसी ट्यूब की मदद से व्यक्ति के उत्तकों व आंत के सेंपल भी लिए जाते है | जिससे इसकी जाँच की जा सके | आब आइये जानते है कोलोनोस्कोपी क्यों की जाती है |

क्यों किया जाता है कोलोनोस्कोपी इलाज

कई जाँच करने के बाद डॉक्टर व्यक्ति को कोलोनोस्कोपी जाँच करवाने की सलाह देते है | जैसे

आंत से जुड़ी समस्या का पता लगाने के लिए की जाती है

यदि किसी व्यक्ति के नियमित पेट में दर्द व गुदा से खून आने की समस्या होती रहती है | या कब्ज व दस्त की समस्या से होती रहती है | तो इसी परेशानी का पता लगाने के लिए व्यक्ति की कोलोनोस्कोपी जाँच की जाती है |

कोलन कैंसर का पता लगाने के लिए भी करते है

यदि आपको नियमित पाचन से जुडी समस्या या फिर आपका स्वस्थ ठीक नही हो पा रहा है | तो इस समस्या का पता लगाने के लिए डॉक्टर इस जाँच की सलाह देते है | वैसे तो 50 वर्ष की उम्र के बाद वयक्ती को इस प्रकार की समस्या होती है | इसीलिए डॉक्टर हमेशा 50 वर्ष के व्यक्ति को ही इस जाँच की सलाह देते है |

पोलीप्स यानि आंत में बढ़ा हुआ मांस का पता लगाने के लिए की जाती है

यदि आपके कोलन यानि आपकी आंत का मांस किसी किसी कारणवश बढ़ जाये तो इसकी वजह से हमारे शरीर को कई प्रकार की समस्या होने लगती है | इसी परेशानी का पता लगाने के लिए डॉक्टर हमेशा कोलोनोस्कोपी की सलाह देते है | जिससे इस समस्या का उपचार किया जा सके |

कैसे की जाती है कोलोनोस्कोपी की तैयारी

कोलोनोस्कोपी की तैयारी कई भागों में की जाती है | तो आइये जानते है उन भागों के बारे में

सबसे पहले कोलोनोस्कोपी टेस्ट के लिए डॉक्टर व्यक्ति को बड़ी आंत को अच्छी तरह से साफ करने के लिये बोलते है | जिससे हमारी आंत में हुई परेशानी का ठीक रूप से पता चल सके | अब आइये जानते है कोलोनोस्कोपी की तैयारी के बारे में

टेस्ट से पहले डॉक्टर व्यक्ति को खास रूप के भोजन की सलाह देते है

कोलोनोस्कोपी की जाँच के लिए डॉक्टर हमेशा व्यक्ति को कठोर भोजन ना करने की सलाह देते है | इसकी जगह पर व्यक्ति को दूध, क्रीम व चाय की सलाह देते है | जिससे हमारी आंत बिलकुल साफ रह सके | कभी भी इस टेस्ट के पहले व्यक्ति को लाल रंग का कोई भी तरल पदार्थ नही लेना चाहिये | इससे टेस्ट करने में डॉक्टर को परेशानी हो सकती है | वैसे तो इस टेस्ट को खली पेट ही किया जाता है | लेकिन अगर व्यक्ति कई दिनों से सही भोजन नही कर पा रहा है | तो टेस्ट से 12 घंटे पहले इस प्रकार का तरल पदार्थ ले सकता है |

पेट साफ करने की दवा यानि लैक्सेटिवस का सेवन कराते है

यदि अपने टेस्ट से पहले किसी प्रकार का कठोर भोजन कर लिया है | तो आपके पेट को साफ करने के लिए डॉक्टर मरीज को लैक्सेटिवस नामक दवा का सेवन करते है | जिससे मरीज का पेट बिलकुल साफ़ हो जाता है | और टेस्ट करने में किसी भी प्रकार की कोई समस्या नही आती है |

एनिमा किट का इस्तेमाल करना पड़ता है |

कभी कभी डॉक्टर मरीज को एनिमा किट का प्रयोग करने का सुझाव भी देते है | जिससे मरीज के कोलन को खाली किया जा सके | एनिमा किट का इस्तेमाल टेस्ट करने के 12 घंटे पहले किया जाता है | जिससे टेस्ट के समय मरीज के पेट में किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत ना हो

  • टेस्ट से पहले खून का थक्का जमने से रोकने वाली दवा का भी प्रयोग होता है |
  • एस्पिरिन या वारफेरिन जैसी दवा का सेवन करना पड़ता है | जिससे मरीज का रक्त पतला हो सके |

क्या होता है कोलोनोस्कोपी टेस्ट के बाद

यदि किसी व्यक्ति का कोलोनोस्कोपी टेस्ट हुआ है | तो इसकी वजह से मरीज को पहली बार मल में थोडा रक्त आने की समस्या हो सकती है | इस रक्त से हमारे शरीर को किसी भी प्रकार का कोई नुकसान नही होता है | टेस्ट के बाद मरीज को पेट दर्द व बुखार की समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है | या फिर शरीर को थोड़ी कमजोरी का सामना भी करना पड़ सकता है | लेकिन एक या दो दिन बाद इस प्रकार की संभी समस्या पूरी तरह समाप्त हो जाती है | अगर व्यक्ति संतुलित भोजन व दवा का सही समय पर सेवन करे | तो कुछ ही दिनों में अपने शरीर को स्वस्थ बना सकता है |

कोलोनोस्कोपिक जाँच  के बाद रोगी के लिए दिशानिर्देश

  • मरीज को ३० मिनट तक खाली पेट रहना है उसके बाद वह लिक्विड डाइट या पेय पदार्थ ले सकता है उसके ३ घंटे बाद वह लो फाइबर डाइट ले सकता है |
  • दवाई डॉक्टर के दिशानिर्देश अनुसार
  • डॉक्टर  द्वारा निर्देश दिए जाने तक आप अपनी नियमित दवा को फिर से शुरू कर सकते हैं|

ध्यान रखे –

  • इस  प्रक्रिया या जाँच के बाद उस दिन किसी भी तरह की गाड़ी न चलये |
  • यदि आपको पेट में असहिनिए दर्द / पेट मे खिचाव / मल मे खून आ रहा हो या किसी भी तरह का परेशानी पैदा करने वाले लक्षण दिखाई दे तो आप आपने डॉक्टर को कॉल करे |

इस टेस्ट की हानियाँ

कोलोनोस्कोपी टेस्ट के बाद हमारे शरीर को किसी भी प्रकार का कोई नुकसान नही होता है | हो सकता है दवा की वजह से आपको एक दो दिन कमजोरी का सामना करना पड़े लेकिन उसके बाद हमारे शरीर को कोलोनोस्कोपी की वजह से किसी भी प्रकार की कोई समस्या नही होती है | आब आइये जानते है इससे जुड़े सवाल के बारे में |

 इससे जुड़े सवाल

कितनी लागत आती है कोलोनोस्कोपी टेस्ट में ?

कोलोनोस्कोपी टेस्ट करवाने में तक़रीबन तीन से चार लाख रूपए की लागत आती है |

कोलोनोस्कोपी टेस्ट के द्वारा किन किन बीमारी का पता लगा सकते है ?

कोलोनोस्कोपी टेस्ट की वजह हम पाने पेट व आंत से जुडी कई समस्या का पता लगा सकते है | कोलोनोस्कोपी टेस्ट के द्वारा हम पाने पाचन तंत्र से जुडी सभी समस्या के बारे में भी जान सकते है |

कोलोनोस्कोपी टेस्ट के दौरान अलसर को किस नाम से जानते है ?

कोलोनोस्कोपी टेस्ट के दौरान अल्सर को अल्सर के नाम से ही जाना जाता है | अल्सर यानी आंत में बढे हुए मांस के उपचार के लिए ही कोलोनोस्कोपी की जाती है

अगर कोलोनोस्कोपी की जगह एंडोस्कोपी करा सकते है ?

एंडोस्कोपी से सही उपचार ना होने की वजह से ही कोलोनोस्कोपी की जाती है | एंडोस्कोपी के बाद कोलोनोस्कोपी के द्वारा इलाज किया जाता है |

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