परागज ज्वर का इलाज – Allergic Rhinitis -Hay Fever In Hindi

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Allergic Rhinitis

एलर्जी के कारण नाक के वायुमार्गों का प्रदाह होना परागज ज्वर कहलाता है। नाक की श्लेष्मा कला जब पौधों के पराग के प्रति ऐलर्जी  के कारण प्रभावित होती है, जिससे व्यक्ति की नाक में खुजली होती है, गले मे दर्द, गले मे ख़रीश, आँख से पानी गिरता है, छींके आती हैं, तब यह अवस्था परागज ज्वर कहलाती है। इसे बजुर्ग ‘गुलाब ज्वर’ भी कहते थे। वैसे इस रोग में ज्वर नहीं आता तथा फूलों से भी इसका कम संबंध है, लेकिन इसका नाम परागज ज्वर ही प्रचलित है और सब इसे परागज ज्वर ही बोलते है।

एलर्जी पराग के का कारण हो सकती है या अन्य कई वस्तुमों के कारण भी जैसे बैक्टीरिया व वॉयरल। जब यह एलर्जी पराग के कारण होती है तो इस रोग को ‘परागज ज्वर’ कहते हैं। और इंग्लिश में ‘हे फीवर ‘ नाम से जाना जाता है।परागज ज्वर में नाक पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है । तथा पराग हवा द्वारा साँस के तथा नाक तक पहुचता है ।   यह रोग कुछ व्यक्तियोंको आपने पूर्वजों या शारिरिक बनावट से भी प्राप्त होती है। साँस के तथा नाक तक पहुँचता है।  यह ज्वर वायु में मिल कर मिलो मिल दूर तक परगाज ज्वर उत्पन्न करता है। परगाज ज्वर विशेष प्रकार का होता है जो एक रोगी से दूसरे रोगी को प्रभावित करता है। सामान्य सर्दी जुकाम के विपरीत परागज ज्वर वायरस के कारण नहीं होता यह ज्वर एक एलर्जिक सिथिति है जो कि प्रयावरण में मौजूद एलर्जी पैदा करने वाले तत्वों के कारण फैलता है। यह एक संक्रमक बीमारी है।

परागज ज्वर के मुख्य लक्षण

  1. कई दिनों से नाक बहना परागज ज्वर का लक्षण हो सकता है।।
  2. लगातार छीक आना।
  3. बुखार आना और कई दिन तक बुखार का बना रहना।
  4. नाक में दर्द या जुखाम होना।
  5. गले मे खुजली का होना।
  6. गले मे खराश का होना परागज ज्वर का लक्षण है।
  7. खांसी का कई दिन तक न रुकना।

8.थकावट आना भी परागज ज्वर का एक प्रमुख लक्षण है।

ज्वर के प्रभाव से शरीर बिना परिश्रम किए ही कमजोर हो जाता है। कोई भी काम मे मन नही लगता बेहोशी छाई रहती है ओर भोजन खाने का भी मन नही करता।

आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के अनुसार अधिकांश बुखार बैक्टीरिया तथा वायरल इंफैक्शन यानी संक्रमण होने पर होते है जैसे कि टायफाइड, टांसिलेतिस आदि बुखार हैं।

जानिये क्या कारण होते है परागज ज्वर के

मौसम में बदलाव की वजह से

मौसम बदलने के साथ ही वातावरण में तरह-2 के सूक्ष्म जीव पैदा होने लकगते है । मौसम बदलाव के कारण व्यक्ति के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम होने लगती है उस समय ये वॉयरल द बैक्टीरिया शरीर पर प्रभाव डालते है। जिससे व्यक्ति रोग ग्रस्त हो जाता है।

गलत आहार का सेवन करने से

बहुत अधिक ठंडा व बर्फ़ का पानी पीने से हमारे गले मे कफ जमने लगता है उस समय भी कीटाणु और वायरल प्रभाव डालता है। अगर आप फ्रीज में रखी वस्तु, जंक फूड या  फिर अधिक मीट सेवन करते है । तब भी यह रोग होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। हमेशा जंक फूड के सेवन से बचना चाहिए। ताकि हम इस रोग से बच सके।

पेड़ से भी ग्रस्त हो सकते है

आप को यह जान के हैरानी होगी कि यह बीमारी पेड़ से भी हो सकती है। वैसे तो हमे पेड़ से कोई बीमारी नही होती लेकिन बिना पके या बिना प्लास्टर के घर मे अगर कोई ऐसा पेड़ हो जो घर की हवा को दूषित कर रहा हो और पराग कणो को इकठ्ठा कर रहा हो तो भी उस से यह रोग हो सकता है। इसलिये हमेशा अधिक ऑक्सीजन देने वाले और ऐसे पेड़ लगाने चाहिए जो हवा को दूषित न करे।

जानवर के कारण भी ग्रस्त हो सकते है

अगर आप के घर मे पालतू जानवर है जैसे गाय, कुत्ता, बिल्ली और भैंस आदि है तो उनकी वजह से होने वाले संक्रमण के कारण भी यह बीमारी हमारे घर तथा हम तक पहुंच सकती है।हम जानवरों को छोड़ तो नहीं सकते लेकिन ज्वर से बचने के लिए कुछ सावधानियां जरूर वरत सकते है।हम्हे जानवरों के साथ साथ उसके आस पास का इलाका भी हमेशा साफ़ रखना चाहिए । ताकि हम इस बीमारी से बच सके और यह सक्रमण आगे न फैल सके।

परागज ज्वर से बचने के उपाय

मास्क लगायें

मस्क लगाने से भी हम इस संक्रमण से बच सकते है। यह तरीका काफ़ी अच्छा है लेकिन इसको हमे हर दिन अपनी जिंदगी का हिस्सा बनना पड़ेगा ।जब भी आप बाहर निकले तो मास्क लगाये ओर अपने चेहरे को ढक के रखे। जैसा कि हमने बताया की यह वातावरण बदलाव की वजह से होता है तो मास्क लगाने से आपके शरीर मे यह बैक्टीरिया प्रवेश नहीं करने नही देगा। जिससे आपको यह समस्या नही होगी ओर हम सक्रमण से बच जाएंगे।

व्यक्ति को खाँसना और छीकते समय हमेशा रुमाल का उपयोग करना चाहिए। अगर कोई और भी छिक्त है तो मुह को ढक लेना चाहिए ताकि आप इस बीमारी / वॉयरल से बच सको।

ये रोग नाक में एलर्जी की वजह से होती है। और आप इस के लिए सेंतुबधास, सर्वंगासना,वीरभद्रासन आदि करे जिससे नाक में होने वाले  एलर्जी से आपको बहुत ज्यादा राहत मिलेगी। हम सबको यह उपाय इस्तेमाल करने चाहिये ताकि हम इस बीमारी से बच सके।

ज्वर 104 व 105 से अधिक डिग्री तक हो जाए तो सिर पर ठंडे पानी की , बर्फ के पानी की पट्टी बार बार रखे और पैर के तलुओं में लोकिके गूदे के पानी कके छींटे मारे। और इसके साथ ही दोनो पैरो के तलवे पर 1-1चम्मच शुद्व घी को मसलकर सूखा देने से ज्वर उतर जाता है या फिर हल्का हो जाता है। यह घरेलू नुसका घर घर मे अपनाया जाता है।

आपको एंटी बायोटिक चीजो का जैसे कि अदरक, शहद आदि का सेवन करना चाहिए। एंटी बायोटिक व्यक्ति के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। इसके साथ साथ मौसम के बदलाव के समय आपको हल्के गुनगुने पानी का इस्तेमाल करना चाहिए। जिससे आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाए। इससे आपके शरीर को एलर्जी होने की संभावना कम हो जाती है।

अगर घरेलू तरीका काम न आये तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए और इस वॉयरल पर काबू पाने के लिए सही तरीके से इलाज करवाना चाहिए ।

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