आँखों के लेंस के फायदे व नुकसान

कांटेक्ट लेंस या फिर इसको आंखों का लेंस एक बहुत ही हल्का व नर्म कॉस्मेटिक उपकरण होता है | जो हमारी आंखो की कॉर्निया पर पहना जाता है | इनका काम भी हमारे चश्मे की तरह होता है | अगर किसी मनुष्य को चश्मे अच्छे नही लगते है | तो वो मनुष्य इन लेंशो का प्रयोग करके अपनी समस्या को जड़ से दूर कर सकता है | अगर किसी व्यक्ति को दूर दृष्टि दोष या निकट दृष्टि दोष की समस्या से परेशान है | तो भी इनका प्रयोग करके अपनी इस समस्या को खत्म कर सकता है | आज कल चश्मे से अधिक लेंशो प्रयोग किया जाता है | इन लेंशो को थोडा हल्का व रंगीन बनाया जाता जिससे हमिनको अच्छी तरह सभाल के रख सके | ये लेंश दो प्रकार के होते है

  1. कठोर कांटेक्ट लेंस
  2. मुलायम कांटेक्ट लेंस

आज के इस जीवन में कांटेक्ट लेंस पहनना बहुत ही आम हो गया है | रंगीन कांटेक्ट लेंस हमारी आंखों के रंग को पूरी तरह बदल के रख देते है | कॉस्ट्यूम कांटेक्ट लेंस तो कुछ स्पेशल इफ़ेक्ट पैदा करने में मदद करते है | अब आइये जानते है इनके प्रकार के बारे में |

जानिये आंखों के लेंस के प्रकार के बारे में

आंखों के लेंस को तीन भागो में बंटा गया है |

सॉफ्ट कांटेक्ट लेंस – सॉफ्ट कांटेक्ट लेंस पूरी दुनिया में सबसे अधिक प्रयोग किये जाने वाले लेंस होते है | ये लेंस त्याधुनिक ऑप्टिकल प्रौद्योगिकी से बनाये जाते है | इसी कारण ये लेंस काफी आरामदायक, लचीले और लंबे समय तक पहने जा सके | इन लेंसों में भी कई प्रकार आते है | जैसे

एक्सटेंडेड वियर लेंस – एक्सटेंडेड वियर लेंस तकनीक के सबसे आधुनिक प्रयोग होता है | ये लेंस ह्यड्रोजेल से बनाये जाते है | ये लेंस अधिक आरामदायक होते हैं और लंबे समय तक पहने जा सकते हैं | क्यूकि इसके पहनने के बाद आंखों को ऑक्सीजन लेने में परेशानी नही होती है |

डेली डिस्पोजेबल लेंस – डेली डिस्पोजेबल लेंस का प्रयोग केवल एक बार ही किया जा सकता है | उसके बाद ये उपयोग करने लायक नही होते है |

टू वीकली डिस्पोजेबल लेंस – टू वीकली डिस्पोजेबल नाम से पता चलता है | की इन लेंशो को हम केवल एक हफ्ते या उससे अधिक दो हफ्ते तक ही यूज़ कर सकते है |

मंथली डिस्पोजेबल लेंस – मंथली डिस्पोजेबल लेंस को हम केवल एक महीने तक ही यूज़ कर सकते है | उसके बाद हमें इन लेंसों को फकना पड़ता है |

गैस परमेयबल कॉन्टेक्ट लेंस – गैस परमेयबल कॉन्टेक्ट लेंस को हार्ड लेंस भी कहा जाता है | इन लेंसों में पानी की मात्रा बिलकुल भी नही होती है | इसीलिए ये हमारी आँखों के लिए आरामदायक होते है | इन लेंसों को हम लम्बे समय तक के लिए प्रयोग में ला सकते है |

रंगीन कांटेक्ट लेंस – रंगीन लेंस सॉफ्ट लेंस होते हैं | जिसको हम रोज या फिर एक महीने के बाद बदल देते है | इन लेंसों के कारण आपकी आंखो का रंग बदल जाता है | ये लेंस का प्रयोग कोई भी व्यक्ति कर सकता है |

किस प्रकार करे आंख लेंस का प्रयोग

आंख मे लेंस पहनने और निकालने के लिए निम्नलिखित बातों का पालन करना चाहिये |
पहनने के लिए रखे हमेशा इन बातों का ध्यान

  • लेंस से गंदगी को हटाने के लिए लेंस को सॉल्यूशन में धो लें |
  • लेंस के मिक्स होने से बचने के लिए हमेशा पहले अपनी सीधी आंख में लेंस पहने |
  • अब लेंस को अपनी अंगुली के ऊपर रखें |
  • अपने दूसरे हाथ से आंख की पलकों को पकड़ कर रखे ताकि आपकी आंख खुली रहे |
  • अपने लेंस वाले हाथ की खाली अंगुली से निचली पलक को थोड़ा नीचे खींचें |
  • ऊपर देखते हुए लेंस को अंगुली से अपनी आंख की पुतली के नीचे रखें |
  • अब धीरे-धीरे अपने हाथ को पलकों से हटा कर आंख को एक क्षण के लिए बंद कर लें |
  • आंख सामान्य रूप से झपकाए जिससे लेंस पुतली पर खिसक जाए |

लेंस उतारने के लिए ज़रूरी बातें

सबसे पहले अपने हाथ को अच्छी तरह से साबुन से धूल ले | व उसके बाद सुखा ले फिर उपर की ओर देखते हुये | अपनी आँख की निचली पलक को निचे खीचे | फिर अपनी अंगुली से लेंस की नीचे वाली साथ को छुए | व अपनी आँख के नीचे की ओर खिसकाये | फिर अपने अंगूठे और अंगुली पकड़ कर लेंस को बाहर निकाल लें |

आंख मे लेंस के फायदे

  • कम प्रकाश में भी साफ़ देख सकते है |
  • चश्मे के साथ होने वाली रिफ्लेक्शन और गड़बड़ लेंस के साथ नहीं होती |
  • आंख के अंदर होने के कारण वे आपको साफ देखने में मदद मदद मिलती है |
  • किसी गर्म जगह पर चश्मे की तरह इस पर भाप की समस्या नही आती है |
  • लेंस अधिक हल्के और कम बाधा पहुँचाने वाले होते हैं |
  • उनके गिरने और टूटने का डर भी नहीं रहता |
  • लेंस की वजह से हमें खेलने में भी कोई परेशानी नहीं होती |
  • एक बार आंख में लगाने के बाद आपको उनके खो जाने का डर नहीं रहता |
  • इसके प्रयोग से आपको प्राकृतिक लुक मिलता है |
  • आप नई फैशन के बिना नंबर वाले सन ग्लास पहन सकते हैं |

जाने कांटेक्ट लेंस के नुकसान

  • आंखों में दर्द का होना
  • धुंधला दिखाई देना |
  • प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता होना |
  • आँखों का लाल हो जाना |
  • अधिक आंसू का निकलना |
  • आंख के आसपास की रक्त वाहिकाओं में सूजन आना |
  • आंख में अल्सर की समस्या का होना |

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मानवेन्द्र सिंह

मानवेन्द्र सिंह

मानवेंद्र सिंह सॉफ्ट प्रमोशन टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड में फिटनेस और हेल्थ ब्लॉगर हैं। उन्होंने 2006 में BHM स्नातक की डिग्री ली है। उन्हें स्वास्थ्य एवं विज्ञान अनुसंधान के क्षेत्र में लेखन का आनंद मिलता है।

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