बवासीर

बादी बवासीर से पीड़ित व्यक्ति के गुदा व मलाशय में मौजूद नसों में सूजन व मस्सा उत्पन्न हो जाता है जिसके कारण मरीज को मलत्याग में अत्यधिक दर्द का सामना करना पड़ता है धुम्रपान व गलत खानपान के साथ साथ इस रोग को अनुवांशिक भी माना जाता है भारत में तीस प्रतिशत महिला व पुरुष बादी पाइल्स की बीमारी से ग्रस्त है  यदि इस रोग का सही समय पर इलाज न कराया जाये तो इस बीमारी को भगन्दर बनते देर नही लगती है  

बादी पाइल्स के लक्षण :

  • मलत्याग के समय तेज पीड़ा होना
  • गुदा क्षेत्र में खुजली व सुजन होना
  • गुदा क्षेत्र से बलगम की तरह स्त्राव का होना
  • बार बार कब्ज का होना
  • बैठने में दर्द महसूस होना
  • मलद्वार में दर्द का होना |

बादी पाइल्स क्यों होता है ?

पाइल्स की बीमारी मरीज के गुदा के चारों और नसों में दबाव व खिंचाव आने के कारण उस स्थान पर मस्सा उत्पन्न हो जाता है आपके गुदा पर दबाव व खिंचाव कई कारणों से आ सकता है

बादी बवासीर के कारण :

कब्ज की वजह से – कब्ज के कारण मरीज को मल त्याग करने में दिक्कत महसूस होती है जिसके कारण वह अत्यधिक जोर लगता है जिससे गुदा क्षेत्र में सुजन की समस्या होने लगती है

मोटापा के कारण – मोटापा के कारण गुदा की मांसपेशियों में दबाव पड़ने के कारण यह रोग उत्पन्न हो सकता है

गर्भावस्था के कारण – गर्भवती महिला के पेट के अंदर का दबाव बढ़ने व गर्भाशय बड़ा होने की वजह से गुदा की नसों में खिंचाव आता है |

आनुवंशिकता की वजह से – आनुवंशिक कारणों में बवासीर गुदा क्षेत्र में नसों की कमजोरी के कारण जन्म लेती है |

अधिक उम्र का होना – अधिक उम्र की वजह से व्यक्ति के शरीर में मौजूद ऊतक व प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाते है जिसके कारण बवासीर जन्म ले सकता है |

बादी बवासीर का बचाव :

  • शरीर को मोटापा मुक्त रखे
  • कब्ज न होने दे
  • उच्च फाइबर वाले खाद्य पदार्थ का सेवन करे
  • नियमित वयायाम करे
  • लंबे समय तक बैठने से बचें
  • प्रतिदिन कम से कम पाच लीटर पानी जरुर पीये
  • अधिक समय तक मल न रोके

बादी पाइल्स ठीक करने के कुछ देशी उपचार  :

एलोवेरा जूसएलोवेरा जूस में कई प्रकार के  एंटी- एक्सीडेंट व न्यूट्रिऐंट्स पाये जाते है जो बादी बवासीर जैसी बमारी को खत्म करने में लाभदायक साबित होते है

लगाने की विधि – यदि पीड़ित एलोवेरा जूस को हल्का गर्म करके अपने मलद्वार पर लगाने से बहुत आराम मिलता है |

टी ट्री आयल – टी ट्री आयल में कई प्रकार के एंटीबायोटिक और एंटीमाइक्रोबियल गुण व कई अन्य औषधीय गुण पाये जाते है जो इस रोग में आयी सुजन को कम करने का काम करती है

प्रयोग करने की विधि – मरीज को इस तेल को ऊँगली के माध्यम से मलद्वार के चारों ओर लगाने से सुजन व दर्द से रहत मिलती है

छाछ के द्वारा – छाछ यानी मट्ठा में फाइबर के साथ साथ एंटी- एक्सीडेंट रोगाणुरोधी व एंटी-इंफ्लेमेटरी जैसे तत्व मौजूद होते है

सेवन करने का तरीका – रोगी को छाछ में पीसा हुआ जीरा व नमक मिलाकर खली पेट सेवन करने बादी पाइल्स में रहत मिलती है |

मानवेन्द्र सिंह

मानवेन्द्र सिंह

मानवेंद्र सिंह सॉफ्ट प्रमोशन टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड में फिटनेस और हेल्थ ब्लॉगर हैं। उन्होंने 2006 में BHM स्नातक की डिग्री ली है। उन्हें स्वास्थ्य एवं विज्ञान अनुसंधान के क्षेत्र में लेखन का आनंद मिलता है।

Leave a comment

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.