जानिए बीमारी के टीकाकरण के बारे मे

टीकाकरण : टीका लगाने का मुख्य उद्देश्य बिना रोग उत्पन्न किये शरीर में रोगनिरोधी प्रतिरक्षा का निर्माण करना होता है | प्राक्रतिक रूप से प्रतिरक्षा रोगाक्रमण की प्रतिक्रिया के कारण बनते है , परन्तु टीके की मदद से एक प्रकार का शीतयुद्ध छेड़कर शरीर में प्रतिरक्षा का निर्माण कराया जाता है | रोगनिरोधी टीके के लिए जो द्रव काम में लाया जाता है , उसे टीका कहते है | जो जीवाणु जीवविष पैदा कर सकते है | उनके इस जीवविष को फार्मेलिन के संयोग से शिथिल कर टीके में प्रयुक्त किया जा सकता है | इस प्रकार के फार्मेलिन प्रभावित जीवविष को जीवविषाभ (टॉक्साइड) कहते है |

किन-किन रोगों के लिए टीकाकरण प्रभावी पाया गया

टिटनेस का टिका

टिटनेस को टिटनेस टॉक्साइड के साथ टीकाकरण के माध्यम से रोका जा सकता है | टिटनेस को दूर करने के लिए चार प्रकार के टीके DTAP,TDAP ,DT और TD टीको का उपयोग किया जाता है | टिटनेस के दो टीके (DTAP और DT) 7 साल की उम्र से बड़े बच्चो को दिए जाते है | और दो टीके (TDAP और TD) बड़े बच्चो एवं वयस्को को दिए जाते है | वयस्को को हर दस वर्ष में बूस्टर टीका दिया जाता है |

डिप्थीरिया का टीका 

गले के बीमारी (डिप्थीरिया) से बचाव के लिए बच्चो को डी.पी.टी  का टीका अवश्य लगवना चाहिए | यह टीका शैशवावस्था में ही प्रारम्भ कर दिया जाता है | 10 से 12 महीने की आयु में डिप्थीरिया टॉक्साइड का पहला इंजेक्शन , 15 – 18 महीने की आयु में दूसरा इंजेक्शन फिर स्कूल प्रवेश के समय अंतिम इंजेक्शन 8 या 9 साल की उम्र में दिया जाता है | इससे बच्चे में जीवन भर रोगक्षमता पर्यन्त बनी रहती है |

रूबेला का टीका

यह टीका एक सक्रिय दुब्रलीक्रत रूबेला वायरस पर आधारित है | जिसका उपयोग 40 साल से ज्यादा समय से किया जा रहा है | इस टीके की एक खुराक जीवन भर प्रतिरक्षण प्रदा कर सकती है | इस टीके की पहली खुराक 12 – 15 मास की उम्र में तथा दूसरी खुराक 4 – 6 साल की उम्र में दे दी जाती है |

मलेरिया का टीकाकरण

इस टीके की खास बात यह है , की इसे वैसे ही विकसित किया गया है जैसे बिलकुल शुरू के दौर में टीके बना करते थे | मलेरिया से बचाने के लिए इस टीके की तीन खुराक काफी होती है |

निमोनिया का टीकाकरण

बच्चो को निमोनिया से बचाने के लिए स्वास्थ एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की तरफ से सयुक्त राष्ट्र बाल कोष ने न्युमोकोकल कांज्यूगेट वैक्सीन (पीसीवी) की शुरआत की है | साल 2010 में पीसीबी को अमेरिका ने लांच किया और साल 2017 में इसे भारत ने अपनाया | निमोनिया की बीमारी को रोकने के लिए यह टीका बहुत प्रभावशाली है |

रोटावायरस का टीका

दुनिया भर में रोटावायरस के कारण लगातार मौते हो रही है | मैक्सिको ही ऐसा पहला देश है जो वर्ष 2006 में रोटावायरस का टीका प्राप्त कर लिया था | रोटावायरस की पहली खुराक 6-12 हफ्ते की आयु में दे देनी चाहिए | इसकी अंतिम खुराक देने के लिए अधिकतम  आयु 32 सप्ताह होती है |

पोलियो का टीका

पोलियो का कोई इलाज नही होता है , परन्तु पोलियो का टीका बार – बार देने से बच्चो को जीवन भर सुरक्षा मिल जाती है | पोलियो के दो प्रकार के टीके होते है | एक इंजैकटेड निष्क्रिय टीका (IPV) है | इस टीके का प्रयोग दुनिया के उन भागो में किया जाता है , जो कई सालो से पोलियो से मुक्त है | दूसरा टीका मौखिक दुर्बलीक्रत (कमजोर) पोलियो टीका (OPV) का उपयोग उन क्षेत्रो में किया जाता है जंहा पोलियो संक्रमण का खतरा अभी भी है |

बीसीजी (क्षय रोग) का टीकाकरण

BCG का पूरा नाम Bacillus Calmette–Guérin है | इस टीके की मदद से बच्चो को पूरी उम्र भर टीबी की बीमारी से बचाया जाता है | बीसीजी का टीका बहुत सस्ता , सुरक्षित और आसानी से मिल जाने वाला टीका होता है |बीसीजी का टीका पांच साल से छोटी उम्र की बच्चो को टीबी की बीमारी से बचाने के लिए दिया जाता है | बीसीजी का टीका एक बार दिया जाना ही काफी होता है | लेकिन कभी – कभी पहली बार में यह सही साबित नही हो पाता है | इसलिए सुरक्षात्मक तौर पे इसे 2 -3 महीने के बाद उस स्तिथि में दुबारा दिया जा सकता है |

रेबीज का टीकाकरण

पोस्ट एक्सपोस्पोर प्रोफाइलेक्सिस में प्रतिरक्षा ग्लोषयुलिन की एक खुराक और रेबीज वैक्सीन की चार खुराक 14 दिन के अंतर पर लगाई जाती है | रेबीज प्रतिरक्षा ग्लोषयुलिन और रेबीज वैक्सीन की पहली खुराक जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी लगवानी चाहिए | पूरी दुनिया में ऐसा कोई टीका मौजूद नही है , जो केवल 1 या 2 इंजेक्शन से ही रेबीज के खिलाफ सही साबित हो सके | इंजेक्शन का पूरा कोर्स ल्युफिलाईड वैक्सीन के साथ लगवाना होता है | जो 0.1 मिलीलीटर की मात्रा में शरीर पर दो जगह 0 , 3रे , 7 वे और 28 दिनों पर लगाया जाता है |

मानवेन्द्र सिंह

मानवेन्द्र सिंह

मानवेंद्र सिंह सॉफ्ट प्रमोशन टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड में फिटनेस और हेल्थ ब्लॉगर हैं। उन्होंने 2006 में BHM स्नातक की डिग्री ली है। उन्हें स्वास्थ्य एवं विज्ञान अनुसंधान के क्षेत्र में लेखन का आनंद मिलता है।

Leave a comment

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.