हम सभी जानते हैं कि मानव शरीर का हर एक अंग बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। सब अंगों के अलावा एक ऐसा अंग होता है जो सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है और वो अंग है आँख। ऐसा इसलिए क्योंकि आंखों की मदद से ही व्यक्ति चीज़ों को देख पाता है। शरीर के बाकी हिस्सों की अपेक्षा आंखें सबसे नाजुक होती हैं। जिनका ख्याल व्यक्ति को अवश्य ही रखना चाहिए। अगर ख्याल नहीं रखा जाए तो व्यक्ति की आंखों में दिक्कत पैदा हो सकती है जिसकी वजह से देखने में भी कठिनाई हो सकती है। आज हम आप सबको आंखों से जुड़ी एक समस्या के बारे में बताएंगे जिसका नाम है एस्टिगमैटिज्म । ये आंखों में होने वाली ऐसी बीमारी है जिसकी वजह से व्यक्तियोंको आंखों से तिरछा या फिर धुंधला दिखाई देने लगता है। चलिए इस बीमारी के बारे में आज हम आपको पूरी जानकारी दे देते हैं।

क्या है एस्टिगमैटिज्म?

हम सभी जानते हैं कि हमारी आंखों में जो कॉर्निया होता है उसका आकार गोल होता है। जब इसी कॉर्निया का आकार बिगड़ जाता है या कई बार आंखों के लेंस का कर्वेचर बिगड़ जाता है, इसमें जो सतह होती है वो चिकनी होने की जगह ऊपर नीचे हो जाते है और इसीलिए एस्टिगमैटिज्म हो जाता है।

इस बीमारी को अन्य भाषा में दृष्टिवैषम्य भी कहते हैं। इसकी वजह से धुंधला दिखाई देने लगता है। इस बीमारी का प्रभाव थोड़ा कम होता है इसीलिए इसका जो इलाज है वो आसानी से हो जाता है।

इस बीमारी में लोगों को धुंधला दिखने लगता है फिर चाहे चीज़ एकदम पास ही क्यों न हो। आमतौर पर इसकी समस्या बचपन से ही लोगों में ज्यादा देखने को मिलती है। जब इसकी शुरुआत हो तभी इसका इलाज करवा लेना चाहिए जिससे बाद में आंखों को ज्यादा नुकसान न पहुंचे।

जाने एस्टिगमैटिज्म के प्रकार के बारे में

एस्टिगमैटिज्म मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं पहला कॉर्नियल एस्टिगमैटिज्म और दूसरा लेंटिकुलर एस्टिगमैटिज्म।

  • कॉर्नियल एस्टिगमैटिज्म- इस तरह के एस्टिगमैटिज्म में व्यक्तियोंके कॉर्निया का जो आकार होता है वो बिगड़ा हुआ होता है जिसकी वजह से व्यक्तियोंको धुंधला दिखाई पड़ने लगता है।
  • लेंटिकुलर एस्टिगमैटिज्म- इस तरह के एस्टिगमैटिज्म में व्यक्तियोंके लेंस का जो आकार होता है वो बिगड़ा हुआ होता है। इसकी वजह से भी व्यक्तियोंको धुंधला दिखाई देने लगता है।

जाने एस्टिगमैटिज्म के कारण के बारे में

एस्टिगमैटिज्म के होने के पीछे कारण क्या हैं इस बात की पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है। मगर 50 साल की उम्र के बाद इस रोग के होने की जो सम्भावनाएं हैं वो बढ़ जाती हैं। इसके अलावा इस बीमारी के लिए कुछ अन्य कारण भी हो सकते हैं और वो कारण निम्न हैं-

  • आनुवंशिकता- परिवार में अगर इस बीमारी का इतिहास रहा है या फिर माता पिता किसी को भी ये बीमारी है तो सम्भवतः ये बीमारी बच्चों को भी हो सकती है।
  • निकतद्रष्टिदोष- जब व्यक्तियोंके कॉर्निया की जो गोलाई होती है ज्यादा हो जाती है या फिर आंख सामान्य से बढ़कर लम्बी हो जाती है तो जो प्रकाश रेटिना पर केंद्रित होता है वो रेटिना पर केंद्रित होने की जगह रेटिना के सामने केंद्रित होने लगता है जिसकी वजह से व्यक्तियोंको धुंधला दिखाई पड़ने लगता है।
  • दुरद्रष्टिदोष- जब व्यक्तियोंकी आंख सामान्य से छोटी या फिर कॉर्निया छोटा हो जाता है तब प्रकाश रेटिना पर केंद्रित होने की जगह रेटिना के पीछे केंद्रित होने लगता है जिसकी वजह से व्यक्तियोंको धुंधला दिखाई पड़ने लगता है। असल में ये निकतद्रष्टिदोष के एकदम विपरीत स्तिथि होती है।
  • चोट या फिर सर्जरी के कारण आंखों में चोट लगने की वजह से भी एस्टिगमैटिज्म की समस्या हो जाती है।
  • आंखों में तनाव होने से भी ऐसी स्तिथि बन जाती है।
  • खराब या कम प्रकाश में पढ़ना।
  • लम्बे समय तक कंप्यूटर या फिर टीवी में लगे रहना।
  • ऐसी नौकरी करना जहां पर बहुत बारीकी से काम करने की ज़रूरत होती है।

जाने एस्टिगमैटिज्म के मुख्य लक्षण के बारे में

एस्टिगमैटिज्म के जो लक्षण होते हैं वो निम्न होते हैं-

  • देखने में कठिनाई को महसूस करना।
  • धुंधला नज़र आना।
  • आंखों पर बोझ पड़ने जैसा महसूस करना।
  • सिर में दर्द का रहना।
  • चक्कर आना।
  • वस्तुओं के आकार को सही तरह से न पहचान पाना।

उपरोक्त लक्षण इस रोग के प्रमुख लक्षणों में से एक हैं। अगर कोई भी लक्षण नजर आते हैं तो बेहद जरूरी होता है कि डॉक्टर से मिलकर आंखों की अच्छी जांच करवाई जाए।

एस्टिगमैटिज्म का आसन सा इलाज

अगर लक्षण दिखाई पड़ने के शुरुआती दिनों में ही व्यक्ति डॉक्टर को दिखा लेता है तो इस बीमारी का इलाज चश्मे या फिर कांटेक्ट लेंस की सहायता से आसानी से किया जा सकता है। पर अगर समस्या गम्भीर रूप ले लेती है तो उसके इलाज में निम्न चीजें शामिल हैं-

  • रिफ्रेक्टिव सर्जरी- इसकी मदद से व्यक्तियोंकी आंख की सतह का आकार बदलकर ठीक किया जाता है। रिफ्रेक्टिव सर्जरी में निम्न चीजें शामिल हैं-

◆ लेसिक सर्जरी- इस प्रक्रिया में व्यक्ति की कॉर्निया में एक पतला और गोलाकार कट बनाने के लिए केराटोम नामक उपकरण का इस्तेमाल किया जाता है।

◆ लासेक सर्जरी- इस प्रक्रिया में कॉर्निया की एक बहुत पतली सी परत मोड़ी जाती है।

◆ फोटोरेफ़्रेक्टिव केराटेक्टोमी- इस प्रक्रिया में कॉर्निया की गोलाई को ठीक करने के लिए एक्सीमर लेज़र का इस्तेमाल किया जाता है।

जाने एस्टिगमैटिज्म से बचाव के बारे में

एस्टिगमैटिज्म से बचने के लिए आवश्यक है कि आंखों को तनावमुक्त रखा जाए। एस्टिगमैटिज्म से बचने के कुछ उपाय निम्न हैं-

  • समय समय पर पलकों को झपकते रहें जिससे आंखों पर तनाव न पड़े।
  • कंप्यूटर या फिर टीवी देखते समय बीच बीच में आंखों को ब्रेक दें जिससे आंखों को आराम मिल सके।
  • हमेशा पर्याप्त रोशनी में ही पढ़ें या फिर कोई भी काम करें।
  • आंखों की नमी को कभी खोने न दें हमेशा नमी बरकरार रखें।
  • सबसे बड़ी चीज 10-10-10 के नियम को अपनाएं। मतलब की व्यक्ति जब भी कंप्यूटर के सामने या फिर कोई बारीकी वाला काम करे तो हर 10 मिनट में कम से कम 10 सेकंड के लिए अपनी आंखों से 10 फ़ीट दूर तक देखें। इससे आंखों को बहुत राहत मिलेगी और जो भी तनाव होगा वो दूर रहेगा।
  • अगर आंखों में कभी भी कोई भी परेशानी हो तो खुद डॉक्टर न बनें।

मानवेन्द्र सिंह

मानवेंद्र सिंह सॉफ्ट प्रमोशन टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड में फिटनेस और हेल्थ ब्लॉगर हैं। उन्होंने 2006 में BHM स्नातक की डिग्री ली है। उन्हें स्वास्थ्य एवं विज्ञान अनुसंधान के क्षेत्र में लेखन का आनंद मिलता है।

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