बेरिएट्रिक सर्जरी

बेरिएट्रिक सर्जरी (Bariatric or Weight loss Surgery in Hindi ) सहारा की जरूरत तब पड़ती है जब शरीर में असामान्य रूप से अत्यधिक मात्रा में वसा (फैट) का जम जाना ही मोटापा (ओबेसिटी) है। जब कोई व्यक्ति काम के लिए खर्च हुए कैलोरी से अधिक मात्रा में कैलोरी आपने खाने में लेता है तो यह अधिक कैलोरी धीरे – धीरे शरीर में वसा के रूप में जमा होने लगता है। इस कारण ही व्यक्ति मोटापे का शिकार हो जाता है। 

मोटापे का आकलन करने के लिए आईबीएम (IBM) (बॉडी मास इंडेक्स) तकनीक का उपयोग किया जाता है। इस तकनीक के द्वारा व्यक्ति की लंबाई तथा वजन के हिसाब से मोटापे का अनुपात निकाला जाता है। मोटापे को बताने के लिए आईबीएम तकनीक बिल्कुल सटीक है। यह पुरूष एंव महिलाओं, दोनो के लिए ही समान रूप से लागू होता है। इसके अलावा इसकी सहायता से बच्चे तथा सभी उम्र के वयस्क का मोटापा जांचा जा सकता है। जब आईबीएम 30 से अधिक आता है तो उस व्यक्ति को मोटापा की श्रेणी में रखा जाता है।

  •  अगर किसी व्यक्ति का आईबीएम 19.0 से 22.9 है तो वह बिल्कुल सामान्य है। 
  •  23.0 से 27.9 आईबीएम वाले व्यक्ति को अधिक वजन वाला माना जाता है। 
  •  28.0 से 32.4 आईबीएम वाले व्यक्ति मोटे की श्रेणी में आते हैं। 
  •  32.5 से 37.5 आईबीएम वाले व्यक्ति को काफी अधिक मोटे व्यक्ति की श्रेणी में रखा जाता है। 
  •  37.5 से अधिक आईबीएम की स्तिथि में व्यक्ति काफी मोटा होता है। इस स्तिथि में व्यक्ति कई अलग अलग बीमारियों का शिकार हो सकता है। उसे कई अन्य समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है। 
  •  50 से अधिक आईबीएम वाले व्यक्ति मोटापे के अंतिम श्रेणी के तहत आते हैं। यह बेहद ही खतरनाक स्तिथि है। 

मोटापे का कारण

मोटापे के कई कारण हैं। इनमें से कुछ प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं। 

  जेनेटिक कारण

आपका जीन (Genes) मोटापे में बड़ी भूमिका निभा सकता है। शरीर में जमा हुए फैट तथा उसके कैलोरी के रूप में खर्च को जीन बड़े स्तर पर प्रभावित कर सकता है। जीन इसमें भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है कि आपका शरीर किस तरह से भोजन को ऊर्जा में बदलता है तथा व्यायाम या सामान्य कार्य के दौरान कितनी कैलोरी जलता है। 

शारिरिक निष्क्रियता

अगर आप किसी तरह का कार्य या व्यायाम नही करते हैं, तो इस स्तिथि में शरीर में फैट के जमने की आधी संभावना है। 

नींद की कमी

आपके वजन को बढ़ाने तथा आपको मोटा बनाने में नींद की भी बड़ी भूमिका है। अगर आप रात में पर्याप्त मात्रा में नींद नही ले पाते हैं तो इससे हॉरमोन में बदलाव होते हैं। इस कारण आपको भूख अधिक लगने लगती है। आप अधिक मात्रा में कैलोरी तथा कार्बोहाइड्रेट लेने लगते हैं। इस कारण वजन बढ़ने लगता है।

मोटे व्यक्ति से जुड़े ख़तरे

  •  मोटे व्यक्ति में टाईप – 2 के डायबिटीज होने की अधिक संभावना है। 
  •  इसमें कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाता है। 
  •  हाई ब्लड प्रेशर के शिकार हो सकते हैं। 
  •  हृदय रोग हो सकता है। 
  •  स्ट्रोक का ख़तरा अधिक बढ़ जाता है। 
  •  गर्भाशय, सर्विक्स, ब्रेस्ट, बड़ी आंत, मलाशय तथा प्रोस्टेट इत्यादि के कैसंर की अधिक संभावना रहती है। 
  •  स्लीप एपनिया ( सोने के दौरान सांस रुकने की समस्या ) हो सकती है। 
  •  गॉलब्लेडर की बीमारी का खतरा रहता है।
  • स्त्रियों में बांझपन तथा अनियमित मासिक चक्र की समस्या हो सकता है।
  •  मोटापा पुरुषों में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन तथा अन्य यौन सम्बंधित रोग का कारण बन सकता है। 
  •  व्यक्ति अवसाद का शिकार भी हो सकता है। 
  • अत्यधिक वजन बढ़ने से अपंगता आ सकती है।

बचपन में ही मोटापे का शिकार होने वाले बच्चे वयस्क होने पर भी मोटापे का शिकार हो सकते हैं। ऐसे बच्चों में वयस्क होने से पहले ही मृत्यु या अपंगता का खतरा बना रहता है। मोटे बच्चों को निम्नलिखित समस्याओ का भी सामना करना पड़ सकता है। 

  •  सांस लेने में दिक्कत
  •  हड्डियों के टूटने की अधिक संभावना
  •  हाइपरटेंशन
  •  इन्सुलिन का प्रभाव खत्म हो जाना
  •  हृदय से जुड़ी बीमारी का खतरा
  •  मानसिक रोग

मोटापे से बचाव के उपाय

शुरुआत में मोटापे से बचाव के लिए निम्नलिखित उपाय कर सकते हैं। 

  •  रात में 8 बजे के बाद खाने से बचें।
  • लिफ्ट की जगह सीढ़ी का उपयोग करें।
  • फलों था सब्जियों का सेवन अधिक से अधिक करें।
  • अधिक से अधिक शारीरिक रूप से किये जाने वाले काम करें।
  • रात में समय से सोएं तथा पूरी नींद लें।

मोटापे के इलाज के विकल्प

विभिन्न चिकित्सीय उपायों की मदद से मोटापे का इलाज संभव है। मोटापे को कम करने में डायटीशियन, फिजियोथेरपिस्ट, फिजिशियन, एंडोक्राइनोलॉजिस्ट, मनोरोग विशेषज्ञ, हृदय रोग विशेषज्ञ तथा बेरियाट्रिक ( मोटापे को कम करने के लिए सर्जरी करने वाले डॉक्टर) इत्यादि की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है।

एंडोक्राइनोलॉजिस्ट मोटापे के लिए हॉरमोन के कारणों की जांच करते हैं। इसके अलावा वजन कम करने के लिए न्यूट्रिशनिस्ट की भी सलाह ली जाती है। अंत में हमारे पास मोटापे को कम करने के लिए सर्जरी की भी व्यवस्था है। 

वर्तमान समय में मोटापे को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका बेरिएट्रिक सर्जरी ही है। बेरिएट्रिक सर्जरी की मदद से बड़ी मात्रा में वजन कम किया जाता है। साथ ही मोटापे से जुड़े खतरों को भी कम किया जाता है ताकि उस व्यक्ति के जीवन को आसान और सहज बनाया जा सके। बेरिएट्रिक सर्जरी लैप्रोस्कोपिक (की होल) तकनीक के तहत किया जाता है। इससे सर्जरी के बाद मरीज काफी तेजी से ठीक भी हो जाता है। बेरिएट्रिक सर्जरी केवल शारिरिक रूप से ठीक दिखने वाला सर्जरी नही है, बल्कि यह जीवन को बचाने के लिए किया जाने वाला सर्जरी है। 

वैसे व्यक्ति जिनका आईबीएम 32.5 से 37.4 के बीच है तथा वह मोटापे से जुड़ी अन्य बीमारियों के शिकार हैं, उनका वजन 90 से 105 किलोग्राम के बीच है तो उन्हें बेरिएट्रिक सर्जरी सर्जरी की सलाह दी जाती है। 37.5 या उससे अधिक आईबीएम तथा 105 किलोग्राम से अधिक वजन वालो को भी बेरिएट्रिक सर्जरी अवश्य ही करवाना चाहिए। 

कुछ मामलों में आईबीएम 32.5 ही होता है तथा फैट केवल पेट पर जमा हुआ होता है, तो इस स्तिथि में भी शरीर को काफी नुकसान हो सकता है। यह भी सेहत के लिए खतरनाक होता है। पेट वाले क्षेत्र में मौजूद फैट भी अधिक खतरनाक होता है। इस लिए बेरिएट्रिक सर्जरी करने से पहले सभी तरह के विकल्पों तथा मापदंडों पर नज़र रखना काफी ज़रूरी है।

बेरिएट्रिक सर्जरी के प्रकार- Bariatric Surgery in Hindi

 लैप्रोस्कोपिक स्लीव गैस्ट्रेक्टॉमी – की मदद से पेट के आकार को कम किया जाता है। इसे एक शर्ट के बांह का आकार दिया जाता है। यह भूख को कम कर देता है। थोड़ा ही खाने के बाद पेट बिल्कुल भड़ा हुआ महसूस होने लगता है। इससे वजन कम करने में काफी मदद मिलती है। इस सर्जरी के लिए अस्पताल में अधिक्तम 2 रात तक रहना होता है। इसमें अधिक वजन का 75 प्रतिशत तक वजन कम हो जाता है। 

लैप्रोस्कोपिक एडजस्टेबल गैस्ट्रिक बैंडिंग – इस सर्जरी में एक एडजस्टेबल बैलून के साथ पेट पर सिलिकॉन बैंड की एक परत लगाई जाती है तथा इसे ऑवरग्लास शेप दिया जाता है। यह अधिक खाने की क्षमता को कम कर देता है। इस कारण वजन में काफी कमी आती है। इन प्रकार के सर्जरी की सफलता काफी हद तक बैंड के ऐडजसमेन्ट तथा हाई कैलोरी वाले पेय पदार्थ तथा मिठाई खाने पर नियंत्रण पर निर्भर करता है। इस सर्जरी के लिए अस्पताल में एक रात रुकना होता है। इस प्रक्रिया के तहत बढ़े हुए वजन का 55 प्रतिशत तक वजन कम होने की संभावना रहती है। 

लैप्रोस्कोपिक गैस्ट्रिक बाईपास – भोजन लेने की क्षमता को नियंत्रित करने के लिए इस सर्जरी के द्वारा पेट के आकार को कम कर दिया जाता है। इसमें आंत के कुछ हिस्सों की भी सर्जरी की जाती है। इस कारण पोष्टक तत्वों के एब्जॉर्पसन में भी कमी आ जाती है। इस प्रक्रिया के लिए 2 रात के लिए अस्पताल में रहना होता है। इस सर्जरी के बाद बढ़े हुए वजन कस 85 प्रतिशत वजन कम होने की संभावना रहती है। 

अधिक्तर बेरिएट्रिक सर्जरी के बाद बड़े स्तर पर वजन में कमी आती है। इसके अलावा मोटापे के कारण होने वाले बीमारियों जैसें डायबिटीज , हाई ब्लड प्रेशर, स्लीप एप्निया के लक्षणों में काफी सुधार आता है। इसके अलावा हर्ट अटैक, स्ट्रोक तथा कई प्रकार के कैंसर होने की संभावना में भी काफी कमी आ जाती है। 

बेरिएट्रिक सर्जरी से पहले की तैयारी

  • बेरिएट्रिक सर्जरी से पहले आपको खून जांच, ईसीजी, सीने के एक्स रे, अपर एंडोस्कोपी, कार्डियक स्ट्रेस टेस्ट तथा इको पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट करवाने पड़ते हैं। 
  • सर्जरी से 2 सप्ताह पहले से ही मरीज़ को अधिक प्रोटीन युक्त भोजन दिया जाता है। तथा कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन बिल्कुल कम मात्रा में लेना होता है। ऐसा लिवर के आकार को कम करने के लिए किया जाता है। 
  • सर्जरी से पहले डायटीशियन, फिजियोथेरेपिस्ट तथा मनोचिकित्सक भी मरीज़ को देखते हैं तथा ऑपरेशन में बाद के प्लान के बारे में बताते हैं। 

बेरिएट्रिक सर्जरी के बाद के सुझाव

  • सर्जरी के बाद वजन कम होने की प्रक्रिया 12 से 18 महीने में पूरी होती है। वजन के कम होने से जीवन शैली में काफी बदलाव देखने को मिलता है। आत्मविश्वास में भी बढ़ोतरी होती है। 
  • सर्जरी के बाद मरीज को अगले 2 हफ्ते तक केवल तरल पदार्थों का सेवन कराया जाता है। अगले 2 हफ्ते मरीज़ नरम भोजन लेता है। इसके बाद मरीज नियमित रूप से खाए जाने भोजन खा सकता है। 
  • सर्जरी के बाद मरीज को प्रयाप्त मात्रा में खाने के साथ प्रोटीन लेने को कहा जाता है। खाने को पूरी तरह चबा कर तथा धीरे धीरे खाने की सलाह दी जाती है। पानी भी नियमित रूप से पीना काफी ज़रूरी है। ध्यान रखें कि खाने से 3 मिनट पहले तथा खाने के 30 मिनट बाद तक पानी न पिएं। 
  • प्रत्येक दिन विटामिन युक्त चीजें खाने हैं।
  • गर्भधारण करने वाली महिलाओं में सर्जरी के बाद प्रजनन क्षमता में बढ़ोतरी होती है तथा बच्चे का जन्म भी सुरक्षित तरीके से होता है। महिलाओं को सर्जरी के 1 साल बाद ही गर्भधारण करने की सलाह दी जाती है। 
  • कम वजन को बनाए रखने के लिए सर्जरी के बाद मरीज नियमित रूप से व्यायाम करें तथा संतुलित आहार लें।
  • सर्जरी के बाद नियमित रूप से डॉक्टर के संपर्क में रहें। सर्जरी के पहले 1 साल में प्रत्येक 3 महीने में एक बार डॉक्टर से ज़रूर मिलें। 2 साल होने पर प्रत्येक 6 महीने में एक बार मिलें। इसके बाद साल में 1 बार आना काफी है। 

बेरिएट्रिक सर्जरी से जुड़े कुछ झूठ और उसकी सच्चाई के बारे में –

झूठ –  अनुवांशिक रूप से भारतीय मोटापे के शिकार नही होते हैं। 

सच्चाई – अनुवांशिक रूप से भारतीयों के कमर के चारों ओर फैट जमने का काफी अधिक खतरा रहता है। 

झूठ – भारत में केवल कम वजन तथा कुपोषण ही वजन से संबंधित समस्या है। 

सच्चाई – भारत में 1 करोड़ से भी अधिक काफी मोटे लोग हैं। 

झूठ – सुबह का नाश्ता नही करने से कोई समस्या नही आती है। 

सच्चाई – दिल्ली के स्कूलों के बच्चों में नाश्ता न करने वाले 30 प्रतिशत बच्चे मोटे हैं। 

• झूठ – भारत में काम करने वाले लोग बिल्कुल चुस्त और स्वस्थ हैं। 

सच्चाई – भारत में काम करने वालों की कुल आबादी में 70 प्रतिशत लोग आवश्यकता से अधिक वजन वाले हैं। 

• झूठ – मोटापा केवल शारीर समस्या पैदा करता है। 

सच्चाई – मोटापा शारीरिक समस्या के साथ साथ तनाव तथा कम आत्मविश्वास का कारण भी बनता है। 

• झूठ – मोटापा जानलेवा नही है। 

सच्चाई – मोटापा औसतन 6.5 साल उम्र कम कर देता है। 

• झूठ – भूख लगने पर किसी भी समय भोजन करना ठीक है। 

सच्चाई – ज़्यादा रात में भोजन करना मोटापे का कारण बनता है। 

• झूठ – दिल्ली की कुल आबादी में आधे से भी  कम पुरुष ज़्यादा वजन वाले हैं। 

सच्चाई – दिल्ली की कुल आबादी में 54 प्रतिशत पुरूष ज़्यादा वजन वाले हैं। 

• झूठ – भारतीयों में मोटापे को कम करने के लिए केवल  खान पान में बदलाव तथा व्यायाम की आवश्यकता है। 

सच्चाई – भारत में 20 लाख लोगों को वजन कम करने के लिए सर्जरी की आवश्यकता है।

• झूठ – मोटापे से किसी अन्य तरह की समस्या नही होती है। 

सच्चाई – भारत में लगभग 630 लाख लोग केवल मोटापे के कारण उत्पन्न हुई अन्य बीमारियों का सामना कर रहे हैं। 

मानवेन्द्र सिंह

मानवेन्द्र सिंह

मानवेंद्र सिंह सॉफ्ट प्रमोशन टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड में फिटनेस और हेल्थ ब्लॉगर हैं। उन्होंने 2006 में BHM स्नातक की डिग्री ली है। उन्हें स्वास्थ्य एवं विज्ञान अनुसंधान के क्षेत्र में लेखन का आनंद मिलता है।

Leave a comment

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.