आमतौर आपको  कोई नाक, त्वचा, फेफड़ो एवं पेट का रोग पुराना हो जाता है और उसका इलाज नही होता है तो अक्सर हम उसे एलर्जी समझ लेते है जब आपको रोग के बारे में ज्ञान नही होता है तो आप  उपचार कैसे करायेगे तो हम बतायेगे आपको क्या है एलर्जी व इसके कारण और साथ ही इसके उपचार कौन से है |

क्या है एलर्जी ?

एलर्जी हमारे शरीर के रोग प्रतिरोधक शक्ति की कुछ बाहरी तत्वों, जैसे परागकण, धूल , भोजन इत्यादि के प्रति अस्वभाबिक प्रतिक्रिया का नाम है एलर्जी आजकल युवा अवस्था एवं बाल्यावस्था में भी एलर्जी रोग देखने में आता है एलर्जी पैदा करने वाले तत्व वास्तव में कोई हानिकारक किटाणु या विषाणु नही बल्कि अहानिकारक तत्व होते है जैसे गेहू , बादाम परागकण या वातावरण में मौजूद कुछ प्राकतिक तत्व है |

 कारण

आयुर्वेद के अनुसार एलर्जी का मूल कारण आसामान्य पाचक अग्नि कमजोर औज शक्ति और दोषों एवं धातुओ की विषमता इसमे भी अधिक महत्व पाचक अग्नि का माना गया है जब पाचक अग्नि भोजन का सही रूप से पाक नही कर सकती है तो भोजन अपक्व रहता है इस अपक्व भोजन से एक चिकना बिसैला पदार्थ पैदा होता है जिससे “आम” कहते है यह आम ही एलर्जी का मुख्य कारण है यदि समय रहते इसका उपचार न हो तो यह आंतो में जमा हो जाता है और पूरे शरीर में भ्रमण करता है और जहा इसे कमजोर स्थान मिलता है वही जमा हो जाता है और पुराना होने पर अम्विष कहलाता है यह हमारी ओजशक्ति को कमजोर करता है जब कभी उस स्थान या अवयव का सम्पर्क एलरजेन से होता है तो वह प्रतिक्रिया एलर्जी कहलाती है |

उपचार

आयुर्वेदिक उपचार

आयुर्वेद में एलर्जी सफल इलाज मौजूद है आयुर्वेदिक उपचार रोग के मूल कारण को नष्ट करने में सक्षम होने के कारण रोग को जड़ से ठीक करता है | एलर्जी के उपचार में आमविष के निष्कासन के लिये औषधि दी जाती है इसलिये सर्वप्रथम शोधन चिकित्सा करते है , जिससे शरीर में नया आमविष को नष्ट किया जाता है | इसके आतिरिक्त दोषों एवं धातुओ को सम्यावस्था में लाकर ओजशक्ति को स्वस्थ्य बनाया जाता है यदि रोगी मानसिक स्तर पर अस्वस्थ है तो उसका उपचार किया जाता है और एलर्जी के लक्षणों को शांत करने के लिये भी औषधि दी जाती है औषधि का नियमित रूप से सेवन करे रोग पुराना एवं कष्ट साध्य होने के कारण ठीक होने में कुछ समय लेगा इसलिये संयम के साथ चिकित्सक के परामार्शनुसार औषधियो एवं आहार का सेवन करे यदि आप एलर्जी से पीड़ित है तो औषधियो के साथ – साथ निम्न उपचारों के प्रयोग से भी आपको लाभ मिलेगा |

घरेलु उपचार

पानी में ताजा अदरक, सौफं एवं पुदीना उबालकर उसे गुनगुना होने पर पिये इसे आप दिन में 2 – 3 बार ले सकते है इससे शरीर के स्त्रोतों की शुद्धि होती है एवं आम का पाचन होता है लघु एवं सुपाच्य भोजन करे जैसे लौकी , तुरई , मूंगदाल खिचड़ी , पोहा , उपमा , सब्जियों के सूप , उबली हुई सब्जियां , ताजे फल , ताजे फलो का रस एवं सलाद इत्यदि का प्रयोग करे और सप्ताह में एक दिन उपवास करे , केवल फलहार करे नियामित रूप से योग प्राणयाम करे रात को सोते समय एक चम्मच तिरफला चूर्ण ले और हर रोज एक बड़ा चम्मच च्वनप्राश ले |

 

मानवेन्द्र सिंह

मानवेन्द्र सिंह

मानवेंद्र सिंह सॉफ्ट प्रमोशन टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड में फिटनेस और हेल्थ ब्लॉगर हैं। उन्होंने 2006 में BHM स्नातक की डिग्री ली है। उन्हें स्वास्थ्य एवं विज्ञान अनुसंधान के क्षेत्र में लेखन का आनंद मिलता है।

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