ब्लड इन्फेक्शन को सेप्सिस भी कहा जाता है| ये किसी संक्रमण के कारण होने वाली बहुत ही ज्यादा हानिकारक बीमारी है सेप्सिस तब होता है जब संक्रमण से निजात पाने के लिए रक्त में घुलने वाले केमिकल्स हमारे शरीर में जलन और सूजन फ़ैलाने लगते है |

इसके चलते शरीर में कई सारे  बदलाव आने लगते है और यह हमारे शरीर के अंगो को भी नुकसान पहुचता है वो अंग काम करना भी बंद कर सकते है | सेप्सिस अगर सेप्टिक का रूप ले लेता है तो हमारे सभी अंग काम करना बंद कर देते है और साथ ही साथ हमारा रक्तचाप जल्दी जल्दी घटने लगता है और हमारी मौत भी हो सकती है |

सेप्सिस किसी को भी हो सकता है लेकिन ये वृद्ध लोगो और जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर उनको होता है ज्यादातर सेप्सिस के शुरूआती दिनों में मरीज को एंटीबायोटिक के साथ साथ तरल पदाथ भी दिए जाते है जिससे उसकी डेथ के चांसेस कम हो जाए |

Blood infection Treatment In Hindi

Blood infection  या सेप्सिस एक इमरजेंसी है खासकर तब जब संक्रमण तेजी से फ़ैल रहा हो तब , सेप्सिस का अपना कोई लक्षण नहीं होता है बल्कि इसमें लक्षणों का संयोजन होता | अगर आपको लगता है आपको किसी तरह का संक्रमण हो सकता है और आपको ब्लड इन्फेक्शन या सेप्सिस की शिकायत हो सकती है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाए |

जानिये ब्लड इन्फेक्शन के कारण के बारे मे 

सामान्य तौर पर शरीर की प्रतिरक्षा कोशिकाए शरीर पर आक्रमण करने वाले बाहरी विषाणु से हमारी रक्षा करती है लेकिन सेप्सिस के कारण किसी भी एक कारण से प्रतिरक्षा प्रणाली खराब हो जाती है |

  • अंडररिएक्शन
  • ओवररिएक्शन

सेप्सिस के लिए सबसे ज्यादा दोषी बैक्टीरियल संक्रमण को ही माना जाता है लेकिन सेप्सिस किसी भी सक्रमण से हो सकता है ये शरीर में कहीं भी हो सकता है और एक खरोंच से फ़ैल भी सकता है |जिनको निमोनिया , मूत्र मार्ग में संक्रमण की प्रॉब्लम है उन्हें खासकर ये प्रॉब्लम हो सकती है|

सेप्सिस किसी को भी हो सकता है पर कुछ ऐसे लोगो के समूह होते है जिन्हें सेप्सिस होने के खतरा सबसे ज्यादा रहता है |

  • छोटे बच्चे
  • वृद्ध लोग
  • शुगर के मरीज़ को
  • वो लोग जिन्हें HIV या कैंसर की बीमारी हो
  • जिनकी थोड़े दिन पहले कोई सर्जरी हुई हो

सेप्सिस होने पर दिखाई देते है शरीर में ये लक्षण 

सेप्सिस को तीन स्तरीय सिंड्रोम में बाटा जाता है पहला सेप्सिस की शुरआत , दूसरा  गंभीर सेप्सिस , और तीसरा सेप्टिक शोक की स्थिति | सेप्सिस का इलाज इसके गंभीर होने से पहले ही स्टार्ट करना होता है |

सेप्सिस-

सेप्सिस के लिए मरीज में ये दो लक्षण देखने बहुत जरुरी होते है |

  • सांस लेने की डर एक मिनट में 20 से ज्यादा होना
  • सक्रमण की संभावना होना
  • शरीर का तापमान 96.8 से नीचे या 101 F से ऊपर होना
  • दिल की धड़कन की डर एक मिनट में 90 से ज्यादा होना|

गंभीर सेप्सिस के लक्षण 

गंभीर सेप्सिस का संकेत इन लक्षणों से मिलता है |

  • सांस लेने में कठिनाई
  • मानसिक स्थिति में अचानक बदलाव
  • दिल द्वारा असामान्य रूप से पम्पिंग करना
  • पेट में दर्द
  • मूत्र कम होना
  • प्लेटलेट की संख्या घटना

सेप्टिक शोक

इस स्थिति का निदान भी गंभीर सेप्सिस के लक्षण और संकेतो के अनुसार ही किया जाता है |ऐसे में ब्लड प्रेशर कम हो जाता है|

इसका खतरा कब ज्यादा होता है

  • अगर उम्र 5 से कम और 55 से अधिक हो तो इसका खतरा ज्यादा होता है |
  • तुरंत सर्जरी या चोट लगने से 
  • डायबिटीज या शुगर के मरीज़ को 
  • एड्स और कैंसर में 
  • प्रतिरोधक क्षमता को कम करने वाली दवाईयों के सेवन से जैसे स्टेरॉयड आदि के सेवन से 

 

डॉक्टर को कब दिखाए 

सेप्सिस ज्यादातर अस्पताल में भर्ती लोगो को ही होता है |और जो लोग ICU में होता है उनको ज्यादा खतरा होता है अगर आपको किसी प्रकार का संक्रमण हो गया है या आपको किसी सर्जरी के बाद पता चले की आपको सेप्सिस के लक्षण दिखाई दे रहे है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाये |

 

ब्लड इन्फेक्शन का परीक्षण –

सेप्सिस का पता कई टेस्ट्स से लगाया जाता है |

  • इमेजिंग टेस्ट-यदि संक्रमण की जगह स्पष्ट नहीं है तो ये टेस्ट होता है |
  • एक्स –रे
  • एम आर आई
  • सी टी स्कैन
  • अल्ट्रासाउंड
  • ब्लड टेस्ट – खून का सैंपल निम्न अंगो की जांचो के लिए किया जाता है
  • लीवर और गुर्दे के कार्यो में असामान्यता की जांच के लिए
  • क्लोतिंग की समस्या का पता लगाने के लिए
  • संक्रमण के सबूत का पता लगाने के लिए
  • पूरी तरह से ऑक्सीजन मिलने में समस्या की जांच के लिए
  • इलेक्ट्रोलाइट्स असंतुलन के लिए
  • अन्य टेस्ट- मरीज के लक्षणों के अनुसार डॉक्टर खून के अलावा और भी टेस्ट बोल सकता है |
  • घाव से निकलने वाले द्रव – अगर शरीर पर कोई घाव है जो संक्रमित प्रतीत हो रहा है तो ऐसे में डॉक्टर उसमे से द्रव का नमूना लेकर टेस्ट कर सकते है |
  • मूत्र
  • श्वसन तंत्र से निकलने वाले द्रव

ब्लड इन्फेक्शन से होने वाले जोखिम

ब्लड इन्फेक्शन से अलग अलग तरह की दिक्कते होती है|

इन्हें कम से ज्यादा के स्तर में तौला जा सकता है |रोग की स्थिति गंभीर होने पर कई शारीरिक अंगो में खून के बहाव की प्रक्रिया खराब हो जाती है |सेप्सिस के कारण हाथ पैरो की उंगलियों और अंदुरनी अंगो पर ब्लड के थक्के बन जाते है |ज्यादतर लोग सेप्सिस की शुरआत में ठीक हो जाते है पर सेप्टिक शोक में तो कम ही लोग बच पाते है |

ब्लड इन्फेक्शन का सरल उपचार

सेप्सिस में तत्काल उपचार ही ठीक रहता है |जिनको गंभीर सेप्सिस हो जाता है उन्हें तो श्वास और हर्दय दोनों के लिए जीवन रक्षण यंत्रो की जरुरत पड़ती है |

अगर आपको सेप्सिस है तो डॉक्टर आपको हॉस्पिटल के ICU में  भर्ती कर सकते है | वहां पर संक्रमण रोकने की कोशिश की जाती है |और साथ ही साथ शरीर के महतवपूर्ण अंगो के कार्यो और ब्लड प्रेशर की नियमित रूप से जांच की जाती है | साथ ही साथ तरल पदाथ और अतिरिकित ऑक्सीजन भी दी जाती है |

जब डॉक्टर सेप्सिस के कारण का पता लगा लेते है तो वो मरीज को वही दवा देते है जिससे रोग के जीवाणु को ख़तम कर सके |अगर सेप्सिस का मामले गंभीर है तो मरीज को अन्य प्रकार के उपचारों की जरुरत पड़ सकती है जैसे सांस लेने की मशीन , या किडनी डायलिसिस आदि | संक्रमण को बाहर निकालने के लिए या नष्ट करने के लिए कई बार सर्जरी की भी जरुरत पड़ सकती है|

 

डॉक्टर विक्रांत गौर

डॉक्टर विक्रांत गौर

(B.A.M.S.) रजिस्ट्रेशन न  - DBCP / A / 8062 पूर्व वरिष्ठ सलाहकार  जीवा आयुर्वेद दिल्ली ,  फरीदाबाद मेडिकल सेंटर ,पारख हॉस्पिटल फरीदाबाद में 5 साल का अनुभव  पाइल्स, हेयर फॉल, स्किन प्रॉब्लम, लिकोरिया रोगों  में एक्सपर्ट

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