क्रोनिक किडनी डिजीज के कारण ,लक्षण व बचाव – Chronic Kidney Disease Treatment In Hindi

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क्रोनिक किडनी डिजीज

क्रोनिक किडनी डिजीज : जब हमारे गुर्दे की कार्य करने की क्षमता में कमी आ जाती है | यह समस्या लगातार कई वर्षो से शुरू हो जाती है | इस समस्या के अंत में हमारी किडनी पूर्ण रूप से कार्य करना बंद कर देती है | इस समस्या को कई नाम से जाना जाता है | जैसे

  • क्रोनिक किडनी फेल
  • क्रोनिक रीनल विफलता
  • क्रोनिक रीनल रोग
  • क्रोनिक किडनी विफलता

आदि के नाम से जाना जाता है | जब हमारी किडनी की कार्य करने की क्षमता में कमी आने लगती है | तब हमारे शरीर को कई प्रकार की समस्या का सामना करना पड़ता है | किडनी के कंजोर होने की वजह से हमारे शरीर में कई अपशिष्ट पदार्थों और तरल की मात्रा बहुत अधिक बढ़ जाती है |

जिससे हमारे शरीर को बहुत नुकसान होता है | भारत में ही लगभग हर साल तीस लाख लोग किडनी की बीमारी की वजह से अपनी जान से हांथ धो बैठते है | इस बीमारी शुरुआत में पता लगाना बहुत मुश्किल होता है | इसी लिए अज आपको इस बीमारी के बारे में पूर्ण जानकारी देने जा रहे है | तो आइये जानते है अब इसके चरण के बारे में |

जाने क्रोनिक किडनी डिजीज के कुछ मुख्य चरण के बारे में

क्रोनिक किडनी डिजीज को मुख्य पांच चरणों में बाँटा गया है |
इस बीमारी को जीएफआर के माध्यम से मापा जाता है | जिससे पता चलता है की हमारी किडनी की प्रकार कार्य कर रही है | तो आइये जानते है

  • प्रथम चरण – सामान्य या उच्च जीएफआर (जीएफआर > 90 एमएल /मिनट)
  • दितीय चरण – अल्प सीकेडी (जीएफआर = 60-89 एमएल / मिनट)
  • तीसरा चरण – मध्यम सीकेडी (जीएफआर = 45-59 एमएल / मिनट)
  • चौथा चरण – गंभीर सीकेडी (जीएफआर = 15-29 एमएल / मिनट)
  • पांचवा चरण – अंतिम चरण सीकेडी (जीएफआर <15 एमएल / मिनट)

अब आइये जानते है किडनी फेल होने के कुछ मुख्य कारणों के बारे में

जाने क्रोनिक किडनी डिजीज के कारणों के बारे में

क्रोनिक किडनी डिजीज कई कारणों की वजह से इसकी शुरुआत हो सकती है | तो आइये जानते है

मधुमेह की समस्या की वजह से हो सकती है समस्या – किडनी फेल होने के कारण में मधुमेह के प्रकार 1 और 2 से जोड़ा गया है | यदि रोगी का मधुमेह सही तरह से नियंत्रित नहीं है | तो इसकी वजह से हमारे शरीर में ग्लूकोज की अत्यधिक मात्रा जमा हो सकती है | जिससे किडनी पर भी असर पड़ता है |

उच्च रक्तचाप के कारण हो सकती है परेशानी – हमारे शरीर में होने वाला उच्च रक्तचाप गुर्दों में पाए जाने वाले ग्लोमेरुली भागों को नुकसान पहुँचा सकता है | ग्लोमेरुली का कार्य हमारे शरीर में उपस्थित अपशिष्ट पदार्थों को छानने में मदद करता है | उच्च रक्तचाप के कारण हमारे ग्लोमेरुली में समस्या आने लगती है | और इसी वजह से किडनी कमजोर होने लगती है |

बाधित मूत्र प्रवाह की समस्या के कारण – यदि आपके मूत्र प्रवाह को रोक दिया जाता है | तो वह मूत्राशय फिर से किडनी में जाकर जमा हो जाता है | रुका हुआ मूत्र हमारी किडनी पर दवाव बनता है | जिसके कारण हमारी किडनी के कार्य करने की क्षमता पर काफी असर पड़ता है | इसी समस्या के कारण हमारे शरीर को ट्यूमर व पथरी जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है |

गुर्दा रोग भी होती है वजह – यदि आपको पाइलोनेफ्रिटिस व ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस नामक बीमारी की समस्या है | तो इसकी वजह से आपकी किडनी पर बहुत बुरा असर पड़ता है | ये बीमारियाँ हमारी किडनी की कार्य करने की क्षमता पर बहुत बुरा असर डालती है | इन बीमारियोंं की वजह से भी कई बार किडनी फेल की समस्या होने लगती है |

  • गुर्दा धमनी स्टेनोसिस के कारण भी किडनी कमजोर होने लगती है |
  • भ्रूण के विकास सम्बन्धी समस्या भी हमारी किडनी को कमजोर बनाते है |
  • सिस्टमिक लुपस एरीथमैटोसिस जैसी बीमारी भी होती है किडनी के लिए हानिकारक
    मलेरिया और पीला बुखार के कारण भी हमारी किडनी में कमजोरी आ जाती है |
  • दवा का अधिक सेवन करने से हमारी किडनी की कार्य करने की क्षमता में कमी आती है |

कैसे दिखाई देते है इस बीमारी के लक्षण

  • शरीर में खून की कमी हो जाती है |
  • मूत्र में रक्त आने लगता है |
  • मूत्र का रंग गहरा होने लगता है |
  • मूत्र की मात्रा में कमी हो जाती है |
  • अधिक थकान महसूस होना |
  • उच्च रक्तचाप की समस्या का होना |
  • त्वचा में लगातार खुजली होना |
  • भूख कम लगना |
  • स्तंभन दोष की समस्या का होना |
  • जल्दी जल्दी पेशाब का आना |
  • मांसपेशियों में झनझनाहट का होना |
  • पीठ के मध्य से निचले हिस्से में दर्द का होना |
  • मूत्र में प्रोटीन का आना |
  • शरीर के वजन में अचानक बदलाव आना |

संतुलित आहार का सेवन करे

क्रोनिक किडनी डिजीज के खतरे को कम करने के के लिए हमें नियमित संतुलित भोजन का सेवन करना चाहिये | आपको नियमित व रोजाना विटामिन्स, फोलेट, नियासिन थाइमिन, राइबोफ़्लिविन, पैंटोथेनिक एसिड, तांबे, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, पोटेशियम, जस्ता, फास्फोरस और प्रोटीन युक्त भोजन का सेवन करना चाहिये | जिससे हमारी किडनी को सुचारू रूप से काम करने में मदद मिल सके | ये सभी तत्व आपको हरी सब्जियों व फलों में आसानी से मिल जायेंगे |

मछली का सेवन अधिक करे

मछली का सेवन भी हमारे शरीर के लिए काफी फायदेमंद साबित होता है | क्यूकि मछली में कई गुणकारी तत्व होते है | जैसे फोलिक एसिड की मात्रा के साथ साथ ओर भी कई गुणकारी तत्व होते है | जिससे हमारे शरीर को ऊर्जा के साथ साथ किडनी को मजबूती भी मिलती है | इसीलिए आपको अपने रोजाना के भोजन में मछली को ऐड करना चाहिये | जिससे आपकी किडनी की इस समस्या को पूरी तरह से खत्म किया जा सके |

मधुमेह व रक्तचाप का पूर्ण उपचार करवाये

यदि आपको मधुमेह व उच्च रक्तचाप की समस्या है | तो आपको अपनी इस समस्या का उपचार समय रहते करवा लेना चाहिये | जिससे आपकी किडनी को किसी भी प्रकार का कोई नुकसान ना हो सके | मधुमेह और उच्च रक्तचाप के कारण हमारी किडनी पर बहुत बुरा असर पड़ता है | समय पर इन बीमारियों का इलाज ना करने की वजह से हमारी किडनी की कार्य करने की क्षमता पर असर पड़ने लगता है |

नियमित योगा व वयायाम को अपनी दिनचर्या में लाये

यदि आप क्रोनिक किडनी डिजीज से बचना चाहते है | तो आपको अपनी इस समस्या के उपचार के लिए योगा व वयायाम करना चाहिये योगा व वयायाम करने से हमारे शरीर में किसी भी प्रकार का कोई हानिकारक प्रदार्थ जमा नही हो पाता है जिससे हमारी किडनी पर किसी भी प्रकार का कोई असर नही पड़ता है |

हानिकारक पदार्थों के सेवन से बचे

यदि आप रोजाना के जीवन में शराब और ड्रग्स के साथ साथ बहार के भोजन का अधिक सेवन करते है | तो इसकी वजह से आपकी किडनी पर बहुत बुरा असर पड़ता है | आपको लीड जैसी भारी धातुओं के साथ अधिक समय तक संपर्क में आने से बचें | व साथ ही साथ ईंधन, सॉल्वेंट्स और अन्य विषैले रसायनों से अपने आपको बचाकर रखें | जिससे आपकी किडनी स्वस्थ बनी रह सके |

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