बारिश का मौसम अपने साथ अनेक रोगों को लाता है और इससे बचाव न किया जाए तो व्यक्ति को तरह-तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बारिश की वज़ह से हर जगह नमी होती है और नमी मिलते ही कीटाणु और वायरस बहुत तेज़ी से बढ़ते हैं। इस मौसम में त्वचा से जुड़ी अनेक बीमारियां जैसे बुखार, डेंगू, मलेरिया आदि इनके होने का खतरा बढ़ जाता है। बारिश के होने वाले रोगों में ही शामिल एक रोग और है जिसका नाम है अमिबियासिस। इस रोग से बहुत ही कम लोग वाकिफ हैं और शायद यही वजह है कि बारिश के मौसम में अधिकतर लोग इस बीमारी के शिकार हो जाते हैं।

अमिबियासिस क्या है

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट हो रहा है कि यह रोग अमीबा के कारण होता है अर्थात यह एक प्रोटोजोनिक प्रकृति का रोग है। जिसकी वजह से बड़ी आँतो मे अल्सरेटिक घाव (छाले) हो जाते है। जिसकी वजह से सूजन भी आ जाती है। अमिबियासिस एक जलजनित रोग है यानि ये रोग पानी के द्वारा फैलता है। इसके साथ ही ये रोग संक्रामक होता है यानि कुछ विशेष परिस्थितियों में ये रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में पहुंच जाता है।

सर्वप्रथम अमीबियासिस की तस्वीर का वर्णन ग्रीक के हिप्पोक्रेट्स ने किया था। इसके उपरांत एविसेने ने अमीबियासिस को आँतो के विकार के रूप मे बताया और खूनी दस्त व आँतो मे अल्सर का जिम्मेदार भी ठहराया।  

अमीबियासिस एक संक्रामक रोग है जो अब पूरे विश्व मे फैल गया है। एक सर्वेक्षण के अनुसार विश्व की कुल आबादी का 10% आबादी इस संक्रमण से होने वाले रोगों से संक्रमित है । इसके फैलने की सबसे प्रमुख कारण आबादी का बढ़ना और स्वच्छता मानको की अनदेखी करने है। विदेशी पर्यटन मे हुई वृद्धि भी अमीबियासिस के प्रसार का कारण है।

अमीबियासिस एक प्रकार के अमीबा (डाइसेन्टरिक अमीबा) से होता होता है। जिसे सर्वप्रथम 1875 मे एफए लैश ने पहचाना था। उन्होंने इसका नाम अमीबा कोली दिया । इसके अलावा एफए लेहेशम ने अमीबायसिस का प्रयोगशाला मे इलाज करने का वर्णन किया। उनका तरीका आज भी प्रयोग मे लाया जाता है।

जाने अमिबियासिस के मुख्य कारणों के बारे में 

दोस्तों, चलिए अब बात करते हैं उन कारणों के बारे में जिनकी वज़ह से अमिबियासिस नाम की बीमारी लोगों को होती है।

संक्रमित पानी या दूषित पदार्थों जिनमें किटाणु हों उनका सेवन करने से ये रोग व्यक्तियोंको होता है। परजीवी जीवाणु से होने वाला अमीबियासिस, प्रमूख रूप से एक जलजनित रोग है। ज्यादातर लोगों को तीखा और बाहर का मिर्ची मसालों वाला खाने का शौक होता है। ठेले आदि पर बिक रही चीज़ो को लोग खा तो लेते हैं पर खाने के बाद उन्हें अमिबियासिस जैसी बीमारियों का सामना करना पड़ता है ऐसा इसीलिए क्योंकि ठेले वगैरह पर जो पदार्थ होते हैं वो अशुद्ध पानी का इस्तेमाल करके बनाए जाते हैं।

दोस्तों, इसके अलावा जो दो मुख्य प्रकार के अमीबा हैं वो इस रोग के लिए विशेष तौर पर ज़िम्मेदार हैं। पहला तो एंटेमोबा हिस्टोलिटिका और दूसरा है नॉनपेथोजनिक एंटेमोबा कोली।

अमिबियासिस से प्रभावित होने वाले अंग

हमने आप सभी को ये तो बता ही दिया कि आखिर अमिबियासिस होता क्या है, उसके होने के कारण क्या हैं। अब हम आपको बताएंगे कि अमीबियासिस के होने से व्यक्तियोंके कौन-कौन से अंग हैं जो प्रभावित होते हैं। अमीबियासिस से शरीर के बहुत से अंग प्रभावित होते हैं। सबसे पहले अमीबियासिस बड़ी आंत पर धावा बोलता है। इसके बाद ये अन्य अंगों पर हमला करता है। जैसे-फेफड़ा, लीवर, मस्तिष्क, हृदय, अंडाशय, अंडकोश, त्वचा इत्यादि।

अमीबियासिस के महत्वपूर्ण लक्षण

जैसा कि हम अमीबियासिस को बहुत ही कम लोग जानते हैं इसीलिए इसके लक्षणों को भी नहीं पहचानते हैं। तो आज हम आपको अमीबियासिस के लक्षणों के बारे में बता देते हैं।

पतले दस्त का होना या फिर भोजन करने के बाद पेट में दर्द का होना अमीबियासिस के लक्षणों में से एक है। अक्सर अमीबियासिस में रुक रुक के दस्त शुरू होते रहते हैं और कब्ज की समस्या बनी रहती है। जी मचलाना या फिर उल्टी होना भी इसी बीमारी का सूचक है। पेट में गैस का बनना या फिर त्वचा सम्बन्धी कोई भी रोग होना सब अमीबियासिस होने के लक्षण हैं।

अमीबियासिस का आसन सा इलाज

अगर किसी भी व्यक्ति को अमीबियासिस के लक्षण नजर आते हैं तो उसे फौरन डॉक्टर के पास जाना चाहिए। स्वच्छ तरल पदार्थों के ज्यादा से ज्यादा सेवन करना चाहिए जैसे कि नारियल का पानी, काली चाय, लस्सी, छाछ आदि। जामुन, पपीता, लहसुन, काली मिर्च, अदरक और दालचीनी का जितना ज्यादा हो सके उपयोग करना चाहिए। जिसको अमीबियासिस हो उससे थोड़ा दूर ही रहें। बारिश वगैरह में घूमने फिरने से बचना चाहिए। जिसको भी अमीबियासिस हो उसके कपड़ो को, बिस्तर को और खाने को अलग ही रखें।

और हां एक मुख्य बात जब भी किसी व्यक्ति को अमीबियासिस के लक्षण नजर आते हैं तो उसे ऐसे डॉक्टर के पास जाना चाहिए जोकि एक संक्रामक रोग का विशेषज्ञ हो।

अमीबियासिस के बचने के तरीके

हम आपको शुरुआत में ही बता चुके हैं कि ये एक संक्रामक रोग है इसीलिए इसके होने का खतरा भी थोड़ा ज्यादा ही रहता है। इससे बचने के लिए व्यक्तियोंको कुछ बातों का हमेशा ध्यान रखना चाहिए। जैसे-

  • व्यक्ति को हमेशा स्वच्छ और फिल्टर वाला पानी ही पीना चाहिए।
  • अमीबियासिस के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
  • अगर किसी व्यक्ति के घर सप्लाई का पानी आता है तो उसे उस पानी में क्लोरीन को डालकर ही उपयोग करना चाहिए।
  • बरसात में बाहर न घूमें। और अगर बाहर जाना पड़ जाए तो रेनकोट आदि पहनकर ही घर से बाहर निकले। खुले में इकट्ठे पानी में देर तक पैर को रखने से बचने की कोशिश करें।
  • खाना बनाने के लिए हरदम स्वच्छ और साफ पानी का ही इस्तेमाल करें। इसके अलावा किचन में भी साफ-सफाई रखें।

मानवेन्द्र सिंह

मानवेंद्र सिंह सॉफ्ट प्रमोशन टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड में फिटनेस और हेल्थ ब्लॉगर हैं। उन्होंने 2006 में BHM स्नातक की डिग्री ली है। उन्हें स्वास्थ्य एवं विज्ञान अनुसंधान के क्षेत्र में लेखन का आनंद मिलता है।

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