स्तन कैंसर का कारण और इलाज – Breast Cancer Treatment In Hindi

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स्तन कैंसर का इलाज

स्तन कैंसर महिला मै ३५ साल के बाद स्तन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है  जब हमारे शरीर की कोशिकाओं के विकास को नियंत्रित करने वाले जीन्स में म्यूटेशन होना शुरू हो जाता है | ता हमारे शरीर में कैंसर जन्म लेना शुरू कर देता है | म्यूटेशंस की वजह से ही हमारी कोशिकाएं अनियंत्रित और अवयवस्थात्मक रूप से विभाजित होना शुरू कर देती है | इसके बाद कोशिकाएं गुणा करती जाती हैं | जिससे स्वस्थ कोशिकाओं की बजाय असामान्य कोशिकाएं विकसित होना शुरू हो जाती है |

विषय सूची

कैसे और क्यों होता है स्तन कैंसर Breast Cancer In Hindi

इससे ही अधिकतर स्थितियों में ट्यूमर की समस्या होना शुरू हो जाती है | लेकिन स्तन कैंसर स्तन कोशिकाओं में विकसित होता है | वैसे कैंसर स्तन के लोब्यूल्स या डक्ट्स में बनता है | ये वो ग्रंथियां है जिसमे महिला का दूध बनता है | और जो दूध को ग्रन्थियों से निप्पल्स तक पहुँचने का मार्ग प्रदान करती हैं | भारत में ही स्तन कैंसर से ग्रस्त होने वाली महिलायों का आकडा 18.2% है | भारत के ज़्यादातर शहरों में ब्रेस्ट कैंसर सबसे आम प्रकार का कैंसर माना जाता है | इन शहरों में, महिलाओं को होने वाले कैंसरों में 25% से 32% केस स्तन कैंसर के ही होते है | अब आइये जानते है स्तन कैंसर के प्रकार के बारे में |

स्तन कैंसर के प्रकार : types of Breast Cancer In Hindi

महिला में स्तन कैंसर के कई प्रकार होते हैं |

  • डक्टल कार्सिनोमा इन सीटू |
  • लोब्यूलर कार्सिनोमा इन सीटू |
  • इनवेसिव डक्टल कार्सिनोमा |
  • इनवेसिव लोब्यूलर कार्सिनोमा |
  • इंफ्लेमेटरी ब्रेस्ट कैंसर |
  • ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर |
  • निप्पल का पेजेट रोग |
  • फिलोड्स ट्यूमर |
  • वाहिकासार्कोमा |

अब आइये जानते है स्तन कैंसर के चरण के बारे में की किन चरणों में ये हमारे शरीर को प्रभावितकरता है | और किस प्रकार हमारे शरीर में फैलता है |

इस बीमारी के चरण

स्तन कैंसर की गंभीरता के मुताबिक हम उसे स्टेजिज़ में बांट सकते है |

स्टेज शून्य – इस स्टेज में केवल स्तन कैंसर डक्टल कार्सिनोमा इन सीटू की समस्या होती है | यह एक प्रकार की कैंसर से पूर्व होने वाली उत्पत्ति है | डक्टल कार्सिनोमा इन सीटू में कैंसर कोशिकायें स्तन के डक्ट्स में ही रहती हैं | लेकिन हमारे ऊतकों तक नहीं पहुच पाती है |

स्टेज प्रथम – स्टेज 1 ट्यूमर्स का आकार 2 सेंटीमीटर तक फ़ैल जाता है | लेकिन इस स्टेज के कैंसर में भी में लिम्फ नोड्स प्रभावित नहीं होते है |

स्टेज दूसरी – इस स्टेज के स्तन कैंसर दो प्रकार में विभाजित हो सकता है | पहले प्रकार में ट्यूमर का आकार 2 cm से बड़ा नहीं होता लेकिन कैंसर लिम्फ नोड्स तक फ़ैल जाता है | दुसरे प्रकार में, ट्यूमर का आकार 2 से 5 cm के बीच फ़ैल जाता है | लेकिन इस स्टेज में भी कैंसर लिम्फ नोड्स या आसपास के ऊतकों तक नहीं फैल पाता है |

स्टेज तीन – इस स्टेज में भी हमारा शरीर कई प्रकार के कैंसर से प्रभावित हो सकता है | इस स्टेज में कैंसर आसपास के ऊतकों या लिम्फ नोड्स तक फ़ैल जाता है | या फिर ये हो सकता है | कैंसर छाती या त्वचा तक फैला हो लेकिन लिम्फ नोड्स तक नहीं |

स्टेज चार – इस स्टेज में ट्यूमर का आकार किसी भी प्रकार में हो सकता है |और ट्यूमर के पास और दूर दोनों तरह के लिम्फ नोड्स तक भी फ़ैल चुका होता है |

इस रोग के कारण Causes of Breast Cancer In Hindi

स्तन कैंसर के कई निम्नलिखित कारण माने जाते है |

उम्र बढ़ना या वृद्ध होना भी कारण हो सकता स्तन कैंसर का

महिला की उम्र बढ़ाने के साथ साथ स्तन कैंसर होने का खतरा भी बढ़ता जाता है | क्यूकि महिलाओं में पाए जाने वाला स्तन कैंसर 90% से अधिक स्थितियों में 50 से ज़्यादा उम्र की महिलाओं में ही होता है | इसीलिए अधिक उम्र की महिलायों को इस प्रकार की समस्या से बचने के लिए अपना खास ख्याल रखना चाहिये |

आनुवंशिक कारण की वजह से भी हो सकती है समस्या

अगर महिला के परिवार में किसी को स्तन कैंसर की समस्या है | तो इसकी वजह से हमारे शरीर को भी इस प्रकार की समस्या का सामना करना पड़ सकता है | ये समस्या अनुवांशिक वजह से अधिक होती है | वैसे अधिकतर देखा जाता है यह  कैंसर आनुवंशिक नहीं पाए जाते है | जिन महिलाओं में BRCA1 और BRCA2 जीन्स होते हैं उनमें स्तन कैंसर होने का खतरा अधिक होता है | ये जीन्स अनुवांशिक भी हो सकते है | TP53 अन्य जीन है जिससे स्तन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है |

वक़्त से पहले मासिक धर्म की समस्या होने वाली महिलायों को

जिन महिलाओं में 12 की उम्र से पहले मासिक धर्म शुरू हो जाते हैं | उन महिलायों को स्तन कैंसर होने का खतरा अधिक हो जाता है | इसीलिए अगर आपको भी इस प्रकार कोई समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से मिले

स्तन पर गाँठ होना भी स्तन कैंसर की वजह होती है

जिन महिलाओं के स्तन में कभी गाँठ की समस्या रह चुकी हो उन महिलाओं को इस कैंसर होने का खतरा अधिक से अधिक रहता है |

देरी से गर्भवती होना या गर्भवती न होने की वजह से

अगर कोई महिला तीस साल की उम्र के बाद गर्भधारण करती है | या फिर जिन महिलाओं को गर्भधारण करने में सफल नही हो पा रही है | उन महिलायों को इस प्रकार का खतरा बन रहता है |

शारीरिक रूप से सक्रिय न होने की वजह से

जो महिलाएं ज़्यादा शारीरिक गतिविधियां नहीं करतीं उनमें स्तन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है |

मोटापा की वजह से भी होता है इस कैंसर का खतरा

अधिक मोटापा भी महिला के शरीर के लिए काफी हानिकारक साबित होता है | एक अध्यन में बताया गया है | की जिन महिलाओं का वजन अधिक होता है उन महिलायों को  इसका खतरा अधिक रहता है |

गर्भ-निरोधक दवा का सेवन करने से

यदि कोई महिला अधिक गर्भ-निरोधक दवा का सेवन करती है | तो उस महिला को इस कैंसर होने का खतरा ओर भी बढ़ जाता है |

मदिरा और धूम्रपान का सेवन करने से

यदि कोई महिला अधिक मदिरा और धूम्रपान का सेवन करती है | तो उस महिला को भी स्तन कैंसर जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है |

इस रोग के लक्षण

  • गाँठ या ऊतकों का मोटा होना महसूस होना |
  • पूरे स्तन पर त्वच पर गुठलियाँ बनना या त्वचा का लाल हो जाना |
  • पूरे स्तन या स्तन के कुछ हिस्से में सूजन |
  • निप्पल्स से स्तन के दूध के अलावा किसी और द्रव का स्त्राव |
  • निप्पल्स से खून निकलना |
  • निप्पल्स या स्तन की त्वचा का छीलना |
  • स्तन के आकार में अचानक और अस्पष्टीकृत परिवर्तन होना |
  • स्तन की त्वचा में परिवर्तन |
  • बांह में सूजन या गाँठ बनना |
  • निप्पल्स का बाहर की तरफ न होकर अंदर की तरफ होना |

आदि लक्षण महिला के शरीर पर देखने को मिलते है | वैसे तो स्तन कैंसर शुरूआती स्टेज पर स्तन कैंसर के कोई लक्षण नहीं पाए जाते है | क्यूकि इस समय ट्यूमर का आकर बहुत छोटा होता है | हालांकि अगर मैमोग्राम के द्वारा हम इस परेशानी का पता लगा सकते है | ट्यूमर होने का पहला संकेत अक्सर स्तन पर होने वाली गांठ ही होती है | अगर आपको अपने स्तनों में दर्द भी महशुश हो रहा हो तब भी आपको डॉक्टर से सलाह लेने की जरूरत है | क्यूकि स्तन में दर्द का होना भी इसका ही लक्षण माना जाता है |

इस बीमारी का इलाज कैसे करवाये

स्तन कैंसर का उपचार स्टेज के माध्यम से होता है | जैसे की कैंसर की स्टेज पर है | और कितना फैला हुआ है | क्यूकि स्टेज के जरिये ही स्तन कैंसर का इलाज संभव है | तो आइये जानते है | किस प्रकार हम इसका उपचार करवाये |

सर्जरी द्वारा करवाये उपचार

स्तन कैंसर को हटाने के लिए कई प्रकार की सर्जरी की जाती हैं आइये जानते है इन सर्जरी के बारे में |

लम्पेक्टॉमी सर्जरी – लम्पेक्टॉमी द्वारा संदिग्ध या कैंसरग्रस्त भाग हमारे शरीर से निकल दिया जाता है | ओर उसके आसपास के उत्तको को उनकी जगह पर ही रहने दिया जाता है |

मास्टेक्टॉमी सर्जरी – मास्टेक्टॉमी सर्जरी के द्वारा सर्जन पूरा स्तन निकाल देते हैं। डबल मास्टेक्टॉमी के द्वारा महिला के दोनों स्तनों को निकल दिया जाता है |

सेंटिनल नोड बायोप्सी सर्जरी – इस सर्जरी द्वारा कुछ लिम्फ नोड्स को निकाला जाता है | जिससे लिम्फ नोड्स की जांच की जाएगी और अगर वे कैंसरग्रस्त नहीं हैं | तो ऐसा भी हो सकता है | कि आपको लिम्फ हटाने के लिए अतिरिक्त सर्जरी की ज़रुरत न पड़े |

कांख-संबंधी लिम्फ नोड सर्जरी – अगर सेंटिनल नोड बायोप्सी टेस्ट के परिणाम पॉज़िटिव आये तो, इस प्रक्रिया को करने की आवश्यकता हो सकती है |

कॉन्ट्रालेटरल रोगनिरोधी मास्टेक्टॉमी – भले ही स्तन कैंसर सिर्फ एक स्तन में हो, लेकिन कुछ महिलाएं कॉन्ट्रालेटरल रोगनिरोधी मास्टेक्टॉमी करवाने का निर्णय भी लेती हैं | इस सर्जरी में स्वस्थ स्तन को भी निकाल दिया जाता है | जिससे दोबारा से स्तन कैंसर होने का खतरा नही रहता है |

बचने के लिए परहेज़ करे

  • कम से कम जंक फ़ूड खाएं |
  • मदिरा का सेवन न करें |
  • धूम्रपान न करें |
  • आलसी न बनें |
  • हलके-फुल्के वयायाम करते रहे |
  • चिंता न करें और नकारात्मकता से दूर रहें |
  • स्वस्थ आहार का सेवन करे |
  • नियमित योगा करे |

और पढ़े – जाने ब्रेन ट्यूमर के कारण व लक्षण – Brain-Tumor In Hindi

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